प्राचीन समय की बात है, हिमालय की गोद में बसा एक सुंदर गाँव था जिसका नाम आनंदपुर था।इस गाँव में एक साधारण युवक अर्जुन रहता था। अर्जुन मेहनती था, परंतु उसकी आदत थी किवह एक समय में कई काम करने की कोशिश करता, जिससे उसका कोई भी कार्य ठीक से पूरानहीं हो पाता।
एक दिन अर्जुन अपने खेतों में काम कर रहा था और सोच रहा था कि फसल अच्छी कैसे हो। उसीसमय उसने सोचा कि शायद बाजार जाकर नई तकनीक सीखनी चाहिए। लेकिन यह विचार मन मेंआते ही उसने फैसला किया कि उसे पहले अपने गायों की देखभाल करनी चाहिए। अंत में, वहआधे खेत को छोड़कर बाजार चला गया और फिर रास्ते में अपने मित्रों के साथ गपशप में समयबर्बाद कर दिया।
उसे महसूस हुआ कि इस तरह से उसकी ऊर्जा और समय दोनों व्यर्थ जा रहे हैं। लेकिन उसने इसपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और वही जीवनशैली जारी रखी।
गुरु से मुलाकात
एक दिन गाँव में एक महान संत, स्वामी हरिदास, आए। उनकी ख्याति दूर-दूर तक थी। अर्जुन नेसोचा, "मुझे इनसे ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। शायद ये मेरी समस्या का हल बता सकें।" अर्जुनस्वामी जी के पास गया और अपनी व्यथा सुनाई।
स्वामी हरिदास मुस्कुराए और बोले, "तुम्हारी समस्या का हल बहुत सरल है। तुम एक समय मेंकेवल एक काम करो, और उस काम को पूरी आत्मा से करो। बाकी सब भूल जाओ।"
अर्जुन ने कहा, "गुरुदेव, यह तो कहने में आसान लगता है, पर इसे करना कठिन है। क्या आप मुझेइसे समझाने के लिए कोई उदाहरण देंगे?"
तीरंदाजी का पाठ
स्वामी हरिदास ने अर्जुन को पास के जंगल में बुलाया। वहाँ एक पेड़ की डाल पर एक मिट्टी काघड़ा लटका हुआ था। स्वामी जी ने अर्जुन को तीर और धनुष दिया और कहा, "उस घड़े कोनिशाना बनाओ। लेकिन ध्यान रहे, तुम्हारी आँख, मन, और आत्मा केवल उस घड़े पर होनीचाहिए।"
अर्जुन ने तीर चढ़ाया, लेकिन उसका ध्यान कभी हवा की दिशा पर जाता, कभी आसपास कीचिड़ियों की आवाज पर। उसने तीर चलाया, परंतु निशाना चूक गया।
स्वामी जी ने उसे शांत किया और फिर से ध्यान केंद्रित करने को कहा। "अब अपनी पूरी आत्मा सेकेवल घड़े को देखो। सोचो कि इस समय केवल यही तुम्हारा उद्देश्य है।" अर्जुन ने ध्यान लगाकरतीर चलाया और इस बार निशाना बिलकुल सही लगा।
अर्जुन का परिवर्तन
उस दिन अर्जुन ने सीखा कि जीवन में सफलता का रहस्य ध्यान केंद्रित करके काम करना है। उसनेयह सीख अपने जीवन में उतार ली। अब वह जब भी कोई कार्य करता, तो अपनी पूरी ऊर्जा औरध्यान उसी पर लगाता। धीरे-धीरे उसने अपनी खेतों की उपज बढ़ा ली, अपने जानवरों की बेहतरदेखभाल की, और अपनी कला में निपुणता हासिल की।
कुछ वर्षों में अर्जुन न केवल गाँव का सबसे सफल किसान बन गया, बल्कि उसकी एकाग्रता औरकर्मठता के कारण लोग उसे अपना आदर्श मानने लगे।
निष्कर्ष
जीवन में एक समय में एक काम करना और उसे पूरी आत्मा से करना ही सफलता की कुंजी है।जब हम अपने चारों ओर के distractions को हटाकर केवल अपने उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करतेहैं, तो हम न केवल अपने कार्य को बेहतर करते हैं, बल्कि आत्मविश्वास और संतुष्टि भी प्राप्त करतेहैं। अर्जुन ने यह पाठ सिखाया कि जो भी करो, उसे पूरे मन से करो और बाकी सब कुछ भूलजाओ। यही जीवन की सच्ची साधना है।
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