Thursday, November 25, 2021

नसीब से मिले वो है दोस्त

खुशी एक ऐसा एहसास है जिसकी हर किसी को  तलाश है,
     गम एक ऐसा अनुभव है जो सबके पास है,
        मगर  ज़िन्दगी तो वही जीता है जिसको खुद पर विश्वास है,,,!!!

जब मिलो किसी से तो जरा दूर का  रिश्ता रखना, 
      बहुत  तड़पाते हैं अक्सर  सीने से लगने वाले,,,!!!
लोगों के पास बहुत कुछ है मगर  मुश्किल यही है कि,
      भरोसे पे  शक है और अपने शक पर भरोसा है,,,!!!
किसी के अन्दर ज्यादा डूबोगे तो  टूटना  पड़ेगा, 
      यकीन न हो तो  बिस्कुट से पूछ लेना,,,!!!
खिलौना से शुरु होकर तू कब खिलौना बन गई ए  ज़िन्दगी
        पता ही नहीं चला!!!

एक औरत की सबसे बड़ी  ताकत उसका पति होता है,
       और उसकी सबसे बड़ी  कमजोरी उसकी  बिगड़ी हुई औलाद होती है,,,!!!

एक व्यक्ति ने फकीर से पूछा कि उत्सव मनाने का  बेहतरीन दिन कौन सा है,
       फकीर ने  प्यार से कहा कि मौत से एक दिन पहले,
        व्यकि ने कहा  मौत का तो कोई  वक्त नहीं,
         फकीर ने  मुस्कुराते हुए कहा तो  ज़िन्दगी का हर दिन  आखिरी समझो,,,!!!
जेब में जरा सा में छेद क्या हो गया ,,?
       सिक्के से ज्यादा तो  रिश्ते गिर गए,,,!!!
जो  आसानी से मिले वो है धोखा, 
     जो  मुश्किल से मिले वो है  इज्जत
      जो  दिल से मिले वो है  प्यार
      और जो नसीब से मिले वो है  दोस्त,,,!!!
पहले होती थी  बातें-ढेर  सारी अब तो कैसे हो से  शुरू  होकर ,
       ठीक हूँ पर *खत्म* हो जाती है,,,!!!

Monday, November 15, 2021

सच्चाई आपको चौंका सकती है

 ट्रेन की खिड़की से बाहर देख एक 24 साल का लड़का चिल्लाया...

'पिताजी, देखो पेड़ पीछे जा रहे हैं!'
पिताजी मुस्कुराए और पास बैठे एक युवा जोड़े ने 24 साल के बच्चे के बचपन के व्यवहार को दया से देखा, अचानक वह फिर से चिल्लाया ...
'पिताजी, देखो बादल हमारे साथ दौड़ रहे हैं!'
दंपति विरोध नहीं कर सके और बूढ़े व्यक्ति से कहा ...
'आप अपने बेटे को अच्छे डॉक्टर के पास क्यों नहीं ले जाते?'
बुढ़िया मुस्कुराई और बोली... 'मैंने किया और हम अभी अस्पताल से आ रहे हैं, मेरा बेटा जन्म से अंधा था, आज ही उसकी आंख लग गई।'
ग्रह पर हर एक व्यक्ति की एक कहानी है। लोगों को सही मायने में जानने से पहले उन्हें जज न करें। सच्चाई आपको चौंका सकती है।"

Tuesday, November 9, 2021

आवश्यक संघर्ष

 एक बार की बात है, एक आदमी को एक तितली मिली जो अपने कोकून से निकलने लगी थी। वह बैठ गया और घंटों तक तितली को देखता रहा क्योंकि वह एक छोटे से छेद से खुद को मजबूर करने के लिए संघर्ष कर रही थी। फिर, इसने अचानक प्रगति करना बंद कर दिया और ऐसा लग रहा था कि यह अटका हुआ है

इसलिए, आदमी ने तितली की मदद करने का फैसला किया। उसने कैंची की एक जोड़ी ली और कोकून के शेष हिस्से को काट दिया। तितली तब आसानी से निकली, हालाँकि उसका शरीर सूजा हुआ था और छोटे, सिकुड़े हुए पंख थे।
उस आदमी ने इसके बारे में कुछ नहीं सोचा, और वह वहीं बैठकर तितली को सहारा देने के लिए पंखों के बढ़ने की प्रतीक्षा कर रहा था। हालांकि, ऐसा कभी नहीं हुआ। तितली ने अपना शेष जीवन उड़ने में असमर्थ, छोटे पंखों और सूजे हुए शरीर के साथ रेंगते हुए बिताया।
आदमी के दयालु हृदय के बावजूद, वह यह नहीं समझ पाया कि सीमित कोकून और छोटे छेद के माध्यम से खुद को पाने के लिए तितली द्वारा आवश्यक संघर्ष एक बार उड़ने के लिए खुद को तैयार करने के लिए तितली के शरीर से तरल पदार्थ को अपने पंखों में मजबूर करने का भगवान का तरीका था। यह मुफ़्त था

Sunday, October 24, 2021

सच्ची साधना

एक व्यक्ति हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करता था। धीरे धीरे वह काफी बुजुर्ग हो चला था इसीलिए एक कमरे मे ही पड़ा रहता था। जब भी उसे शौच, स्नान आदि के लिये जाना होता था वह अपने बेटो को आवाज लगाता था और बेटे ले जाते थे। 
         धीरे-धीरे कुछ दिन बाद बेटे कई बार आवाज लगाने के बाद भी कभी-कभी आते और देर रात तो नहीं भी आते थे। इस दौरान वे कभी-कभी गंदे बिस्तर पर ही रात बिता दिया करते थे। जब और ज्यादा बुढ़ापा होने के कारण उन्हें कम दिखाई देने लगा।
        एक दिन रात को निवृत्त होने के लिये जैसे ही उन्होंने आवाज लगायी, तुरन्त एक लड़का आता है और बडे ही कोमल स्पर्श के साथ उनको निवृत्त करवा कर बिस्तर पर लेटा जाता है। अब ये रोज का नियम हो गया।
        एक रात उनको शक हो जाता है कि, पहले तो बेटों को रात में कई बार आवाज लगाने पर भी नही आते थे। लेकिन ये तो आवाज लगाते ही दूसरे क्षण आ जाता है और बडे कोमल स्पर्श से सब निवृत्त करवा देता है। 
        एक रात वह व्यक्ति उसका हाथ पकड़ लेता है और पूछता है कि सच बता तू कौन है ? मेरे बेटे तो ऐसे नही हैं। तभी अंधेरे कमरे में एक अलौकिक उजाला हुआ और उस लड़के रूपी ईश्वर ने अपना वास्तविक रूप दिखाया। 
          वह व्यक्ति रोते हुये कहता है- "हे प्रभु ! आप स्वयं मेरे निवृत्ती के कार्य कर रहे हैं।। यदि मुझसे इतने प्रसन्न हो तो मुक्ति ही दे दो ना।"  प्रभु कहते है कि जो आप भुगत रहे है वो आपके प्रारब्ध हैं। आप मेरे सच्चे साधक है, हर समय मेरा नाम जप करते हैं इसलिये मैं आपके प्रारब्ध भी आपकी सच्ची साधना के कारण स्वयं कटवा रहा हूँ। व्यक्ति कहता है कि क्या मेरे प्रारब्ध आपकी कृपा से भी बडे है, क्या आपकी कृपा, मेरे प्रारब्ध नही काट सकती है ?
        प्रभु कहते है, मेरी कृपा सर्वोपरि हैं ये अवश्य आपके प्रारब्ध काट सकती है, लेकिन फिर अगले जन्म मे आपको ये प्रारब्ध भुगतने फिर से आना होगा। यही कर्म नियम है। इसलिए आपके प्रारब्ध मैं स्वयं अपने हाथो से कटवा कर इस जन्म-मरण से आपको मुक्ति देना चाहता हूँ। प्रभु कहते है,  प्रारब्ध तीन तरह के होते है। "मन्द, तीव्र तथा तीव्रतम" मन्द प्रारब्ध मेरा नाम जपने से कट जाते हैं।। तीव्र प्रारब्ध किसी सच्चे संत का संग करके श्रद्धा और विश्वास से मेरा नाम जपने पर कट जाते हैं। पर तीव्रतम प्रारब्ध भुगतने ही पडते है। लेकिन जो हर समय श्रद्धा और विश्वास से मुझे जपते हैं, उनके प्रारब्ध मैं स्वयं साथ रहकर कटवाता हूँ और तीव्रता का अहसास नहीं होने देता हूँ।
एक व्यक्ति हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करता था। धीरे धीरे वह काफी बुजुर्ग हो चला था इसीलिए एक कमरे मे ही पड़ा रहता था। जब भी उसे शौच, स्नान आदि के लिये जाना होता था वह अपने बेटो को आवाज लगाता था और बेटे ले जाते थे। 
         धीरे-धीरे कुछ दिन बाद बेटे कई बार आवाज लगाने के बाद भी कभी-कभी आते और देर रात तो नहीं भी आते थे। इस दौरान वे कभी-कभी गंदे बिस्तर पर ही रात बिता दिया करते थे। जब और ज्यादा बुढ़ापा होने के कारण उन्हें कम दिखाई देने लगा।
        एक दिन रात को निवृत्त होने के लिये जैसे ही उन्होंने आवाज लगायी, तुरन्त एक लड़का आता है और बडे ही कोमल स्पर्श के साथ उनको निवृत्त करवा कर बिस्तर पर लेटा जाता है। अब ये रोज का नियम हो गया।
        एक रात उनको शक हो जाता है कि, पहले तो बेटों को रात में कई बार आवाज लगाने पर भी नही आते थे। लेकिन ये तो आवाज लगाते ही दूसरे क्षण आ जाता है और बडे कोमल स्पर्श से सब निवृत्त करवा देता है। 
        एक रात वह व्यक्ति उसका हाथ पकड़ लेता है और पूछता है कि सच बता तू कौन है ? मेरे बेटे तो ऐसे नही हैं। तभी अंधेरे कमरे में एक अलौकिक उजाला हुआ और उस लड़के रूपी ईश्वर ने अपना वास्तविक रूप दिखाया। 
          वह व्यक्ति रोते हुये कहता है- "हे प्रभु ! आप स्वयं मेरे निवृत्ती के कार्य कर रहे हैं।। यदि मुझसे इतने प्रसन्न हो तो मुक्ति ही दे दो ना।"  प्रभु कहते है कि जो आप भुगत रहे है वो आपके प्रारब्ध हैं। आप मेरे सच्चे साधक है, हर समय मेरा नाम जप करते हैं इसलिये मैं आपके प्रारब्ध भी आपकी सच्ची साधना के कारण स्वयं कटवा रहा हूँ। व्यक्ति कहता है कि क्या मेरे प्रारब्ध आपकी कृपा से भी बडे है, क्या आपकी कृपा, मेरे प्रारब्ध नही काट सकती है ?
        प्रभु कहते है, मेरी कृपा सर्वोपरि हैं ये अवश्य आपके प्रारब्ध काट सकती है, लेकिन फिर अगले जन्म मे आपको ये प्रारब्ध भुगतने फिर से आना होगा। यही कर्म नियम है। इसलिए आपके प्रारब्ध मैं स्वयं अपने हाथो से कटवा कर इस जन्म-मरण से आपको मुक्ति देना चाहता हूँ। प्रभु कहते है,  प्रारब्ध तीन तरह के होते है। "मन्द, तीव्र तथा तीव्रतम" मन्द प्रारब्ध मेरा नाम जपने से कट जाते हैं।। तीव्र प्रारब्ध किसी सच्चे संत का संग करके श्रद्धा और विश्वास से मेरा नाम जपने पर कट जाते हैं। पर तीव्रतम प्रारब्ध भुगतने ही पडते है। लेकिन जो हर समय श्रद्धा और विश्वास से मुझे जपते हैं, उनके प्रारब्ध मैं स्वयं साथ रहकर कटवाता हूँ और तीव्रता का अहसास नहीं होने देता हूँ।

Saturday, October 9, 2021

जीवन का आनंद

गाँव में एक बूढ़ा रहता था। सारा गाँव उससे थक गया था; वह हमेशा उदास रहता था, वह लगातार शिकायत करता था और हमेशा बुरे मूड में रहता था। वह जितने लंबे समय तक जीवित रहा, वह उतना ही निंदनीय होता गया और उसके शब्द अधिक जहरीले होते गए। लोगों ने उससे बचने की पूरी कोशिश की क्योंकि उसका दुर्भाग्य संक्रामक था। उसने दूसरों में दुख की भावना पैदा की।
लेकिन एक दिन, जब वह अस्सी वर्ष के हुए, एक अविश्वसनीय बात हुई। फ़ौरन सभी को यह अफवाह सुनाई देने लगी: 'बूढ़ा आदमी आज खुश है, वह किसी बात की शिकायत नहीं करता, मुस्कुराता है, और उसका चेहरा भी तरोताज़ा हो जाता है।'
सारा गाँव उस आदमी के पास इकट्ठा हो गया और उससे पूछा, “तुम्हें क्या हुआ?”
बूढ़े ने जवाब दिया, 'कुछ खास नहीं। अस्सी साल से मैं खुशी का पीछा कर रहा हूं और यह बेकार था। और फिर मैंने खुशी के बिना जीने और जीवन का आनंद लेने का फैसला किया। इसलिए मैं अब खुश हूं।'

Monday, September 27, 2021

दूसरों को धोखा देने की कोशिश मत करो

एक बार, एक किसान था जो नियमित रूप से एक बेकर को मक्खन बेचता था। एक दिन, बेकर ने यह देखने के लिए मक्खन को तौलने का फैसला किया कि क्या उसे उतनी ही मात्रा मिल रही है जितनी उसने मांगी थी। उसे पता चला कि वह नहीं है, इसलिए वह किसान को अदालत में ले गया।
न्यायाधीश ने किसान से पूछा कि क्या वह मक्खन को तौलने के लिए किसी उपाय का उपयोग करता है। किसान ने उत्तर दिया, 'महाराज, मैं आदिम हूँ। मेरे पास उचित माप नहीं है, लेकिन मेरे पास एक पैमाना है।'
न्यायाधीश ने उत्तर दिया, "तो फिर तुम मक्खन कैसे तौलते हो?"
किसान ने उत्तर दिया; "महाराज, बहुत पहले से ही बेकर ने मुझसे मक्खन खरीदना शुरू किया था, मैं उससे एक पाउंड की रोटी खरीद रहा था। हर दिन, जब बेकर रोटी लाता है, तो मैं इसे पैमाने पर रखता हूं और मक्खन में उतना ही वजन देता हूं। अगर किसी को दोष देना है, तो वह बेकर है।'
कहानी का नैतिक : जीवन में आपको वही मिलता है जो आप देते हैं। दूसरों को धोखा देने की कोशिश मत करो

Wednesday, September 22, 2021

अद्भुत मित्रता

एक भंवरे की मित्रता एक गोबरी (गोबर में रहने वाले) कीड़े से हो गई, एक दिन कीड़े ने भंवरे से कहा भाई तुम मेरे सबसे अच्छे मित्र हो, इसलिये मेरे यहाँ भोजन पर आओ!
भंवरा भोजन खाने पहुँचा! बाद में भंवरा सोच में पड़ गया- कि मैंने बुरे का संग किया इसलिये मुझे गोबर खाना पड़ा! अब भंवरे ने कीड़े को अपने यहां आने का निमंत्रन दिया कि तुम कल मेरे यहाँ आओ!
अगले दिन कीड़ा भंवरे के यहाँ पहुँचा! भंवरे ने कीड़े को उठा कर गुलाब के फूल में बिठा दिया! कीड़े ने परागरस पिया! मित्र का धन्यवाद कर ही रहा था कि पास के मंदिर का पुजारी आया और फूल तोड़ कर ले गया और बिहारी जी के चरणों में चढा दिया! कीड़े को ठाकुर जी के दर्शन हुये! चरणों में बैठने का सौभाग्य भी मिला! संध्या में पुजारी ने सारे फूल इक्कठा किये और गंगा जी में छोड़ दिए! कीड़ा अपने भाग्य पर हैरान था! इतने में भंवरा उड़ता हुआ कीड़े के पास आया, पूछा-मित्र! क्या हाल है? कीड़े ने कहा-भाई! जन्म-जन्म के पापों से मुक्ति हो गयी! ये सब अच्छी संगत का फल है!
"संगत से गुण ऊपजे, संगत से अवगुण जाए
"लोहा लगा जहाज में , पानी में उतराय!"*
कोई भी नही जानता कि हम इस जीवन के सफ़र में एक दूसरे से क्यों मिलते है,
सब के साथ रक्त संबंध नहीं हो सकते परन्तु ईश्वर हमें कुछ लोगों के साथ मिलाकर अद्भुत रिश्तों में बांध देता हैं,हमें उन रिश्तों को हमेशा संजोकर रखना चाहिए

Sunday, September 19, 2021

गिले-शिकवे

 एक महिला रोज मंदिर जाती थी ! एक दिन उस महिला ने पुजारी से कहा अब मैं मंदिर नही आया करूँगी !


इस पर पुजारी ने पूछा -- क्यों ?

तब महिला बोली -- मैं देखती हूँ लोग मंदिर परिसर में अपने फोन से अपने व्यापार की बात करते हैं ! कुछ ने तो मंदिर को ही गपशप करने का स्थान चुन रखा है ! कुछ पूजा कम पाखंड,दिखावा ज्यादा करते हैं !

इस पर पुजारी कुछ देर तक चुप रहे फिर कहा -- सही है ! परंतु अपना अंतिम निर्णय लेने से पहले क्या आप मेरे कहने से कुछ कर सकती हैं !

महिला बोली -आप बताइए क्या करना है ?

पुजारी ने कहा -- एक गिलास पानी भर लीजिए और 2 बार मंदिर परिसर के अंदर परिक्रमा लगाइए । शर्त ये है कि गिलास का पानी गिरना नहीं चाहिये !

महिला बोली -- मैं ऐसा कर सकती हूँ !

फिर थोड़ी ही देर में उस महिला ने ऐसा ही कर दिखाया ! उसके बाद मंदिर के पुजारी ने महिला से 3 सवाल पूछे -

1.क्या आपने किसी को फोन पर बात करते देखा?

2.क्या आपने किसी को मंदिर में गपशप करते देखा?

3.क्या किसी को पाखंड करते देखा?

महिला बोली -- नहीं मैंने कुछ भी नहीं देखा !

फिर पुजारी बोले --- जब आप परिक्रमा लगा रही थीं तो आपका पूरा ध्यान गिलास पर था कि इसमें से पानी न गिर जाए इसलिए आपको कुछ दिखाई नहीं दिया|

 अब जब भी आप मंदिर आयें तो अपना ध्यान सिर्फ़ परम पिता परमात्मा में ही लगाना फिर आपको कुछ दिखाई नहीं देगा| सिर्फ भगवान ही सर्वत्र दिखाई देगें|

      '' जाकी रही भावना जैसी ..
        प्रभु मूरत देखी तिन तैसी|''

जीवन मे दुःखो के लिए कौन जिम्मेदार है ?

 ना भगवान,
 ना गृह-नक्षत्र,
 ना भाग्य,
 ना रिश्तेदार,
 ना पडोसी,
 ना सरकार,

जिम्मेदार आप स्वयं है|

1) आपका सरदर्द, फालतू विचार का परिणाम|

2) पेट दर्द, गलत खाने का परिणाम|

3) आपका कर्ज, जरूरत से ज्यादा खर्चे का परिणाम|

4) आपका दुर्बल /मोटा /बीमार शरीर, गलत जीवन शैली का परिणाम|

5) आपके कोर्ट केस, आप के अहंकार का परिणाम|

6) आपके फालतू विवाद, ज्यादा व् व्यर्थ बोलने का परिणाम|
उपरोक्त कारणों के अलावा सैकड़ों कारण है और बेवजह दोषारोपण दूसरों पर करते रहते हैं | इसमें ईश्वर दोषी नहीं है|
अगर हम इन कष्टों के कारणों पर बारिकी से विचार करें तो पाएंगे की कहीं न कहीं हमारी मूर्खताएं ही इनके पीछे है|
_गिले-शिकवे सिर्फ़ साँस लेने तक ही चलते हैं,_
 बाद में तो सिर्फ़ पछतावे रह जाते हैं..!!
आपका जीवन प्रकाशमय हो तथा शुभ हो l

Monday, September 6, 2021

हम कितने खुशकिस्मत है

रामेश्वर ने पत्नी के स्वर्ग वास हो जाने के बाद अपने दोस्तों के साथ सुबह शाम पार्क में टहलना और गप्पें मारना, पास के मंदिर में दर्शन करने को अपनी दिनचर्या बना लिया था।
हालांकि घर में उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं थी। सभी उनका बहुत ध्यान रखते थे, लेकिन आज सभी दोस्त चुपचाप बैठे थे।
एक दोस्त को वृद्धाश्रम भेजने की बात से सभी दु:खी थे" आप सब हमेशा मुझसे पूछते थे कि मैं भगवान से तीसरी रोटी क्यों माँगता हूँ? आज बतला देता हूँ। "
कमल ने पूछा  "क्या बहू तुम्हें सिर्फ तीन रोटी ही देती है ?"
बड़ी उत्सुकता से एक दोस्त ने पूछा? "नहीं यार! ऐसी कोई बात नहीं है, बहू बहुत अच्छी है।
असल में  "रोटी, चार प्रकार की होती है।"
 पहली "सबसे स्वादिष्ट" रोटी "माँ की "ममता" और "वात्सल्य" से भरी हुई। जिससे पेट तो भर जाता है, पर मन कभी नहीं भरता।
एक दोस्त ने कहा, सोलह आने सच, पर शादी के बाद माँ की रोटी कम ही मिलती है।" उन्होंने आगे कहा  "हाँ, वही तो बात है।
दूसरी रोटी पत्नी की होती है जिसमें अपनापन और "समर्पण" भाव होता है जिससे "पेट" और "मन" दोनों भर जाते हैं।", क्या बात कही है यार ?" ऐसा तो हमने कभी सोचा ही नहीं।
फिर तीसरी रोटी किस की होती है?" एक दोस्त ने सवाल किया।
"तीसरी रोटी बहू की होती है जिसमें सिर्फ "कर्तव्य" का भाव होता है जो कुछ कुछ स्वाद भी देती है और पेट भी भर देती है और वृद्धाश्रम की परेशानियों से भी बचाती है", थोड़ी देर के लिए वहाँ चुप्पी छा गई।
लेकिन ये चौथी रोटी कौन सी होती है ?" मौन तोड़ते हुए एक दोस्त ने पूछा-
चौथी रोटी नौकरानी की होती है। जिससे ना तो इन्सान का "पेट" भरता है न ही "मन" तृप्त होता है और "स्वाद" की तो कोई गारँटी ही नहीं है", तो फिर हमें क्या करना चाहिये यार?
माँ की हमेशा पूजा करो, पत्नी को सबसे अच्छा दोस्त बना कर जीवन जिओ, बहू को अपनी बेटी समझो और छोटी मोटी ग़लतियाँ नज़रन्दाज़ कर दो बहू खुश रहेगी तो बेटा भी आपका ध्यान रखेगा।
यदि हालात चौथी रोटी तक ले ही आयें तो भगवान का शुकर करो कि उसने हमें ज़िन्दा रखा हुआ है, अब स्वाद पर ध्यान मत दो केवल जीने के लिये बहुत कम खाओ ताकि आराम से बुढ़ापा कट जाये, बड़ी खामोशी से सब दोस्त सोच रहे थे कि वाकई, हम कितने खुशकिस्मत है

Thursday, September 2, 2021

तोड़ना आसान है, जुड़े रहना बहुत मुश्किल है

गधा पेड़ से बंधा था। शैतान आया और उसे खोल गया।
गधा मस्त होकर खेतों की ओर भाग निकला और खड़ी फसल को खराब करने लगा।
किसान की पत्नी ने यह देखा तो गुस्से में गधे को मार डाला।
गधे की लाश देखकर गधे के मालिक को बहुत गुस्सा आया और उसने किसान की पत्नी को गोली मार दी। 
किसान पत्नी की मौत से इतना गुस्से में आ गया कि उसने गधे के मालिक को गोली मार दी।
गधे के मालिक की पत्नी ने जब पति की मौत की खबर सुनी तो गुस्से में बेटों को किसान का घर जलाने का आदेश दिया।
बेटे शाम में गए और मां का आदेश खुशी-खुशी पूरा कर आए। उन्होंने मान लिया कि किसान भी घर के साथ जल गया होगा।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसान वापस आया और उसने गधे के मालिक की पत्नी और बेटों, तीनों की हत्या कर दी।
इसके बाद उसे पछतावा हुआ और उसने शैतान से पूछा कि यह सब नहीं होना चाहिए था। ऐसा क्यों हुआ?
शैतान ने कहा मैंने कुछ नहीं किया। मैंने सिर्फ गधा खोला लेकिन तुम सबने रिऐक्ट किया, ओवर रिऐक्ट किया और अपने अंदर के शैतान को बाहर आने दिया।
 इसलिए अगली बार किसी का जवाब देने, प्रतिक्रिया देने, किसी से बदला लेने से पहले एक लम्हे के लिए रुकना और सोचना ज़रूर।'
ध्यान रखें। कई बार शैतान हमारे बीच सिर्फ गधा छोड़ता है और बाकी विनाश हम खुद कर देते हैं !!
मिल जुल कर मुस्कुरा कर खुशी से रहिये याद रखें-
तोड़ना आसान है, जुड़े रहना बहुत मुश्किल है...
लड़ाना आसान है, मिलाना बहुत मुश्किल...

Tuesday, August 17, 2021

जीवन में आपके तनाव और चिंताएँ

एक बार की बात है एक मनोविज्ञान के प्रोफेसर छात्रों से भरे एक सभागार में तनाव प्रबंधन के सिद्धांतों को पढ़ाते हुए एक मंच पर घूमते थे। जैसे ही उसने एक गिलास पानी उठाया, सभी को उम्मीद थी कि उनसे ठेठ 'ग्लास आधा खाली या गिलास आधा भरा' प्रश्न पूछा जाएगा। इसके बजाय, उसके चेहरे पर मुस्कान के साथ, प्रोफेसर ने पूछा, 'यह पानी का गिलास कितना भारी है जिसे मैं पकड़ रहा हूँ?'
छात्रों ने आठ औंस से लेकर दो पाउंड तक के उत्तर चिल्लाए।
उसने जवाब दिया, 'मेरे नजरिए से, इस गिलास का पूर्ण वजन मायने नहीं रखता। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि मैं इसे कितने समय तक धारण करता हूं। अगर मैं इसे एक या दो मिनट के लिए पकड़ता हूं, तो यह काफी हल्का होता है। अगर मैं इसे एक घंटे तक सीधा रखता हूं, तो इसका वजन मेरे हाथ में थोड़ा दर्द कर सकता है। अगर मैं इसे एक दिन के लिए सीधा रखता हूं, तो मेरी बांह में ऐंठन होने की संभावना है और मैं पूरी तरह से सुन्न और लकवाग्रस्त महसूस करूंगा, जिससे मुझे कांच को फर्श पर गिराने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। प्रत्येक मामले में, कांच का वजन नहीं बदलता है, लेकिन जितनी देर मैं इसे पकड़ता हूं, यह मुझे उतना ही भारी लगता है।'
जैसे ही कक्षा ने सहमति में अपना सिर हिलाया, उसने आगे कहा, 'जीवन में आपके तनाव और चिंताएँ पानी के इस गिलास की तरह हैं। कुछ देर उनके बारे में सोचें और कुछ न हो। उनके बारे में थोड़ा और सोचें और आपको थोड़ा दर्द होने लगे। दिन भर उनके बारे में सोचें, और आप पूरी तरह से स्तब्ध और लकवाग्रस्त महसूस करेंगे - जब तक आप उन्हें छोड़ नहीं देते, तब तक आप कुछ और करने में असमर्थ हैं।'"

Sunday, August 8, 2021

विजय और राजू दोस्त थे। एक दिन छुट्टी के दिन जंगल की खोज में उन्होंने एक भालू को अपनी ओर आते देखा।स्वाभाविक रूप से, वे दोनों भयभीत थे, इसलिए राजू, जो पेड़ों पर चढ़ना जानता था, जल्दी से एक पर चढ़ गया। उसने अपने उस मित्र के लिए एक विचार नहीं छोड़ा, जो नहीं जानता था कि कैसे चढ़ना है।विजय ने एक पल के लिए सोचा। उसने सुना था कि जानवर शवों पर हमला नहीं करते हैं, इसलिए वह जमीन पर गिर गया और अपनी सांस रोक ली। भालू ने उसे सूँघा, सोचा कि वह मर चुका है, और अपने रास्ते चला गया।राजू ने पेड़ से नीचे उतरने के बाद विजय से पूछा, 'भालू तुम्हारे कानों में क्या फुसफुसा रहा था?' विजय ने जवाब दिया, 'भालू ने मुझे आप जैसे दोस्तों से दूर रहने के लिए कहा।'"


Wednesday, August 4, 2021

 हर रविवार की सुबह मैं अपने घर के पास एक पार्क के आसपास हल्की जॉगिंग करता हूं। पार्क के एक कोने में एक झील है। जब भी मैं इस झील के किनारे टहलता हूं, मैं देखता हूं कि वही बुजुर्ग महिला पानी के किनारे बैठी है और उसके पास एक छोटा धातु का पिंजरा है।

पिछले रविवार को मेरी जिज्ञासा ने मुझे सबसे अच्छा लगा, इसलिए मैंने जॉगिंग करना बंद कर दिया और उसके पास चला गया। जैसे-जैसे मैं करीब आया, मैंने महसूस किया कि धातु का पिंजरा वास्तव में एक छोटा जाल था। जाल के आधार के चारों ओर धीरे-धीरे घूमते हुए, तीन कछुए थे, जिन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ था। उसकी गोद में चौथा कछुआ था जिसे वह स्पंजी ब्रश से सावधानी से साफ़ कर रही थी।
'नमस्कार,' मैंने कहा। 'मैं आपको यहां हर रविवार की सुबह देखता हूं। अगर आपको मेरी नीरसता से ऐतराज नहीं है, तो मुझे यह जानना अच्छा लगेगा कि आप इन कछुओं के साथ क्या कर रहे हैं।'
वह हंसी। 'मैं उनके गोले साफ कर रही हूं,' उसने जवाब दिया। "कछुए के खोल पर कुछ भी, जैसे शैवाल या मैल, कछुए की गर्मी को अवशोषित करने की क्षमता को कम करता है और तैरने की क्षमता को बाधित करता है। यह समय के साथ खोल को खराब और कमजोर भी कर सकता है।'
'क्या बात है! यह वास्तव में आपके लिए बहुत अच्छा है!' मैंने कहा।
वह आगे बढ़ी: 'मैं प्रत्येक रविवार की सुबह इस झील के किनारे आराम करने और इन छोटे लोगों की मदद करने में कुछ घंटे बिताती हूं। यह बदलाव लाने का मेरा अपना अजीब तरीका है।'
'लेकिन क्या अधिकांश मीठे पानी के कछुए अपना पूरा जीवन शैवाल और अपने खोल से लटके हुए मैल के साथ नहीं जीते हैं?' मैंने पूछा।
'हाँ, दुख की बात है, वे करते हैं,' उसने जवाब दिया।
मैंने अपना सिर खुजलाया। 'तो ठीक है, क्या आपको नहीं लगता कि आपका समय बेहतर तरीके से व्यतीत हो सकता है? मेरा मतलब है, मुझे लगता है कि आपके प्रयास दयालु और सभी हैं, लेकिन दुनिया भर की झीलों में ताजे पानी के कछुए रहते हैं। और इनमें से 99% कछुओं के पास आपके जैसे दयालु लोग नहीं हैं जो उनके गोले को साफ करने में मदद करें। तो, कोई अपराध नहीं ... लेकिन वास्तव में आपके स्थानीय प्रयासों से वास्तव में कैसे फर्क पड़ रहा है?'
महिला जोर से हंस पड़ी। फिर उसने अपनी गोद में कछुए को देखा, उसके खोल से शैवाल के आखिरी टुकड़े को साफ़ किया, और कहा, 'स्वीटी, अगर यह छोटा लड़का बात कर सकता है, तो वह आपको बताएगा कि मैंने दुनिया में सभी अंतर बनाए हैं

Sunday, August 1, 2021

माता पिता का ऋण

एक बार एक पिता और उसका पुत्र जलमार्ग से कहीं यात्रा कर रहे थे और तभी अचानक दोनों रास्ता भटक गये। फिर उनकी नौका भी उन्हें ऐसी जगह ले गई, जहाँ दो टापू आस-पास थे और फिर वहाँ पहुंच कर उनकी नौका टूट गई।
 पिता ने पुत्र से कहा, "अब लगता है, हम दोनों का अंतिम समय आ गया है, दूर-दूर तक कोई सहारा नहीं दिख रहा है।"
अचानक पिता को एक उपाय सूझा, अपने पुत्र से कहा कि "वैसे भी हमारा अंतिम समय नज़दीक है, तो क्यों न हम ईश्वर की प्रार्थना करें।"
उन्होने दोनों टापू आपस में बाँट लिए।
एक पर पिता और एक पर पुत्र, और दोनों अलग-अलग टापू पर ईश्वर की प्रार्थना करने लगे।
पुत्र ने ईश्वर से कहा, 'हे भगवन, इस टापू पर पेड़-पौधे उग जाए जिसके फल-फूल से हम अपनी भूख मिटा सकें।'
ईश्वर ने प्रार्थना सुनी गयी, तत्काल पेड़-पौधे उग गये और उसमें फल-फूल भी आ गये। उसने कहा ये तो चमत्कार हो गया।
फिर उसने प्रार्थना की, एक सुंदर स्त्री आ जाए जिससे हम यहाँ उसके साथ रहकर अपना परिवार बसाएँ।
तत्काल एक सुंदर स्त्री प्रकट हो गयी।
अब उसने सोचा कि मेरी हर प्रार्थना सुनी जा रही है, तो क्यों न मैं ईश्वर से यहाँ से बाहर निकलने का रास्ता माँगे लूँ ? 
उसने ऐसा ही किया।
उसने प्रार्थना की, एक नई नाव आ जाए जिसमें सवार होकर मैं यहाँ से बाहर निकल सकूँ।
तत्काल नाव प्रकट हुई और पुत्र उसमें सवार होकर बाहर निकलने लगा।
तभी एक आकाशवाणी हुई, बेटा तुम अकेले जा रहे हो? अपने पिता को साथ नहीं लोगे ?
 पुत्र ने कहा, उनको छोड़ो, प्रार्थना तो उन्होंने भी की, लेकिन आपने उनकी एक भी नहीं सुनी।  शायद उनका मन पवित्र नहीं है, तो उन्हें इसका फल भोगने दो ना ?
आकाशवाणी ने कहा, 'क्या तुम्हें पता है कि तुम्हारे पिता ने क्या प्रार्थना की ?
पुत्र बोला, नहीं।
 आकाशवाणी बोली तो सुनो, 'तुम्हारे पिता ने एक ही प्रार्थना की..." हे भगवन! मेरा पुत्र आपसे जो भी माँगे, उसे दे देना क्योंकि मैं उसे दुःख में हरगिज़ नहीं देख सकता औऱ अगर मरने की बारी आए तो मेरी मौत पहले हो " और जो कुछ तुम्हें मिल रहा है उन्हीं की प्रार्थना का परिणाम है।'
 पुत्र बहुत शर्मिंदा हो गया।*हमें जो भी सुख, प्रसिद्धि, मान, यश, धन, संपत्ति और सुविधाएं मिल रही है उसके पीछे किसी अपने की प्रार्थना और शक्ति जरूर होती है लेकिन हम नादान रहकर अपने अभिमान वश इस सबको अपनी उपलब्धि मानने की भूल करते रहते हैं और जब ज्ञान होता है तो असलियत का पता लगने पर सिर्फ़ पछताना पड़ता है।हम चाह कर भी अपने माता पिता का ऋण नहीं चुका सकते हैं।

Sunday, July 25, 2021

जब विपत्ति आपके दरवाजे पर दस्तक देती है

एक बार एक बेटी ने अपने पिता से शिकायत की कि उसका जीवन दयनीय है और उसे नहीं पता कि वह इसे कैसे बनाने जा रही है। वह हर समय लड़ते-लड़ते थक चुकी थी। ऐसा लग रहा था जैसे एक समस्या हल हो गई, दूसरी जल्द ही आ गई।
उसका पिता, एक पेशेवर रसोइया, उसे रसोई घर में ले आया। उसने तीन घड़ों को पानी से भर दिया और प्रत्येक को तेज आग पर रख दिया। एक बार जब तीन बर्तन उबलने लगे, तो उसने एक बर्तन में आलू, दूसरे बर्तन में अंडे और तीसरे बर्तन में कॉफी बीन्स को पीस लिया।
फिर उसने अपनी बेटी से एक शब्द कहे बिना, उन्हें बैठने और उबालने दिया। बेटी, कराह रही थी और बेसब्री से इंतजार कर रही थी, सोच रही थी कि वह क्या कर रहा है।
बीस मिनट के बाद उसने बर्नर बंद कर दिए। उसने आलू को बर्तन से निकाल कर एक प्याले में रख दिया। उन्होंने उबले हुए अंडों को बाहर निकाला और एक कटोरे में रख दिया।
फिर उसने कॉफी को बाहर निकाला और एक कप में रख दिया। उसकी ओर मुड़कर उसने पूछा। 'बेटी, तुम क्या देखती हो?'
'आलू, अंडे और कॉफी,' उसने झट से जवाब दिया।

उसने कहा, 'करीब देखो,' उसने कहा, 'और आलू को छुओ।' उसने किया और देखा कि वे नरम थे। फिर उसने उसे एक अंडा लेने और उसे तोड़ने के लिए कहा। खोल को हटाने के बाद, उसने कठोर उबले अंडे को देखा। अंत में, उसने उसे कॉफी पीने के लिए कहा। इसकी समृद्ध सुगंध ने उसके चेहरे पर मुस्कान ला दी।
'पिताजी, इसका क्या मतलब है?' उसने पूछा।
फिर उन्होंने समझाया कि आलू, अंडे और कॉफी बीन्स प्रत्येक को एक ही प्रतिकूलता का सामना करना पड़ा - उबलते पानी।
हालांकि, सभी ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी।
आलू मजबूत, कठोर और अथक रूप से चला गया, लेकिन उबलते पानी में, यह नरम और कमजोर हो गया।
अंडा नाजुक था, पतला बाहरी आवरण इसके तरल आंतरिक भाग की रक्षा करता था जब तक कि इसे उबलते पानी में नहीं डाला जाता। फिर अंडे के अंदर का भाग सख्त हो गया।
हालांकि, ग्राउंड कॉफी बीन्स अद्वितीय थे। उबलते पानी के संपर्क में आने के बाद, उन्होंने पानी बदल दिया और कुछ नया बनाया।
'तुम कौन हो,' उसने अपनी बेटी से पूछा। 'जब विपत्ति आपके दरवाजे पर दस्तक देती है, तो आप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं? क्या आप आलू, अंडा या कॉफी बीन हैं?

Saturday, July 24, 2021

प्रेमी आंसु

 एक बार एक अंधी औरत थी जो खुद से पूरी तरह नफरत करती थी क्योंकि वह देख नहीं सकती थी। वह एकमात्र व्यक्ति जिसे वह प्यार करती थी वह उसका प्रेमी था, क्योंकि वह हमेशा उसके लिए था। उसने कहा कि अगर वह केवल दुनिया देख सकती है, तो वह उससे शादी करेगी।

एक दिन, किसी ने उसे एक जोड़ी आंखें दान कर दीं - अब वह अपने प्रेमी सहित सब कुछ देख सकती थी। उसके प्रेमी प्रेमी ने उससे पूछा, 'अब जब कि तुम दुनिया देख सकती हो, तो क्या तुम मुझसे शादी करोगी?'
जब महिला ने देखा कि उसका प्रेमी भी अंधा है तो महिला चौंक गई और उसने उससे शादी करने से इनकार कर दिया। उसका प्रेमी आंसुओं के साथ चला गया, और उसे यह कहते हुए एक छोटा नोट लिखा: 'बस मेरी आँखों का ख्याल रखना, प्रिय

Friday, July 23, 2021

आप खास हैं

एक लोकप्रिय वक्ता ने $20 का बिल लेकर एक सेमिनार की शुरुआत की। उनकी बात सुनने के लिए 200 की भीड़ जमा हो गई थी। उन्होंने पूछा, 'इस $20 बिल को कौन पसंद करेगा?'

200 हाथ ऊपर गए।

उन्होंने कहा, 'मैं आप में से एक को यह 20 डॉलर देने जा रहा हूं, लेकिन पहले, मुझे यह करने दो।' उसने बिल को तोड़ दिया।

फिर उन्होंने पूछा, 'कौन अब भी इसे चाहता है?'

सभी 200 हाथ अभी भी उठे हुए थे।

'ठीक है,' उसने जवाब दिया, 'अगर मैं ऐसा करूँ तो क्या होगा?' फिर उसने बिल को जमीन पर गिरा दिया और अपने जूतों से उस पर पटक दिया।

उसने उसे उठाया और भीड़ को दिखाया। बिल सब उखड़ गया और गंदा था।

'अब कौन इसे चाहता है?'

सब हाथ फिर भी उठ गए।

'मेरे दोस्तों, मैंने अभी आपको एक बहुत ही महत्वपूर्ण सबक दिखाया है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैंने पैसे के लिए क्या किया, आप अभी भी इसे चाहते थे क्योंकि यह मूल्य में कमी नहीं करता था। यह अभी भी $ 20 के लायक था। हमारे जीवन में कई बार, जीवन हमें कुचल देता है और हमें गंदगी में पीस देता है। हम गलत निर्णय लेते हैं या खराब परिस्थितियों से निपटते हैं। हम बेकार महसूस करते हैं। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता कि क्या हुआ है या क्या होगा, आप अपना मूल्य कभी नहीं खोएंगे। आप खास हैं - इसे कभी न भूलें!'

Wednesday, July 21, 2021

रेगिस्तान

एक पेड़ के नीचे एक माँ और एक ऊंट का बच्चा पड़ा हुआ था।
फिर ऊंट के बच्चे ने पूछा, 'ऊंटों के कूबड़ क्यों होते हैं?'
ऊंट माँ ने इस पर विचार किया और कहा, 'हम रेगिस्तानी जानवर हैं इसलिए हमारे पास पानी जमा करने के लिए कूबड़ हैं ताकि हम बहुत कम पानी से जीवित रह सकें।'
ऊंट के बच्चे ने एक पल के लिए सोचा, फिर कहा, 'ठीक है... हमारे पैर लंबे और पैर गोल क्यों हैं?'
मामा ने उत्तर दिया, 'वे रेगिस्तान में चलने के लिए हैं।'
बच्चा रुक गया। एक धड़कन के बाद ऊंट ने पूछा, 'हमारी पलकें लंबी क्यों हैं? कभी-कभी वे मेरे रास्ते में आ जाते हैं।'
मामा ने जवाब दिया, 'वे लंबी मोटी पलकें हवा में चलने पर रेगिस्तान की रेत से आपकी आंखों की रक्षा करती हैं।'
बच्चे ने सोचा और सोचा। फिर उन्होंने कहा, 'मैं देखता हूं। तो कूबड़ पानी जमा करने के लिए है जब हम रेगिस्तान में होते हैं, पैर रेगिस्तान से चलने के लिए होते हैं और ये आँख की पलकें रेगिस्तान से मेरी आँखों की रक्षा करती हैं तो चिड़ियाघर में क्यों

Tuesday, July 20, 2021

पत्थर पर उकेरना

दो दोस्त रेगिस्तान से गुजर रहे थे। यात्रा के दौरान एक समय उनके बीच बहस हो गई और एक दोस्त ने दूसरे को थप्पड़ मार दिया।
जिसे थप्पड़ लगा, वह आहत हुआ, लेकिन बिना कुछ कहे उसने रेत में लिखा, 'आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मार दिया।'
वे तब तक चलते रहे जब तक उन्हें एक नखलिस्तान नहीं मिला, जहाँ उन्होंने नहाने का फैसला किया। जिसे थप्पड़ मारा गया था, वह कीचड़ में फंस गया और डूबने लगा, लेकिन उसके दोस्त ने उसे बचा लिया। अपने सदमे से उबरने के बाद उन्होंने एक पत्थर पर लिखा, 'आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान बचाई।'
अपने सबसे अच्छे दोस्त को थप्पड़ मारने और बचाने वाले दोस्त ने उससे पूछा, 'मैंने तुम्हें चोट पहुँचाने के बाद, तुमने रेत में लिखा और अब तुम पत्थर में लिखो, क्यों?'
दूसरे मित्र ने उत्तर दिया, 'जब कोई हमें चोट पहुँचाता है तो हमें उसे रेत में लिख देना चाहिए जहाँ क्षमा की हवाएँ उसे मिटा सकें। लेकिन, जब कोई हमारे लिए कुछ अच्छा करता है, तो हमें उसे पत्थर पर उकेरना 

Friday, July 16, 2021

कभी हार न मानें

एक बार, एक बूढ़ा आदमी था, जो टूट गया था, एक छोटे से घर में रहता था और उसके पास बीट अप कार थी। वह $ 99 सामाजिक सुरक्षा चेक से दूर रह रहा था। 65 साल की उम्र में उन्होंने तय किया कि चीजों को बदलना होगा। इसलिए उसने सोचा कि उसे क्या देना है। उनके दोस्तों ने उनकी चिकन रेसिपी के बारे में बताया। उन्होंने फैसला किया कि बदलाव करने के लिए यह उनका सबसे अच्छा शॉट था।
उन्होंने केंटकी छोड़ दिया और अपने नुस्खा को बेचने की कोशिश करने के लिए विभिन्न राज्यों की यात्रा की। उसने रेस्तरां मालिकों को बताया कि उसके पास मुंह में पानी लाने वाली चिकन रेसिपी है। उसने उन्हें मुफ्त में नुस्खा की पेशकश की, बस बेची गई वस्तुओं पर एक छोटा प्रतिशत मांगा। एक अच्छा सौदा की तरह लगता है, है ना?
दुर्भाग्य से, अधिकांश रेस्तरां में नहीं। उसने 1000 से अधिक बार NO सुना। इतना सब ठुकराने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। उनका मानना था कि उनकी चिकन रेसिपी कुछ खास है। अपनी पहली हां सुनने से पहले उन्हें 1009 बार रिजेक्ट किया गया।
उस एक सफलता के साथ कर्नल हार्टलैंड सैंडर्स ने अमेरिकियों के चिकन खाने के तरीके को बदल दिया। केएफसी के नाम से मशहूर केंटकी फ्राइड चिकन का जन्म हुआ।
याद रखें, कभी हार न मानें और अस्वीकृति के बावजूद हमेशा खुद पर विश्वास रखें

Wednesday, July 14, 2021

हमारी स्थिति

 एक बार एक बहुत धनी और जिज्ञासु राजा था। इस राजा के पास एक सड़क के बीच में एक बहुत बड़ा शिलाखंड था। फिर वह यह देखने के लिए पास में छिप गया कि क्या कोई सड़क से विशाल चट्टान को हटाने की कोशिश करेगा।

सबसे पहले लोग राजा के सबसे धनी व्यापारियों और दरबारियों में से कुछ थे। वे इसे हिलाने के बजाय बस इसके चारों ओर चले गए। कुछ लोगों ने राजा पर सड़कों का रखरखाव न करने के लिए जोर-जोर से आरोप लगाया। उनमें से किसी ने भी शिलाखंड को हिलाने की कोशिश नहीं की।
अंत में, एक किसान साथ आया। उसके हाथ सब्जियों से भरे हुए थे। जब वह शिलाखंड के पास पहुंचा, तो दूसरे लोगों की तरह उसके चारों ओर घूमने के बजाय, किसान ने अपना भार नीचे रखा और पत्थर को सड़क के किनारे ले जाने की कोशिश की। इसमें काफी मेहनत लगी लेकिन आखिरकार वह सफल हो गया।
किसान ने अपना भार इकट्ठा किया और अपने रास्ते पर जाने के लिए तैयार था जब उसने कहा कि सड़क पर एक पर्स पड़ा है जहाँ बोल्डर था। किसान ने पर्स खोला। पर्स में सोने के सिक्के और राजा का एक नोट भरा हुआ था। राजा के नोट में कहा गया था कि पर्स का सोना सड़क से पत्थर को हटाने के लिए एक इनाम था।

राजा ने किसान को वह दिखाया जो हम में से कई लोग कभी नहीं समझते हैं: हर बाधा हमारी स्थिति को सुधारने का अवसर प्रस्तुत करती है

Monday, July 12, 2021

 जब मेंढकों का एक समूह जंगल से यात्रा कर रहा था, उनमें से दो एक गहरे गड्ढे में गिर गए। जब अन्य मेंढकों ने गड्ढे के चारों ओर भीड़ लगाई और देखा कि यह कितना गहरा है, तो उन्होंने दो मेंढकों से कहा कि उनके लिए कोई उम्मीद नहीं बची है।

हालाँकि, दो मेंढकों ने दूसरों की बातों को नज़रअंदाज़ करने का फैसला किया और वे गड्ढे से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे।
उनके प्रयासों के बावजूद, गड्ढे के शीर्ष पर मेंढकों का समूह अभी भी कह रहा था कि उन्हें छोड़ देना चाहिए। कि वे इसे कभी बाहर नहीं करेंगे।
आखिरकार, मेंढकों में से एक ने दूसरों की बातों पर ध्यान दिया और उसने हार मान ली, जिससे वह गिर पड़ा। दूसरा मेंढक उतनी ही जोर से कूदता रहा जितना वह कर सकता था। फिर से, मेंढकों की भीड़ ने उस पर चिल्लाया कि दर्द को रोको और बस मर जाओ।
वह और ज़ोर से कूदा और आखिकार कर दिखाया। जब वह बाहर निकला, तो अन्य मेंढकों ने कहा, "क्या तुमने हमें नहीं सुना?"
कहानी का निष्कर्ष
मेंढक ने उन्हें समझाया कि वह बहरा है। वह सोचता है कि वे उसे पूरे समय तक प्रोत्साहित कर रहे थे।
लोगों की बातों का दूसरे के जीवन पर बड़ा असर हो सकता है। अपने मुंह से निकलने से पहले आप जो कहते हैं, उसके बारे में सोचें। जीवन और मृत्यु के बीच बस यही अंतर हो सकता है।

Friday, July 9, 2021

हमारी प्राथमिकता

कल्पना कीजिए कि आपके पास एक बैंक खाता था जो प्रत्येक सुबह $86,400 जमा करता था। खाते में दिन-प्रतिदिन कोई शेष राशि नहीं होती है, आपको कोई नकद शेष राशि नहीं रखने की अनुमति मिलती है, और हर शाम उस राशि के किसी भी हिस्से को रद्द कर देता है जिसे आप दिन के दौरान उपयोग करने में विफल रहे थे। आप क्या करेंगे? हर दिन हर डॉलर निकालें!

हम सभी के पास ऐसा बैंक है। इसका नाम समय है। हर सुबह, यह आपको 86,400 सेकंड का श्रेय देता है। हर रात यह लिखता है, खोया हुआ, जो भी समय आप बुद्धिमानी से उपयोग करने में विफल रहे हैं। यह दिन-प्रतिदिन कोई संतुलन नहीं रखता है। यह ओवरड्राफ्ट की अनुमति नहीं देता है इसलिए आप अपने खिलाफ उधार नहीं ले सकते हैं या आपके पास से अधिक समय का उपयोग नहीं कर सकते हैं। हर दिन, खाता नए सिरे से शुरू होता है। हर रात, यह एक अप्रयुक्त समय को नष्ट कर देता है। यदि आप दिन की जमा राशि का उपयोग करने में विफल रहते हैं, तो यह आपका नुकसान है और आप इसे वापस पाने के लिए अपील नहीं कर सकते।

उधार लेने का समय कभी नहीं होता है। आप अपने समय पर या किसी और के खिलाफ ऋण नहीं ले सकते। आपके पास जो समय है वही आपके पास है और वह है। समय प्रबंधन आपको यह तय करना है कि आप समय कैसे व्यतीत करते हैं, जैसे पैसे के साथ आप तय करते हैं कि आप पैसे कैसे खर्च करते हैं। यह कभी नहीं होता है कि हमारे पास चीजों को करने के लिए पर्याप्त समय नहीं है, लेकिन यह मामला है कि हम उन्हें करना चाहते हैं या नहीं और वे हमारी प्राथमिकताओं में कहां आते हैं।

Thursday, July 8, 2021

सड़क के पत्थर

प्राचीन काल में, एक राजा ने अपने आदमियों को एक सड़क पर एक शिलाखंड रखा था। फिर वह झाड़ियों में छिप गया, और देखता रहा कि क्या कोई पत्थर को रास्ते से हटा देगा। राजा के कुछ सबसे धनी व्यापारी और दरबारी वहाँ से गुजरे और बस उसके चारों ओर चले गए।

कई लोगों ने राजा पर सड़कें साफ न रखने का आरोप लगाया, लेकिन उनमें से किसी ने भी पत्थर को हटाने के लिए कुछ नहीं किया।

एक दिन एक किसान सब्जी लेकर आया। शिलाखंड के पास पहुंचने पर किसान ने अपना बोझ डाला और पत्थर को रास्ते से हटाने की कोशिश की। काफी मशक्कत और मशक्कत के बाद आखिरकार वह कामयाब हो गया।

जब किसान अपनी सब्जियां लेने वापस गया, तो उसने देखा कि सड़क पर एक पर्स पड़ा है, जहां पत्थर पड़ा था। पर्स में कई सोने के सिक्के थे और राजा के नोट से पता चलता है कि सोना उस व्यक्ति के लिए था जिसने पत्थर को सड़क से हटा दिया था।

Monday, July 5, 2021

गुस्से पर नियंत्रण

 एक बार एक छोटा लड़का था जिसका मिजाज बहुत खराब था। उसके पिता ने उसे कीलों का एक थैला सौंपने का फैसला किया और कहा कि हर बार लड़के ने अपना आपा खो दिया, उसे बाड़ में एक कील ठोकनी पड़ी।

पहले दिन लड़के ने उस बाड़ में 37 कील ठोंक दीं।
अगले कुछ हफ्तों में लड़के ने धीरे-धीरे अपने गुस्से को नियंत्रित करना शुरू कर दिया, और बाड़ में ठोके गए कीलों की संख्या धीरे-धीरे कम हो गई।
उन्होंने पाया कि उन कीलों को बाड़ में ठोकने की तुलना में अपने गुस्से को नियंत्रित करना आसान था।
आखिरकार वो दिन आ ही गया जब लड़के ने अपना आपा बिल्कुल भी नहीं खोया। उसने अपने पिता को खबर सुनाई और पिता ने सुझाव दिया कि लड़के को अब हर दिन एक कील निकालनी चाहिए, वह अपना गुस्सा नियंत्रण में रखता है।
दिन बीतते गए और लड़का आखिरकार अपने पिता को बता पाया कि सभी नाखून चले गए हैं। पिता ने अपने पुत्र का हाथ पकड़ कर बाड़े में ले गया।
तुमने अच्छा किया है, मेरे बेटे, लेकिन बाड़ में छेदों को देखो। बाड़ कभी भी एक जैसी नहीं होगी। जब आप गुस्से में कुछ कहते हैं, तो वे इस तरह एक निशान छोड़ जाते हैं। आप एक आदमी में चाकू डाल सकते हैं और उसे बाहर निकाल सकते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितनी बार कहते हैं कि मुझे खेद है, घाव अभी भी है। ”
कहानी का निष्कर्ष
अपने गुस्से पर नियंत्रण रखें, और इस समय लोगों से ऐसी बातें न कहें, जिससे आपको बाद में पछताना पड़े। जीवन में कुछ चीजें, आप वापस नहीं ले सकते।

Saturday, July 3, 2021

जब हमारी परिस्थितियाँ बदलती

एक अंधी लड़की थी जो खुद से पूरी तरह से इस बात से नफरत करती थी कि वह अंधी थी। एकमात्र व्यक्ति जिससे वह नफरत नहीं करती थी, वह उसका प्यार करने वाला प्रेमी था, क्योंकि वह हमेशा उसके लिए था। उसने कहा कि अगर वह केवल दुनिया देख सकती है, तो वह उससे शादी करेगी।

एक दिन, किसी ने उसे एक जोड़ी आंखें दान कर दीं - अब वह अपने प्रेमी सहित सब कुछ देख सकती थी। उसके प्रेमी ने उससे पूछा, "अब जब तुम दुनिया देख सकती हो, तो क्या तुम मुझसे शादी करोगी?"

जब उसने देखा कि उसका प्रेमी भी अंधा है, तो लड़की चौंक गई और उसने उससे शादी करने से इनकार कर दिया। उसका प्रेमी आंसुओं में चला गया, और बाद में उसे यह कहते हुए एक पत्र लिखा:
"बस मेरी आँखों का ख्याल रखना प्रिय।"
कहानी का निष्कर्ष
जब हमारी परिस्थितियाँ बदलती हैं, तो हमारा मन भी बदलता है। हो सकता है कि कुछ लोग पहले जैसी चीज़ों को देखने में सक्षम न हों, और शायद उनकी सराहना न कर सकें। इस कहानी से एक ही नहीं, बहुत सी बातें दूर करने हैं।



Monday, June 28, 2021

कठिन परिस्थिति

एक छोटे से इतालवी शहर में, सैकड़ों साल पहले, एक छोटे व्यवसाय के मालिक पर एक ऋण-शार्क के लिए एक बड़ी राशि बकाया थी। लोन-शार्क एक बहुत बूढ़ा, अनाकर्षक दिखने वाला लड़का था जो व्यवसाय के मालिक की बेटी को पसंद आया।

उसने व्यवसायी को एक ऐसा सौदा करने की पेशकश करने का फैसला किया जो उस पर बकाया कर्ज को पूरी तरह से मिटा देगा। हालाँकि, पकड़ यह थी कि हम कर्ज तभी मिटाएंगे जब वह व्यवसायी की बेटी से शादी कर सकता है।
कहने की जरूरत नहीं है कि इस प्रस्ताव को घृणा की दृष्टि से देखा गया था।
लोन-शार्क ने कहा कि वह एक बैग में दो कंकड़ डालेगा, एक सफेद और एक काला।
बेटी को तब बैग में पहुंचना होगा और एक कंकड़ निकालना होगा। काला होता तो कर्ज मिट जाता, लेकिन कर्जदार उससे शादी कर लेता। सफेद होता तो कर्ज भी मिट जाता, लेकिन बेटी को कर्जदार से शादी नहीं करनी पड़ती।
व्यापारी के बगीचे में कंकड़-बिखरे रास्ते पर खड़े होकर, ऋण-शार्क झुक गया और दो कंकड़ उठा लिए।
जब वह उन्हें उठा रहा था, बेटी ने देखा कि उसने दो काले कंकड़ उठाए हैं और उन दोनों को बैग में रख दिया है।
फिर उन्होंने बेटी को बैग में पहुंचने और एक लेने के लिए कहा।
बेटी के पास स्वाभाविक रूप से तीन विकल्प थे कि वह क्या कर सकती थी:
बैग से एक कंकड़ लेने से मना करें।
दोनों कंकड़ को बैग से बाहर निकालें और ऋण-शार्क को धोखा देने के लिए बेनकाब करें।
बैग से एक कंकड़ उठाओ, यह अच्छी तरह से जानते हुए कि वह काला था और अपने पिता की स्वतंत्रता के लिए खुद को बलिदान कर दिया।
उसने बैग से एक कंकड़ निकाला, और उसे देखने से पहले 'गलती से' उसे अन्य कंकड़ के बीच में गिरा दिया। उसने ऋण-शार्क से कहा;
ओह, मैं कितना अनाड़ी हूं। कोई बात नहीं, यदि आप बैग में जो बचा है, उसे देखें, तो आप बता पाएंगे कि मैंने कौन सा कंकड़ उठाया है।
कहानी का निष्कर्ष
बैग में छोड़ा गया कंकड़ स्पष्ट रूप से काला है, और यह देखते हुए कि ऋण-शार्क उजागर नहीं होना चाहता था, उसे साथ खेलना पड़ा जैसे कि बेटी ने जो कंकड़ गिराया वह सफेद था, और अपने पिता के कर्ज को साफ कर दिया।
पूरी तरह से सोचने के दौरान एक कठिन परिस्थिति को दूर करना हमेशा संभव होता है, और केवल उन विकल्पों में न दें जो आपको लगता है कि आपको चुनना है

Saturday, June 26, 2021

अनमोल तोहफा

कुछ समय पहले एक शख्स ने अपनी 3 साल की बेटी को सोने के रैपिंग पेपर का रोल बर्बाद करने की सजा दी थी। पैसे की तंगी थी और वह क्रोधित हो गया जब बच्चे ने क्रिसमस ट्री के नीचे रखने के लिए एक बॉक्स को सजाने की कोशिश की।   फिर भी, अगली सुबह छोटी लड़की अपने पिता के लिए उपहार लाई और कहा, "यह तुम्हारे लिए है, पिताजी।"वह आदमी पहले अपनी अति प्रतिक्रिया से शर्मिंदा हो गया, लेकिन उसका क्रोध तब जारी रहा जब उसने देखा कि डिब्बा खाली था। वह उस पर चिल्लाया; "क्या आप नहीं जानते, जब आप किसी को उपहार देते हैं, तो माना जाता है कि अंदर कुछ है?" छोटी लड़की ने आंखों में आंसू लिए उसकी ओर देखा और रो पड़ी; वह पिता कुचल गया था। उसने अपनी छोटी लड़की के चारों ओर अपनी बाहें डाल दीं और उसने उससे क्षमा की भीख माँगी। कुछ ही देर बाद एक हादसे ने बच्चे की जान ले ली। उसके पिता ने कई वर्षों के लिए अपने बिस्तर से सोने बॉक्स रखा और, जब भी वह हतोत्साहित किया गया है, वह एक काल्पनिक चुंबन बाहर ले जाना और बच्चा जो यह वहाँ रखा था के प्यार याद होगा।

 कहानी का निष्कर्ष
प्यार दुनिया का सबसे अनमोल तोहफा है।

Monday, June 21, 2021

जो हासिल करना चाहते हैं वह संभव है

 एक सज्जन हाथी के शिविर से गुजर रहे थे, और उन्होंने देखा कि हाथियों को पिंजरों में नहीं रखा जा रहा था या जंजीरों के उपयोग से नहीं रखा जा रहा था।

वह सब जो उन्हें शिविर से भागने से रोक रहा था, वह था रस्सी का एक छोटा सा टुकड़ा जो उनके एक पैर से बंधा हुआ था।

जब वह आदमी हाथियों को देखता था, 

तो वह पूरी तरह से भ्रमित हो जाता था कि हाथियों ने अपनी ताकत का इस्तेमाल सिर्फ रस्सी को तोड़ने और शिविर से बचने के लिए क्यों नहीं किया।

वे आसानी से ऐसा कर सकते थे, लेकिन इसके बजाय, उन्होंने ऐसा करने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की।

जिज्ञासु और उत्तर जानना चाहते हुए, उसने पास के एक प्रशिक्षक से पूछा कि 

हाथी बस वहाँ क्यों खड़े थे और उन्होंने कभी भागने की कोशिश नहीं की।

जब वे बहुत छोटे होते हैं और बहुत छोटे होते हैं तो हम उन्हें बांधने के लिए एक ही आकार की रस्सी का उपयोग करते हैं और उस उम्र में, उन्हें पकड़ने के लिए पर्याप्त है। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, उन्हें विश्वास होता है कि वे अलग नहीं हो सकते। उनका मानना ​​​​है कि रस्सी अभी भी उन्हें पकड़ सकती है, इसलिए वे कभी भी मुक्त होने की कोशिश नहीं करते हैं।"

हाथियों के मुक्त नहीं होने और शिविर से भागने का एकमात्र कारण यह था कि समय के साथ उन्होंने इस विश्वास को अपनाया कि यह संभव नहीं था

कहानी का निष्कर्ष

दुनिया आपको कितना भी पीछे करने की कोशिश करे, हमेशा इस विश्वास के साथ बने रहें कि आप जो हासिल करना चाहते हैं वह संभव है। यह विश्वास करना कि आप सफल हो सकते हैं, वास्तव में इसे प्राप्त करने का सबसे महत्वपूर्ण कदम है

Saturday, May 8, 2021

बदले की भावना

एक बार की बात है, एक गांव में एक पंडित रहता था, वो बहुत
ही विद्वान था, दूर दूर से लोग उसके पास अपनी समस्या लेकर आते
और वो सबका उचित समाधान कर देता था लोग उससे बहुत सम्मान
दिया करते थे .
मगर उसकी खुद की स्थिति बहुत ही खराब थी उसकी पत्नी बहुत
ही कर्कशा थी नित्य उसकी जान से रासे किया करती थी हर समय
झगडा करती मगर पंडितजी हँस कर सब सह लेते थे .
एक बार एक दूसरे गाँव का आदमी उन की प्रशंसा सुनकर उनके पास
अपनी समस्या लेकर आया, तब उसने
देखा कि पंडितजी की तो बड़ी ही फजीहत हो रही है उन्ही के
पत्नी उन्हें बुरा भला कह रही है तो वो वापस जाने
लगा कि जो अपना भाग्य नहीं सवार सका वो मेरी क्या मदद
करेगा मगर जो उसको वह लेकर आया था वो बोला जब हम इतनी दूर
आये हैं तो क्यो न आजमा कर देखे कि लोग इनकी इतनी तारीफ़
क्यों करते हैं और वो अंदर चले गये पंडितजी अपने शांत भाव से
ही बैठे थे .
उन्होंने पंडितजी को अभिवादन किया और पास में ही बैठ गये अब
जो अपनी संशय लेकर आया था उसने कहा पंडितजी मैं आपसे मदद
लेने आया था पर मेरे मन में एक संशय है यदि आप मेरे उस संशय
को दूर करें तो मैं अपनी समस्या आप से कहूँ .
पंडितजी ने कहा आप बिना हिचक मुझ से जो चाहे पूछो, मैं
आपकी हर बात का समाधान करने की पूरी कोशिश करूँगा .
तब वह व्यक्ति कहने लगा पंडितजी जब हम यहाँ आये
तो जो देखा उससे लगता है जब आप अपनी समस्या का समाधान
नहीं कर सकते तो हमारी कैसे करेंगे . तब पंडितजी मुस्कुराते हुए
कहने लगे, यदि ये इस जन्म में मुझे नहीं पकडती तो हो सकता है ये
मुझे किसी और जन्म में पकडती .
तब वो कहने लगा ऐसा क्यों पंडितजी आप हमें खुल कर बताये . तब
पंडितजी कहने लगे ये पहले जन्म में एक ऊँटनी थी और अपने दल के
साथ जा रही थी तब इसका पाँव दलदल में चला गया अब ये
जितना कोशिश करती उतना ही अंदर चली जाती .
धीरे-धीरे रात घिरने लगी और इसके साथी भी हर प्रयास में असफल
रहे तब वो इसे छोड़ कर चले गये. ये वहाँ असहाय होकर छटपटाने
लगी उस जन्म में मै एक गिद्ध था और गिद्ध का ये सवभाव
जगजाहिर है कि ये एकमात्र ही ऐसा जीव है
जो जिन्दा आदमी का माँस खाता है .
तब मैं इसका माँस नोंच-२ कर खाने लगा और ये असहाय अवस्था में
मुझे हटा न सकी और मुझसे बदला लेने की भावना मन में लिये लिये
ही इसने प्राण त्याग दिए
उस जन्म में मैंने जैसे इसे नोंच-नोंच कर खाया ये इस जन्म में मुझे
इसी तरह कचोटती है यदि मैं अपना भाग्य संवारने के चक्कर में
इससे विवाह न करता तो ये मुझे किसी और जन्म में पकडती, इसलिए
मैं इसकी इन बातों का बुरा नहीं मानता हूँ.
.....इसलिए हमें इस जन्म में ऐसे कर्म नहीं करने चाहिये कि कोई
हमसे बदले की भावना लिये संसार से जाये और हमें किसी न
किसी जन्म में पकड़े ।

Tuesday, April 27, 2021

सकारात्मक दृष्टीकोण

 एक 6 वर्षका लडका अपनी 4 वर्ष की छोटी बहन के साथ बाजार से जा रहा था।

अचानक से उसे लगा की,उसकी बहन पीछे रह गयी है।
वह रुका, पिछे मुडकर देखा तो जाना कि, उसकी बहन एक खिलौने के दुकान के सामने खडी कोई चीज निहार रही है।
लडका पीछे आता है और बहन से पूछता है, "कुछ चाहिये तुम्हे ?" लडकी एक गुडिया की तरफ उंगली उठाकर दिखाती है।
बच्चा उसका हाथ पकडता है, एक जिम्मेदार बडे भाई की तरह अपनी बहन को वह गुडिया देता है। बहन बहुत खुश हो गयी है।
दुकानदार यह सब देख रहा था, बच्चे का व्यवहार देखकर आश्चर्यचकित भी हुआ ....
अब वह बच्चा बहन के साथ काउंटर पर आया और दुकानदार से पूछा, "सर, कितनी कीमत है इस गुडिया की ?"
दुकानदार एक शांत व्यक्ति था, उसने जीवन के कई उतार देखे होते थें। उन्होने बडे प्यार और अपनत्व से बच्चे पूछा, "बताओ बेटे, आप क्या दे सकते हो?"
बच्चा अपनी जेब से वो सारी सीपें बाहर निकालकर दुकानदार को देता है जो उसने थोडी देर पहले बहन के साथ समुंदर किनारे से चुन चुन कर लायी थी।
दुकानदार वो सब लेकर यू गिनता है जैसे पैसे गिन रहा हो।
सीपें ( शिंपले ) गिनकर वो बच्चे की तरफ देखने लगा तो बच्चा बोला,"सर कुछ कम है क्या?"
दुकानदार :-" नही नही, ये तो इस गुडिया की कीमत से ज्यादा है, ज्यादा मै वापस देता हूं" यह कहकर उसने 4 सीपें रख ली और बाकी की बच्चे को वापिस दे दी।
बच्चा बडी खुशी से वो सीपें जेब मे रखकर बहन को साथ लेकर चला गया।
यह सब उस दुकान का कामगार देख रहा था, उसने आश्चर्य से मालिक से पूछा, " मालिक ! इतनी महंगी गुडिया आपने केवल 4 सीपों के बदले मे दे दी ?"
दुकानदार मुस्कुराते हुये बोला,
"हमारे लिये ये केवल सीप है पर उस 6 साल के बच्चे के लिये अतिशय मूल्यवान है। और अब इस उम्र मे वो नही जानता की पैसे क्या होते है ?
पर जब वह बडा होगा ना...
और जब उसे याद आयेगा कि उसने सीपों के बदले बहन को गुडिया खरीदकर दी थी, तब उसे मेरी याद जरुर आयेगी, वह सोचेगा कि,,,,,,
"यह विश्व अच्छे मनुष्यों से भरा हुआ है।"
यही बात उसके अंदर सकारात्मक दृष्टीकोण बढाने मे मदद करेगी और वो भी अच्छा इंन्सान बनने के लिये प्रेरित होगा।

Sunday, April 25, 2021

धैर्य बनाये

जब महाराज दशरथ ने रामजी के राज्याभिषेक की घोषणा की थी तब वो बिलकुल स्थिर-चित्त थे, कोई अतिरिक्त उल्लास या हर्ष नहीं फिर जब वनवास की आज्ञा हुई तो भी मन में कोई क्लेश या वेदना नहीं हुई और उसी भाव से उस आज्ञा को भी शिरोधार्य कर लिया।
मुझे या आपको जब घर, परिवार और माँ-बाप से दूर महज चंद दिनों के लिए कहीं जाना होता है तो मन बार-बार यही करता है कि जाने से पहले घर वालों के साथ अधिक से अधिक समय गुजार लें, फिर जब तक ट्रेन खुल न जाए तब तक स्टेशन पर ही परिजनों के साथ खड़े रहें, पर राम जी हमारे आपके जैसे नहीं थे। 
वनवास की आज्ञा हुई तो राम जी एक-एक कर सबसे मिले फिर जितनी धन-संपत्ति और वस्त्राभूषण उनके पास थे सब दान करने के लिए महल से बाहर निकल आये। दान करते समय एक अस्सी वर्षीय बूढ़ा लाठी टेकता हुआ उनके पास याचक रूप में आया। 
राम ने पूछा :- क्या चाहिए ? उस वृद्ध ने गौ की मांग की। राम ने सामने मैदान की तरह अंगुली करते हुए उस वृद्ध से कहा:- बाबा आपके हाथ में जो लाठी है, उसे जितनी जोर से फेंक सकते हो फेंको। जहाँ जाकर लाठी गिरेगी, उससे इधर की सारी गौएँ आपकी। उस बूढ़े को समझ नहीं आया कि ये क्या कह रहे हैं राम। वो नकारात्मकता में सर हिलाते हुए कहने लगा :- राम ! मेरी उम्र इतनी नहीं है कि मुझसे ये लाठी फेंकी जायेगी। 
राम ने उसे उत्साहित करते हुए कहा :- देखो बाबा! लाठी जितनी दूर फेंकोगे उतनी गौएँ आपकी। 
उत्साह में भरे बूढ़े ने पूरे ताकत से लाठी घुमाकर फेंकी और वहां से काफी दूर जा गिरी। राम ने लाठी की सीमा के भीतर की सारी गायें उसे देकर ससम्मान विदा कर दिया। 
ये सारी घटना लक्ष्मण भी देख रहे थे। उन्हें कुछ समझ नही आया तो उन्होंने राम से पूछा :- भैया! आप उसे यूं भी तो गौएँ दे सकते थे तो उससे ये श्रम क्यों करवाया?  
तब राम जी ने लक्ष्मण को समझाते हुए कहा कि अगर उस बूढ़े बाबा को दान में गौएँ मिलती तो वो उसे मुफ्त का माल समझकर अकर्मण्य हो जाते पर चूँकि अब उन्होंने इसे अपने श्रम से पाया है तो वो इसका सम्मान करेंगे और कीमत समझेंगे।
अभी कुछ समय पहले जिसका राज्याभिषेक होते-होते रह गया हो। चौदह साल का कठोर वनवास मिला हो, बाप विरह के दुःख में मरणासन्न हो, माँ पछाड़ें खा रही हो, कभी कालीन के नीचे पैर न रखने वाली धर्मपत्नी वल्कल वस्त्र धारण किये नंगे पैर साथ में खड़ी हो; उस इंसान की मनःस्थिति की कल्पना कीजिये पर राम इस अवस्था में भी न सिर्फ बिलकुल स्थिर, सहज और सामान्य थे बल्कि उनकी दृष्टि तब भी इतनी व्यापक थी कि वो इस अवस्था और स्थिति में भी श्रम का महत्व समझा रहे थे। राम की इसी अवस्था को योगेश्वर कृष्ण ने गीता में इस तरह से कहा है :-
  दुःखेष्वनुद्विग्मनाः सुखेषु विगतस्पृहः।
  वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ।।  2/56 (गीता)
राम ऐसे अकेले नहीं थी। ऐसी ही साधना वाले राणा प्रताप भी थे जो जंगल में अपनी बच्ची और पत्नी को भूख-प्यास से तड़पता देखकर भी अकबर के सामने झुके नहीं. ऐसे ही शिवाजी भी थे जो शत्रु के घर में कैद होने के बाबजूद निराश और हतोत्साहित हुए बिना बाहर निकलने की योजनायें बना रहे थे। ऐसे ही अनेकों दास्तान हैं हमारे इतिहास में जो हर अपकर्ष काल में अविचलित रहते हुए कर्त्तव्य-निष्ठ रहें।
राम, शिवाजी, सावरकर, तिलक की ऐसी कौन सी साधना थी, ऐसी क्या शिक्षा उन्होंने पाई थी कि सम-विषम किसी भी स्थिति का उनके ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता था? स्थिरप्रज्ञ होने की ये कला उन्हें किस यूनिवर्सिटी या कॉलेज में मिली थी? किस शिक्षा ने उन्हें ऐसा बना दिया था कि दूर तक दिख रहे निराशवाद के पार भी उनके लिए आशा और विश्वास की किरणें आलोकित रहती थी जो उन्हें उन विषम, प्रतिकूल और तोड़ देने वाली परिस्थितियों में आत्मबल से लबरेज़ रखती थी ?  
इसके विपरीत हममें ऐसी कौन सी कमियां हैं जो थोड़ी सी प्रतिकूलता में भी विचलित हो जाती है, जो कल या परसों निश्चित ही समाप्त हो जानी वाली आपदा और कष्ट में घबरा जाती है, हतोत्साहित हो जाती है ? 
ये कोरोना काल भी ऐसा ही है जिसमें ये सारी कमियाँ हम सबमें दृष्टिगोचर हो रही हैं। 
संबल, रेगुलर रूटीन और धैर्य बनाये रखिये। याद रखिये स्वयं को दैनंदिन गतिविधियों में जितना संलग्न रखेंगे कोरोना का डर, तनाव उतना ही कम होगा और आपको तनाव रहित देखकर आपके परिवार वालों की हिम्मत भी बढ़ेगी।
हमारे सारे महान पूर्वज इन्हीं आदर्शों को लेकर जीने वाले थे, हमें भी उन्हीं का अनुगमन करना है।

Wednesday, February 17, 2021

खौफनाक दृश्य

एक आदमी घर लौट रहा था.. रास्ते में गाड़ी खराब हो गयी...  रात काफी थी.. एकदम घना अंधेरा था... मोबाईल का नेटवर्क भी नहीं था.... उसकी हवा खराब... ना कोई आगे ना दुर दुर तक कोई पिछे ...अब उसने गाड़ी साइड में लगा दी और लिफ्ट के लिये किसी गाड़ी का इंतेजार करने लगे... काफी देर बाद एक गाड़ी बहुत धीमे धीमे उनकी ओर बढ रही थी...उसकी जान में जान आयी ...उसने गाड़ी रोकने के लिये हाथ दिया ...गाड़ी धीरे धीरे रूक रूक कर उसके पास आयी...उसने गेट खोला और झट से उसमें बैठ गया।लेकिन अंदर बैठकर उसके होश उड़ गये...गला सुखने लगा... आँखे खुली रह गयी ... छाती धड़कने लगी... उसने देखा कि ड्राइविंग सीट पर कोई नहीं है...गाड़ी अपने आप चल रही थी ... 
एक तो रात का अंधेरा ...ऊपर से यह खौफनाक दृश्य ...
उसको समझ नहीं आ रहा था अब क्या करूँ .. बाहर जाऊँ की अंदर रहूँ ... वो कोई फैसला करता की सामने रास्ते पर एक मोड़ आ गया ... तभी दो हाथ साइड से आये और स्टेयरिंग घुमा दिया और गाड़ी मुड़ गयी ...
और फिर हाथ गायब ..अब तो उसकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी...हनुमान चालीसा शुरू कर दी...अंदर रहने में ही भलाई समझी ...गाड़ी धीरे धीरे ..रूक रूक कर आगे बढती रही ... तभी सामने पेट्रोल पंप नजर आया ...गाड़ी वहाँ जाकर रूक गयी  उसने राहत की साँस ली और तुरंत गाड़ी से उतर गया  पानी पिया  इतने में उसने देखा एक आदमी गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठने के लिये जा रहा है वह दौड़ते हुये उसके पास पहूंचा और उससे कहा "इस गाड़ी में मत बैठो ...मैं इसी में बैठकर आया हूँ ... इसमें भूत है"उस आदमी ने उसके गाल पर झन्नाटेदार थप्पड़ मारा और कहा... अबे साले... तु बैठा कब रे इसमें? ...तभी मैं सोचूँ गाड़ी एकदम से भारी कैसी हो गयी ...यह मेरी ही गाड़ी है...पेट्रोल खतम था तो पाँच किलोमीटर से धक्का मारते हुये ला रहा हूँ .

Tuesday, February 9, 2021

हमारे शब्द भी हमारे कर्म

18 दिन के युद्ध ने द्रोपदी की उम्र को 80 वर्ष जैसा कर दिया था शारीरिक रूप से भी और मानसिक रूप से भी। उसकी आंखे मानो किसी खड्डे में धंस गई थी, उनके नीचे के काले घेरों ने उसके रक्ताभ कपोलों को भी अपनी सीमा में ले लिया था। श्याम वर्ण और अधिक काला हो गया था । 

युद्ध से पूर्व प्रतिशोध की ज्वाला ने जलाया था और युद्ध के उपरांत पश्चाताप की आग तपा रही थी । ना कुछ समझने की क्षमता बची थी ना सोचने की । कुरूक्षेत्र मेें चारों तरफ लाशों के ढेर थे । जिनके दाह संस्कार के लिए न लोग उपलब्ध थे न साधन । 

शहर में चारों तरफ विधवाओं का बाहुल्य था पुरुष इक्का-दुक्का ही दिखाई पड़ता था अनाथ बच्चे घूमते दिखाई पड़ते थे और उन सबकी वह महारानी द्रौपदी हस्तिनापुर केे महल मेंं निश्चेष्ट बैठी हुई शूूूून्य को ताक रही थी । तभी कृष्ण कक्ष में प्रवेश करते हैं ! 
महारानी द्रौपदी की जय हो । 

द्रौपदी कृष्ण को देखते ही दौड़कर उनसे लिपट जाती है कृष्ण उसके सर को सहलातेे रहते हैं और रोने देते हैं थोड़ी देर में उसे खुद से अलग करके समीप के पलंग पर बिठा देते हैं । 

*द्रोपती* :- यह क्या हो गया सखा ऐसा तो मैंने नहीं सोचा था ।

कृष्ण नियति बहुत क्रूर होती है पांचाली वह हमारे सोचने के अनुरूप नहीं चलती हमारे कर्मों को परिणामों में बदल देती है तुम प्रतिशोध लेना चाहती थी और तुम सफल हुई द्रौपदी ! तुम्हारा प्रतिशोध पूरा हुआ । सिर्फ दुर्योधन और दुशासन ही नहीं सारे कौरव समाप्त हो गए तुम्हें तो प्रसन्न होना चाहिए ! 
द्रोपती सखा तुम मेरे घावों को सहलाने आए हो या उन पर नमक छिड़कने के लिए ! 
कृष्ण नहीं द्रौपदी मैं तो तुम्हें वास्तविकता से अवगत कराने के लिए आया हूं । हमारे कर्मों के परिणाम को हम दूर तक नहीं देख पाते हैं और जब वे समक्ष होते हैं तो हमारे हाथ मेें कुछ नहीं रहता ।
द्रोपती तो क्या इस युद्ध के लिए पूर्ण रूप से मैं ही उत्तरदाई हूं कृष्ण ? 
कृष्ण नहीं द्रौपदी तुम स्वयं को इतना महत्वपूर्ण मत समझो ।
लेकिन तुम अपने कर्मों में थोड़ी सी भी दूरदर्शिता रखती तो स्वयं इतना कष्ट कभी नहीं पाती।

द्रोपती मैं क्या कर सकती थी कृष्ण ?

कृष्ण  जब तुम्हारा स्वयंबर हुआ तब तुम कर्ण को अपमानित नहीं करती और उसे प्रतियोगिता में भाग लेने का एक अवसर देती तो शायद परिणाम कुछ और होते ! 
इसके बाद जब कुंती ने तुम्हें पांच पतियों की पत्नी बनने का आदेश दिया तब तुम उसे स्वीकार नहीं करती तो भी परिणाम कुछ और होते । 
और 
उसके बाद तुमने अपने महल में दुर्योधन को अपमानित किया वह नहीं करती तो तुम्हारा चीर हरण नहीं होता तब भी शायद परिस्थितियां कुछ और होती ।
हमारे शब्द भी हमारे कर्म होते हैं द्रोपदी और हमें अपने हर शब्द को बोलने से पहले तोलना बहुत जरूरी होता है अन्यथा उसके दुष्परिणाम सिर्फ स्वयं को ही नहीं अपने पूरे परिवेश को दुखी करते रहते हैं 

Saturday, February 6, 2021

परिवार का रक्षण

एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा,
पिताजी ! आप यह *चिता भस्म लगाकर, मुण्डमाला धारणकर अच्छे नहीं लगते, मेरी माता गौरी अपूर्व सुंदरी और आप उनके साथ इस भयंकर रूप में ! 

पिताजी ! आप एक बार कृपा करके अपने सुंदर रूप में माता के सम्मुख आएं, जिससे हम *आपका असली स्वरूप देख सकें ! 

भगवान शिवजी मुस्कुराये और गणेशजी की बात मान ली !

कुछ समय बाद जब शिवजी स्नान करके लौटे तो उनके शरीर पर भस्म नहीं थी , बिखरी जटाएं सँवरी हुई, *मुण्ड माला उतरी हुई थी !

सभी देवता, यक्ष, गंधर्व, शिवगण उन्हें अपलक देखते रह गये, 
वो  ऐसा रूप था कि मोहिनी अवतार रूप भी फीका पड़ जाये ! 
भगवान शिव ने अपना यह रूप कभी प्रकट नहीं किया था !
 शिवजी का ऐसा अतुलनीय रूप कि करोड़ों कामदेव को भी मलिन कर रहा था ! 

गणेशजी अपने पिता की इस *मनमोहक छवि को देखकर स्तब्ध रह गए और 
मस्तक झुकाकर बोले -
मुझे क्षमा करें पिताजी !
परन्तु अब आप अपने पूर्व स्वरूप को धारण कर लीजिए ! 

भगवान शिव मुस्कुराये और  पूछा - क्यों पुत्र अभी तो तुमने ही मुझे इस रूप में देखने की इच्छा प्रकट की थी,
 अब पुनः पूर्व स्वरूप में आने की बात क्यों ? 
गणेशजी ने मस्तक झुकाये हुए ही कहा - 
क्षमा करें पिताश्री !
मेरी माता से सुंदर कोई और दिखे मैं ऐसा कदापि नहीं चाहता !
और शिवजी हँसे और अपने पुराने स्वरूप में लौट आये !
पौराणिक ऋषि इस प्रसंग का सार स्पष्ट करते हुए कहते हैं.....
आज भी ऐसा ही होता है पिता रुद्र रूप में रहता है क्योंकि उसके ऊपर परिवार की  जिम्मेदारियों अपने परिवार का रक्षण ,उनके मान सम्मान का ख्याल रखना होता है तो थोड़ा कठोर रहता है... 

और माँ सौम्य,प्यार लाड़,स्नेह उनसे बातचीत करके प्यार देकर उस कठोरता का बैलेंस बनाती है ।। इसलिए सुंदर होता है माँ का स्वरूप ।। 

पिता के ऊपर से भी जिम्मेदारियों का बोझ हट जाए तो वो भी बहुत सुंदर दिखता है

Wednesday, January 27, 2021

अद्भुत रिश्तों

एक भंवरे की मित्रता एक गोबरी (गोबर में रहने वाले) कीड़े से थी ! एक दिन कीड़े ने भंवरे से कहा- भाई तुम मेरे सबसे अच्छे मित्र हो, इसलिये मेरे यहाँ भोजन पर आओ!
भंवरा भोजन खाने पहुँचा! बाद में भंवरा सोच में पड़ गया- कि मैंने बुरे का संग किया इसलिये मुझे गोबर खाना पड़ा! अब भंवरे ने कीड़े को अपने यहां आने का निमंत्रन दिया कि तुम कल मेरे यहाँ आओ!*
अगले दिन कीड़ा भंवरे के यहाँ पहुँचा! भंवरे ने कीड़े को उठा कर गुलाब के फूल में बिठा दिया! कीड़े ने परागरस पिया! मित्र का धन्यवाद कर ही रहा था कि पास के मंदिर का पुजारी आया और फूल तोड़ कर ले गया और बिहारी जी के चरणों में चढा दिया! कीड़े को ठाकुर जी के दर्शन हुये! चरणों में बैठने का सौभाग्य भी मिला! संध्या में पुजारी ने सारे फूल इक्कठा किये और गंगा जी में छोड़ दिए! कीड़ा अपने भाग्य पर हैरान था! इतने में भंवरा उड़ता हुआ कीड़े के पास आया, पूछा-मित्र! क्या हाल है? कीड़े ने कहा-भाई! जन्म-जन्म के पापों से मुक्ति हो गयी! ये सब अच्छी संगत का फल है!
कोई भी नही जानता कि हम इस जीवन के सफ़र में एक दूसरे से क्यों मिलते है,
सब के साथ रक्त संबंध नहीं हो सकते परन्तु ईश्वर हमें कुछ लोगों के साथ मिलाकर अद्भुत रिश्तों में बांध देता हैं,हमें उन रिश्तों को हमेशा संजोकर रखना चाहिए।

Wednesday, January 20, 2021

मेरी मा

एक बार अकबर बीरबल हमेशा की तरह टहलने जा रहे थे!
रास्ते में एक तुलसी का पौधा दिखा .. मंत्री बीरबल ने झुक कर प्रणाम किया !
अकबर ने पूछा कौन हे ये ?
बीरबल -- मेरी माता हे !
अकबर ने तुलसी के झाड़ को उखाड़ कर फेक दिया और बोला .. कितनी माता हैं तुम हिन्दू लोगो की ...!
बीरबल ने उसका जबाब देने की एक तरकीब सूझी! .. आगे एक बिच्छुपत्ती (खुजली वाला ) झाड़ मिला .. बीरबल उसे दंडवत प्रणाम कर कहा: जय हो बाप मेरे ! !
अकबरको गुस्सा आया .. दोनों हाथो से झाड़ को उखाड़ने लगा .. इतने में अकबर को भयंकर खुजली होने लगी तो बोला: .. बीरबल ये क्या हो गया !
बीरबल ने कहा आप ने मेरी माँ को मारा इस लिए ये गुस्सा हो गए!
अकबर जहाँ भी हाथ लगता खुजली होने लगती .. बोला: बीरबल जल्दी कोई उपाय बतायो!
बीरबल बोला: उपाय तो है लेकिन वो भी हमारी माँ है .. उससे विनती करी पड़ेगी !
अकबर बोला: जल्दी करो !
आगे गाय खड़ी थी बीरबल ने कहा गाय से विनती करो कि ... हे माता दवाई दो..
गाय ने गोबर कर दिया .. अकबर के शरीर पर उसका लेप करने से फौरन खुजली से राहत मिल गई!
अकबर बोला .. बीरबल अब क्या राजमहल में ऐसे ही जायेंगे?
बीरबलने कहा: .. नहीं बादशाह हमारी एक और माँ है! सामने गंगा बह रही थी .. आप बोलिए हर -हर गंगे .. जय गंगा मईया की .. और कूद जाइए !
नहा कर अपनेआप को तरोताजा महसूस करते हुए अकबर ने बीरबल से कहा: .. कि ये तुलसी माता, गौ माता, गंगा माता तो जगत माता हैं! इनको मानने वालों को ही हिन्दू कहते हैं ..!

Friday, January 15, 2021

खुशहाली


एक किसान था, उसके पास 500 बीघा जमीन थी, घर में किसी प्रकार की कमी नही थी। खुशहाली का माहौल था ।किसान के चार पुत्र थे,सभी सामिल में रहते थे।चारों पुत्रों की शादियां हो चुकी थी व सबके बच्चे भी थे ।भरा पूरा संयुक्त  परिवार था। घर का हिसाब व आर्थिक व्यवस्था का संचालन उसका बङा पुत्र करता था । बङे पुत्र के परिवार संचालन से सब खुश थे, क्योकिं किसी को भी काम नही करना पङता था, सब सदस्यों को हाथखर्च हेतू खूब रूपये मिल जाते थे। बङा पुत्र भी ऐशोआराम की जिंदगी जी रहा था, कभी विदेश घूमने जाता तो कभी होटलों में अय्यासी व मौजमस्ती करता, घर का कोई सदस्य उसका विरोध भी नही करता क्योकिं सबको बिना काम किए ही रुपये पैसे मिल जाते और सब मौज मस्ती करते। रोज घर में मिठाइयां बनती, सबकी पसंद के कपङे,गहने आदि मिल जाते। एक बार  बङे पुत्र को किसी काम से एक दो साल के लिए घर से बाहर जाना पङा एवं घर संचालन की जिम्मेदारी दूसरे नम्बर के पुत्र को दी गयी। दूसरे नम्बर के पुत्र ने परिवार की बागडौर संभाली तो उसके होश उङ गये, क्योकिं लगभग आधी जमीन एक साहूकार के गिरवी  रखी पङी थी, उसने परिवार के किसी सदस्य को कुछ नहीं बताया और अपने काम में लग गया। परिवार के प्रत्येक सदस्य को काम बता दिया गया  स्वयं भी दिनरात मेहनत करता व परिवार के सभी सदस्यों को भी प्रेरित करता। किसी को फ़ालतू रुपये पैसे नही मिलते एवं सबको काम करना पङता था। उसने धीरे धीरे साहूकार का सारा ऋण चुकता कर दिया एवं अपनी सारी जमीन वापस छुङवा ली। अब परिवार के सब सदस्य उससे नाखुश रहने लगे क्योंकि अब सबको मेहनत करनी पङ रही थी एवं फ़ालतू के शौक फैशन हेतु रुपये पैसे नही मिल रहे थे। सबने माँग करना शुरू कर दिया कि वापस परिवार की बागडौर बङे पुत्र को ही दी जाए।