Saturday, July 29, 2023

वहाँ अक्सर तूफान भी हार जाते हैं, जहाँ कश्तियाँ जिद्द पर टिकी होती हैं

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गांव में एक युवक नामकरण के समय राजू के नाम से जन्मा था। राजू गांव के पास एक सुंदर झील के किनारे रहता था। यह झील बहुत सुंदर थी, लेकिन उसमें अक्सर तूफान आते थे और कश्तियों को उधर-उधर ले जाते थे। लोग इस झील से नफरत करने लगे थे, क्योंकि उन्हें लगा कि इस झील के किनारे रहना खतरनाक हो गया है। लेकिन राजू ने इस झील को एक अद्वितीय संकल्प बनाया और उसके जिद्दी दिल ने उसे इस कठिनाई से लड़ने का संकल्प लिया।

राजू ने अपनी कश्ती बनाने का निर्णय लिया। लोग उसे हंसते और उसकी मजाक उड़ाते थे, लेकिन राजू अपनी कश्ती को बनाने के लिए अटल रहा। वह खुद के विश्वास को नष्ट नहीं किया और तूफानों के बीच भी जिद्दी हो गया। राजू ने कुछ खास उपायों का इस्तेमाल करके अपनी कश्ती को तैयार किया। वह अपनी कठिनाइयों का सामना करते रहा, संघर्ष को धैर्य से झेलता रहा।

जैसे-जैसे राजू अपनी कश्ती को जल में चलाना सीख रहा था, उसकी प्रतिभा और सामर्थ्य में भी सुधार हो रहा था। जब भी तूफान आता, राजू नई तकनीकों का इस्तेमाल करता था और कश्ती को स्थिर रखने की कोशिश करता था। देखते ही देखते, लोगों को यह हकीकत पता चली कि राजू की कश्ती तूफानों के सामने असाधारण रूप से स्थिर रहती है।

धीरे-धीरे, लोगों की नज़र में राजू की कश्ती में एक अद्वितीयता और बहादुरी दिखाई देने लगी। उन्होंने देखा कि राजू अक्सर तूफानों से लड़कर निकल जाता है और उसकी कश्ती उन्हें सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाती है। इससे उन्होंने एक महत्वपूर्ण सीख ली - वहां जहां तूफान भी हार जाते हैं, वहीं कश्तियाँ जिद्द पर टिकी होती हैं।

राजू की कश्ती और उसकी जिद्दी दिल ने उसे सम्पूर्णता तक ले जाया। उसकी जिद्दीता और असली मेहनत ने उसे सफलता के शिखर पर पहुंचाया। लोग उसे आदर देने लगगए और उसकी सफलता की कहानी सुनाने लगे। वे उसे उदाहरण मानने लगे और उसकी जिद्दी दिल की प्रशंसा करने लगे। राजू ने अपनी जिद्दीता से देश और विदेश में अच्छे-अच्छे पदों को प्राप्त किया और अपने विदेशी सपनों को साकार किया। उसने अपने जीवन में बहुत सारी बड़ी-बड़ी कश्तियों को जीता और खुद को साबित किया कि जहां तूफान भी हार जाते हैं, वहीं असली साहसी और जिद्दी हृदय पर टिकी होती हैं।

इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि जब हम जिद्दी होते हैं, तो हम अपने लक्ष्य के प्रति सचेत रहते हैं, अपनी कठिनाइयों का सामना करते हैं और अपनी कश्ती को तूफानों में भी स्थिर रखते हैं। हमेशा याद रखें कि विजय उन्हीं की होती है जो हारने का विचार नहीं करते, जो जिद्दी होते हैं और हर संघर्ष को पार करने के लिए तैयार रहते हैं। जहां तूफान भी हार जाते हैं, वहीं असली साहसी और जिद्दी हृदय पर टिकी होती हैं।

Thursday, July 27, 2023

चिंता छोड़े और अपने काम पर फोकस करें

यह कहानी है एक गांव में जहां  युवा लड़का राजीव रहता था। राजीव एक सरल और मेहनती लड़का था, लेकिन वह चिंता करने की आदत बहु थी। वह हमेशा भविष्य की चिंता करता और इसके कारण उसके विचार काम दोनों प्रभावित होते थे। उसके मन में हमेशा चिंताओं के बादल घिरे रहते थे और यह उसकी प्रगति कोरोकता था।

राजीव के पिता ने उसे कई बार समझाने की कोशिश की कि वह चिंता छोड़कर अपने काम पर फोकस करेलेकिन उसकी चिंताओं का प्रभाव राजीव के मन पर इतना गहरा हो गया था कि वह अपनी बात नहीं मानता थाउसे लगता था कि चिंता करना उसकी संवेदनशीलता का हिस्सा है और ससे उसकी सोच बदलेगी।

एक दिनराजीव को अपने गांव के ब्रह्मानंद महाराज का दर्शन करने का मौका मिला। वह बहुत खुश हुआ औरसोचा कि महाराज से चिंता के बारे में सलाह ले सकता है। उसने अपनी चिंताओं को लेकर महाराज के सामनेजाकर विचारों को बयां किया।

महाराज ने राजीव की बात सुनी और मुस्कराते हुए कहा, "बेटाचिंता करने से कोई फायदा नहीं होता। चिंतासिर्फ तुम्हारे मन को अशांत करती है और तुम्हें सकारात्मक सोचने की क्षमता से वंचित करती है। जब तुम चिंताकरते होतो तुम अपनी उपयोगी सो को नष्ट कर देते हो और अपनी क्षमताओं को नहीं समझ पाते।"

राजीव ने हौसला बढ़ाते हुए पूछा, "लेकिन महाराजमैं चिंता छोड़ना कैसे सीख सकता हूँ?"

महाराज ने उसे एक कठोर बटासे दिया और कहा, "बेटायह बटासा तुम्हारी चिंताएं हैं। अगर तुम इसे ध्यान सेपकड़ लोगेतो यह तुम्हारे मन को अशांत करेगा। लेकिन अगर तुम इसे उठा नहीं सकतेतो चिंताओं का भार भीतुम्हारे मन से हट जाएगा।"

राजीव ने बटासे को पकड़ने की कोशिश कीलेकिन उसे वह गिरा दिया और उसका चिंता में खो गया। महाराजने हँसते हुए कहा, "देखो बेटाचिंता से कुछ हासिल नहीं होता। तुम्हें चिंता करने के बजाय अपने कामों परफोकस करना चाहिए। चिंता तुम्हारी समस्याओं को हल नहीं करेगीलेकिन कार्यशीलता तुम्हें सफलतादिलाएगी।"

राजीव ने महाराज की बातों पर गहरा विचार किया और उसे समझा कि चिंता करने से वास्तविकता में कोईफायदा नहीं होता। उसने तय किया कि वह अपने चिंताओं को पीछे छोड़कर अपने कामों में पूरी तरह समर्पिहोगा।

राजीव ने अपनी सोच और काम के ढांचे को सुधारा और उसने अपने कार् में पूरी ईमानदारी से ध्यान दिया। वहअपनी चिंताओं को खुद से दू रखकर सचेत और निरंतर काम करने लगा। राजीव की मेहनत और निरंतरता केकारण उसकी सफलता की गहरी जड़ें जम गईं।

चिंता करने की आदत से मुक्त हुए राजीव ने अपनी नयी पहचान बनाई। वह अब एक सफल और खुशहालव्यक्ति बन गया था।

Monday, July 24, 2023

जो अपने कदमों की काबिलियत पर विश्वास रखते हैं अक्सर वहीं अपनी मंजिल तक पहुंचने में सफल होते हैं

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गांव में रहने वाला एक युवक नामकरण के समय राजू के नाम से जन्मा था। राजू एक सामान्य परिवार से था, लेकिन उसके अंदर एक छोटी सी चिंता रहती थी - उसे अपनी काबिलियत पर विश्वास नहीं था।

राजू के साथी लोग उसे निराशा देते रहते थे और उसे यह समझाते रहते थे कि वह कुछ नहीं कर सकता। लोगों की यह बातें उसके मन को काफी प्रभावित करती थीं और वह खुद को कामयाबी के लिए अकार्यकारी मानता था। राजू अपने दिल में एक सपना लेकर जीना चाहता था, लेकिन उसकी काबिलियत पर आत्मविश्वास कम था।

एक दिन, राजू के सामर्थ्य पर अस्थायी रूप से संदेह कसा गया। उसे लगा कि उसके कदम थम गए हैं और वह अपनी मंजिल तक कभी नहीं पहुंच पाएगा। इस निराशावादी वातावरण में, राजू अपनी कमजोरियों के बारे में सोचने लगा और अपने सपने को त्यागने का विचार करने लगा। लेकिन उसके दिल में एक आग जल रही थी, जो उसे अकारयकारी कर रही थी कि वह अपने कदमों की काबिलियत पर विश्वास रखते हैं। राजू की इस आग ने उसे जगाने लगी, और वह तय कर लिया कि वह अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए सच्ची मेहनत करेगा और अपने सपनों को पूरा करेगा।

राजू ने खुद को सामर्थ्य प्रदान करने का निर्णय लिया। उसने खुद को स्वीकार किया कि वह शायद आराम से सफल नहीं हो सकता, लेकिन उसकी मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास के बिना उसे सफलता की ओर पहुंचने का कोई मौका नहीं मिलेगा। राजू ने संघर्ष की तैयारी की और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए उच्चतम मानदंडों को निर्धारित किया।

राजू ने खुद को धैर्यपूर्वक और निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। वह अपनी कमजोरियों पर काबू पाने का प्रयास करता रहा और उन्हें अपनी ताकत में बदलने के लिए निरंतर संघर्ष करता रहा। वह नई कौशल और ज्ञान प्राप्त करने के लिए अपना समय और उद्यम निवेश करता रहा। राजू की जीवनशैली और कार्यशैली उसके आस-पास के लोगों को प्रभावित करने लगी। लोग उसकी मेहनत और समर्पण की प्रशंसा करने लगे और उसे एक प्रेरणादायक उदाहरण मानने लगे। राजू ने दिखाया कि जो अपने कदमों की काबिलियत पर विश्वास रखते हैं, वे अपनी मंजिल तक पहुंचने में सफल होते हैं।

राजू ने न केवल अपने सपनों को पूरा किया, बल्कि वह अपने सामर्थ्य को भी बढ़ाया। उसने नए उच्चतम साधनों का उपयोग किया, नई योजनाएं बनाई और नए क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई। राजू के साथी लोग उसे आदर और सम्मान से देखने लगे और उसे एक सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने का उदाहरण मानने लगे।

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें अपनी काबिलियत पर विश्वास रखना चाहिए। जब हम खुद को स्वीकार करते हैं और अपने सामर्थ्य पर विश्वास करते हैं, तो हम अपनी मंजिल की ओर अग्रसर होते हैं। हमेशा याद रखें कि हमारी मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास हमें सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचासकते हैं। अपनी कठिनाइयों से संघर्ष करने के बावजूद, हमेशा अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें और अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिनाइयों का सामना करें। राजू की इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि आपके कदमों की काबिलियत पर विश्वास रखें, अपने दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें और सभी परिस्थितियों में अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए सफलता के लिए काम करें।-- 

Sunday, July 23, 2023

जो अपनी ज़िंदगी मे कुछ पाना चाहते है वो समुंदर में भी पत्थरो के पुल बना लेते है

बहुत समय पहले की बात है, एक गांव में एक युवक रहता था। उसका नाम रवि था। रवि एक आम युवक था, लेकिन उसमें असामान्य संघर्ष और उच्चाकंक्षा की भावना थी। उसके दिल में जीने की ख्वाहिश थी, और वह अपनी ज़िंदगी में कुछ पाना चाहता था। लेकिन उसे मालूम था कि सफलता पाने के लिए कठिनाइयां और चुनौतियां आवश्यक होती हैं।

एक दिन, रवि ने समुद्र के किनारे घूमने का फैसला किया। जब वह समुद्र के किनारे पहुंचा, उसने देखा कि बाढ़ के कारण बहुत सारे पत्थर समुद्र में फँस गए थे। देखते ही देखते, एक विचार उसके मन में उठा - क्या यदि वह उन पत्थरों को मिलाकर उनसे पुल बना लेता।

रवि ने तत्परता से काम में लग गया। वह पत्थरों को एकत्र करने के लिए ज़ोरदार प्रयास करता रहा। शुरू में लोग उसकी मदद नहीं करने के लिए हँसते थे, उन्हें यह लगता था कि यह असंभव है। लेकिन रवि ने निरंतर मेहनत करते रहकर उन्हें साबित किया कियदि वह ठान ले, तो वह समुद्र में भी पत्थरों के पुल बना सकता है। रवि की लगातार मेहनत और समर्पण ने उसे नई ऊचाईयों तक पहुंचाया।

धीरे-धीरे, लोगों की नज़र में रवि का प्रयास अद्भुत और आश्चर्यजनक बताया गया। लोग उसे आदर देने लगे और उसकी प्रगति की प्रशंसा करने लगे। रवि ने पत्थरों को एकजुट करके समुद्र में एक बहुत बड़ा और सुरक्षित पुल बना दिया।

रवि ने दूसरों को यह सिखाया कि जीवन में कुछ पाने के लिए हमें संघर्ष करना चाहिए। हमें चुनौतियों का सामना करना चाहिए और अपनी मेहनत और जोश के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। जब हम खुद को आश्चर्यजनक संघर्षों के बीच ढकेलते हैं, तभी हम सफलता की ओर बढ़ते हैं।

रवि की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि जब हम अपनी आवश्यकताओं और अभिलाषाओं को पूरा करने के लिए आगे बढ़ते हैं, तो हमारे सामर्थ्य में नयी शक्ति और क्षमता जाग्रत होती है। हमेशा अपनी ज़िंदगी में विश्वास रखें और कठिनाइयों का सामना करने के लिए तैयार रहें। जैसे रवि ने समुद्र में भी पत्थरों के पुल बनाए, हमें भी विपरीत परिस्थितियों में अपनी ऊर्जा को उच्च स्तर पर उपयोग करना चाहिए। हमारे इरादे, संकल्प और सामर्थ्य हमें कठिनाइयों से जूझने में सफलता दिलाएंगे।

इस कहानी के माध्यम से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जब हम अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं, तो हम सभी परिस्थितियों को जीत सकते हैं। चाहे समुद्र में हों या जीवन की अन्य कठिनाइयों में, हमेशा यह ध्यान रखें कि हमारी संघर्ष क्षमता हमें सफलता की ओर आगे बढ़ा सकती है। जिस तरह समुद्र में भी पत्थरों के पुल बना सकते हैं, हमें भी नई ऊचाइयों तक पहुंचने के लिए अपनी आवाज बनानी चाहिए और समस्याओं को हराने के लिए नयी संभावनाओं की खोज करनी चाहिए।-- 

Wednesday, July 19, 2023

मेहनत इतनी करो कि रास्ते की सारी रुकावटें टूट कर बिखर जाए

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गांव में एक लड़का नामकरण के समय राहुल के नाम से जन्मा था। राहुल एक सामान्य परिवार से था, लेकिन उसके अंदर विशेषता और उच्चाकंक्षा की भावना थी। वह अपने जीवन में कुछ पाना चाहता था और इसके लिए वह तत्परता से मेहनत करने को तैयार था। राहुल के पास कई सपने थे, लेकिन उसके सामर्थ्य में कठिनाइयां थीं जो उसे रास्ते में रुकावटें बनाती थीं। लोगों की भावनाएं और उसके आस-पास के माहौल उसे निराश करने की कोशिश करते थे, लेकिन राहुल ने तय कर लिया कि उसे अपने सपनों को पूरा करने के लिए हर संघर्ष का सामना करना होगा। उसने ठान ली कि वह मेहनत इतनी करेगा कि रास्ते की सारी रुकावटें टूट कर बिखर जाएंगी। राहुल की ख्वाहिशों को देखते हुए उसके माता-पिता ने उसे समर्थन और प्रेरणा दी। वे उसे बताएं कि मेहनत और समर्पण के बिना कोई भी सपना पूरा नहीं हो सकता है। राहुल ने यह समझा कि उसे अपनी मेहनत कोनिरंतरता के साथ चलाना होगा और रास्ते की सारी रुकावटें उसकी मेहनत से ही टूटेंगी। राहुल ने संघर्ष और परिश्रम की दुनिया में पैर रखा। वह नई ऊचाइयों की ओर बढ़ने के लिए नई कौशल सीखने के लिए प्रयास करता रहा। उसकी रुचि के क्षेत्र में उसने अध्ययन किया और अपनी कौशल को मजबूत बनाने के लिए प्रयास किया। राहुल ने अपनी क्षमताओं को विकसित किया और नए और चुनौतीपूर्ण कार्यों में अपनी महानता प्रदर्शित की। समय बितते ही, राहुल की मेहनत और समर्पण ने उसे सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ाया। लोग उसके उदाहरण को प्रशंसा करने लगे और उसे प्रेरित करने लगे। राहुल की सच्ची मेहनत और विजय ने उसे साकारता का एहसास कराया कि जब हम अपनी मेहनत और समर्पण के साथ काम करते हैं, तो हमारी सफलता कोई भी रुकावट नहीं रोक सकती। राहुल ने अपनी सफलता के माध्यम से यह सिखाया कि जीवन में सच्ची मेहनत और समर्पण का महत्व अद्वितीय होता है। जब हम अपने बाधाओं का सामना करने की संकल्प लेते हैं और इसे मेहनतपूर्वक अपनाते हैं, तो हमें अपने लक्ष्य की प्राप्ति में कोई रुकावट नहीं आ सकती। राहुल की कहानी हमें यह सिखाती है कि अस्थायी रुकावटें और परिस्थितियाँ हमारे सामर्थ्य और संघर्ष की परीक्षा होती हैं, जो हमें अपने उद्देश्यों के प्रति और अपनी मेहनत में अधिक दृढ़ता और प्रगति के लिए प्रेरित करती हैं। इस कहानी के माध्यम से हमें यह स्पष्ट होता है कि मेहनत, समर्पण, और अवधारणा सफलता के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। राहुल ने अपनी मेहनत के द्वारा रास्ते की सारी रुकावटें टूटने का साबित किया और अपने सपनों को पूरा करने में सफल हुआ। इसलिए, हमेशा मेहनत करें, संघर्ष करें, और उच्चाकंक्षा रखें ताकि हम अपने सपनों को प्राप्त कर सकें और अपने जीवन में सच्ची सफलता को प्राप्त करें।

Saturday, July 15, 2023

तुम्हारी पिछली गलती ही तुम्हारी सबसे बड़ी सीख है

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गांव में एक लड़की नामकरण के समय प्रिया के नाम से जन्मी थी। प्रिया एक सामान्य परिवार से थी और उसे अपनी मेहनत के द्वारा अग्रसर होने की ख्वाहिश थी। वह उम्रदराज और अभियांत्रिकी में रुचि रखती थी, और उसका सपना था कि वह इंजीनियर बनकर अपने परिवार का सम्मान करेगी।

प्रिया की जीवन में गलतियाँ और चुनौतियाँ आईं और वह इन परिस्थितियों के सामने टिकने की कोशिश करती रही। लेकिन एक दिन, उसकी पिछली गलती ने उसे बहुत भारी चोट पहुंचाई। वह अपनी पढ़ाई के दौरान बहुत लापरवाही कर रही थी और उसने अपने परीक्षाओं में बहुत खराब प्रदर्शन किया। उसे बहुत खेद और निराशा हुई, और वह अपनी गलती के कारण आत्मविश्वास खो गई।

प्रिया ने एक वक्तव्य सुना जो उसके जीवन को पूरी तरह से बदल दिया। उसने सुना कि तुम्हारी पिछली गलती ही तुम्हारी सबसे बड़ी सीख है। यह वक्तव्य उसे स्फूर्ति दी कि वह अपने अपने त्रुटियों से सीख लेनी चाहिए और उन्हें अपने वर्तमान कार्य में सुधारने का मौका देना चाहिए। प्रिया ने इस वक्तव्य को अपने दिल में समाया और निराशा की जगह पर उम्मीद और संघर्ष की चिंता को लाया।

प्रिया ने अपने मार्गदर्शकों, अध्यापकों और अपने परिवार के समर्थन के साथ मेहनत करना शुरू किया। वह अपनी पढ़ाई में समर्पित हुई, अत्यधिक मेहनत की और अपनी गलतियों की यादें अपने काम में सुधारने के लिए उपयोग की।

समय बितते हुए, प्रिया की ग्रेड और प्रदर्शन में सुधार हुआ। वह अपनी परीक्षाओं में उच्च स्थान प्राप्त करने लगी और इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश प्राप्त करने का संघर्ष जारी रखी। प्रिया ने अपनी पिछली गलती से अच्छी तरह से सीख ली और उसने यह समझा कि हमेशा अपने अनुभवों से सीख लेना जीवन का महत्वपूर्ण अंश है।

प्रिया की कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें अपनी गलतियों को सीधे मुंह से स्वीकार करना चाहिए। हमें उनसे डरने की बजायें हमें उनसे सीखना चाहिए और उन्हें सुधार के लिए अवसर बनाना चाहिए। जीवन में गलतियाँ होना सामान्य है, लेकिन हमारी सबसे बड़ी सीख होती है जब हम उनसे सीधे मुकाबला करते हैं और उनसे सुधार करते हैं।

प्रिया के जीवन में यह संदेश साफ हुआ कि आपकी पिछली गलतियों और अनुभवों का उपयोग आपको मार्गदर्शन कर सकता है और आपको अपने लक्ष्य की ओर आगे ले जा सकता है। जितना महत्व आप अपनी गलतियों को देते हैं, उतना ही आपकी बढ़ती हुई बुद्धिमत्ता और अनुभव होती है। जीवन में चुनौतियों का सामना करने के बाद, हम अपनी गलतियों को पहचानते हैं, उनसे सीखते हैं और उन्हें सुधारते हैं, जो हमें आगे बढ़ने के लिए मजबूत बनाते हैं।

प्रिया की कहानी हमें यह याद दिलाती है कि हमें अपने व्यक्तिगत विकास के पथ पर अग्रसर रहना चाहिए, और हमेशा अपने अनुभवों को उचित तरीके से समझने और सीखने का प्रयास करना चाहिए। जब हम अपनी गलतियों से सीध लेते हैं और उन्हें अपने सहयोगी बनाते हैं, तो हम अपने अद्यतन और समृद्धि के मार्ग में प्रगति करते हैं। हमेशा याद रखें कि हमारी पिछली गलतियाँ हमें एक बेहतर और पक्षीय अनुभव का अवसर प्रदान करती हैं, जो हमारे विकास में महत्वपूर्ण होते हैं।

इस कहानी के माध्यम से हमें यह सिखाया जाता है कि हमें अपने अपनी गलतियों के महत्व को स्वीकारना चाहिए। हमें अपने पथ में आने वाली रुकावटों को अवगत करना चाहिए और उनसे सीखना चाहिए। जब हम अपनी गलतियों को स्वीकारते हैं, तो हम खुद को स्वतंत्र और विकसित बनाने का अवसर प्राप्त करते हैं। हमेशा अपनी पिछली गलतियों के साथ जागरूक रहें, और सदैव अगले कदम की ओर बढ़ें।

अपनी सच्चाई को किसी के सामने साबित करने की कोशिश ना करें

एक समय की बात हैएक गांव में एक गरीब परिवार रहता था। उनके पा बहुत कम संसाधन थेलेकिन वेखु मेहनत करके अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रयास करते थे इस परिवार में एक छोटा सा बेटा भीथाजिसका नाम रामु था। रामु अपने माता-पिता को हमेशा खुश देखना चाहता था और उनकी सभी चिंताओंको दूर करने के लिए अपने जीवन के प्रत्येक क्षण में मेहनत करता था।

एक दिनरामु को स्कूल जाने का मौका मिला। यह उसका पहला दिन था और उसे अपने आप को दूसरे बच्चोंके सामने साबित करने की चिंता थी वह गरीबी के कारण थोड़ा निचला-दिखला था और इसे लेकर उसके मनमें अनिश्चय था।

रामु को जब अपनी कक्षा में बैठा देखा गयातो उसे अपने साथीयों के मजाक उड़ाने का डर सताने लगा लेकिनउसका एक दोस्तमोहनने उसकी मदद की। मोहन ने कहा, "रामुतुम चिंता  करो। तुम्हारी अपनी सच्चाई कोवक्त खुद साबि करेगा।"

रामु ने मोहन की बात पर विश्वसम्मति दी और उसकी सहायता से पने अध्ययन में ध्यान देना शुरू किया। उसनेअपने माता-पिता के लि गर्व के साथ पढ़ाई की और मेहनत करने का वचन लिया।

वर्षों बादरामु की मेहनत और मर्पण ने उसे अच्छे अंक प्राप्त करने की स्थिति में ला दिया। सने अपनी कक्षामें प्रथम स्थान हासिल किया और अनेक पुरस्कार जीते। उसकी ये सफलता उसे अपने माता-पिता के सामर्थ्यऔर आपसी स्नेह का परिचय करवाई।

अपने सफलता की खुशी मेंरामु ने एक बड़ा सपना देखा - उसने अपने गांव के लिए एक निःशुल्क शिक्षा केंद्रस्थापित करने का निर्णय लिया। वह गांव में प्रदान की जाने वाली मानवाधिकारिक शिक्षा को सुनिश्चित करनाचाहता थाताकि गरीब बच्चों को उच्च शिक्षा का अवसर मिल सके।

रामु ने अपनी मेहनत और योगदान के बारे में अपने सपने का बयान करने के लिए अपने परिवार के सामर्थ्य कोसाबित करने का निर्णय लिया। वह नगर पंचायत के सामर्थ्य से संयुक्त रूप से काम करने की शुरुआत की औरगांव के बच्चों को शिक्षा का आदान-प्रदान करने के लिए एक स्कूल खोलने की कोशिश की

पहले दिनरामु का स्कूल बहुत  छात्रों से भरा हुआ था। लोगों ने उसके प्रयासों को हँसी और पहास केसाथ देखा। वे उसे सिर्फ एक गरीब लड़का समझ रहे थेजिसका कोई महत्व नहीं था। लेकिन रामु ने हार नहींमानी और अपनी मेहनत और आपातता से काम करना जारी रखा।

धीरे-धीरेरामु के स्कूल की सुविधाएँ और शिक्षा की गुणवत्ता ढ़ने लगी। लोगों ने उसकी समय-सम पर प्रगतिको देखा और वह भी उनके साथी बन गया। रामु की मेहनत और योगदान ने उसे गांव के बीच  प्रमुख व्यक्तिबना दियाजिसके अधीन अनेक स्थानीय प्रोजेक्ट्स आरम्भ हुए।

एक दिनएक नगर विकास अधिकारी रामु के स्कूल का दौरा करने आया। उसने उसकी सफलता को देखा औरउसकी प्रशंसा की। अधिकारी ने कहा, "रामुतुम्हारी संघर्ष की कहानी और तुम्हारे स्कूल के माध्यमिक परिवार केबच्चों के लिए उपयोगी होगा। मैं इसे आगे बढ़ाने के लिए तुम्हें आश्वस्त करता हूँ"

रामु ने आंखों में आंसू और खुशी के साथ कहा, "धन्यवाद सरमेरी मेहनत और योगदान इसे साबित कर दिए हैंकि सच्चा और समर्पण से हम अपने सपनों को प्राप्त कर सकते हैं।"

यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें किसी के सामने अपनी सच्चाई को साबित करने की कोशिश नहीं करनीचाहिए। जब हम अपने सपनों के लिए मेहनत और समर्पण लगाते हैंतो सम अपने आप हमारी सच्चाई कोप्रकट कर देता है। हमें सिर्फ अपने मार्ग पर चलना चाहिए और अपने सपनों के प्रति पूरी आस्था रखनी चाहिए।

इस कहानी से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमारी सफलता और साबित करने की क्षमता हमारे अंदर होती है कि हमारी बाहरी परिस्थितियों में। हमें खुद पर विश्वास रखना चाहिए और मेहनत के बादलों को छानने कीक्षमता विकसित करनी चाहिए।

इसलिएचिंता और डर के बजायहमें अपने सपनों के पीछे लगने चाहिएऔर अपने सच्चे आप को साबित करनेके लिए कड़ी मेहनत और समर्पण दिखाने की आवश्यकता होती है। आखिरकारसमय आपकी सच्चाई कोसाबित कर देगा और लोग आपकी मेहनत और प्रगति को देखकर आपको सम्मान देंगे

तो यह थी एक प्रेरणादायक कहानी जो हमें यह सिखाती है कि अपनी च्चाई को किसी के सामने साबित रनेकी चिंता  करेंबल्कि मेहनतसमर्पण और आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों की पुर्तता करें जब हम सहीमार्ग पर चलते हैं  परिश्रम करते हैंतो समय हमारे पक्ष में हो जाता है और हमारी सच्चाई को सबके सामनेप्रगट  देता है।

एक बीज की कहानी