एक छोटे से गाँव में दो दोस्त रहते थे—अमित और सूरज। दोनों बचपन से ही बहुत अच्छे दोस्त थे। वे साथ-साथ स्कूल जाते, साथ खेलते और हर खुशी-दुख में एक-दूसरे का साथ देते थे। गाँव के लोग भी उनकी दोस्ती की मिसाल देते थे।
अमित पढ़ाई में बहुत अच्छा था, जबकि सूरज खेल-कूद में बहुत तेज था। दोनों की रुचियाँ अलग थीं, लेकिन उनका दिल एक-दूसरे के लिए हमेशा सच्चा था। अगर अमित को पढ़ाई में कोई समस्या होती, तो सूरज उसे हिम्मत देता। और अगर सूरज किसी खेल में हार जाता, तो अमित उसे समझाता कि हार से घबराना नहीं चाहिए।
एक दिन स्कूल में वार्षिक परीक्षा होने वाली थी। अमित बहुत मेहनत कर रहा था। वह रोज़ घंटों पढ़ाई करता था क्योंकि वह अपनी कक्षा में पहला स्थान पाना चाहता था।
दूसरी तरफ सूरज पढ़ाई में थोड़ा कमजोर था। वह कोशिश तो करता था, लेकिन उसे कई विषय समझने में कठिनाई होती थी।
एक शाम सूरज उदास होकर अमित के पास आया और बोला,
“अमित, मुझे पढ़ाई बिल्कुल समझ नहीं आती। मुझे लगता है कि मैं इस परीक्षा में फेल हो जाऊँगा।”
अमित ने मुस्कुराते हुए कहा,
“दोस्त, घबराओ मत। मैं तुम्हारी मदद करूँगा। हम दोनों मिलकर पढ़ाई करेंगे।”
उस दिन से अमित रोज़ सूरज को पढ़ाने लगा। वह उसे कठिन विषयों को आसान तरीके से समझाता।
धीरे-धीरे सूरज को भी पढ़ाई समझ आने लगी। अब वह पहले से ज्यादा आत्मविश्वास महसूस करने लगा था।
परीक्षा का दिन आ गया। दोनों दोस्त परीक्षा देने स्कूल पहुँचे। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी।
कुछ दिनों बाद परीक्षा का परिणाम आया।
अमित कक्षा में पहले स्थान पर आया और सूरज भी अच्छे अंकों से पास हो गया।
सूरज की खुशी का ठिकाना नहीं था। उसने अमित को गले लगाकर कहा,
“अगर तुम मेरी मदद नहीं करते, तो मैं कभी पास नहीं हो पाता।”
अमित ने हँसते हुए कहा,
“दोस्त, सच्ची दोस्ती में धन्यवाद नहीं कहा जाता। हम एक-दूसरे की मदद करने के लिए ही तो दोस्त हैं।”
समय बीतता गया। दोनों की दोस्ती और भी गहरी होती गई।
एक दिन की बात है। सूरज खेतों के पास खेल रहा था। अचानक उसका पैर फिसल गया और वह एक गड्ढे में गिर गया। उसके पैर में चोट लग गई और वह चल नहीं पा रहा था।
सूरज जोर-जोर से मदद के लिए चिल्लाने लगा।
संयोग से उसी समय अमित वहाँ से गुजर रहा था। उसने सूरज की आवाज सुनी और तुरंत उसकी तरफ दौड़ा।
अमित ने देखा कि सूरज घायल है। उसने बिना देर किए गाँव के लोगों को बुलाया और सूरज को घर तक पहुँचाया।
अमित ने उसके माता-पिता को सारी बात बताई और डॉक्टर को भी बुला लिया।
डॉक्टर ने सूरज का इलाज किया और कहा कि कुछ दिनों तक उसे आराम करना होगा।
इन दिनों अमित रोज़ सूरज के घर जाता। वह उसके लिए स्कूल की पढ़ाई भी बताता और उसका मन भी बहलाता।
सूरज यह देखकर बहुत भावुक हो गया।
एक दिन उसने अमित से कहा,
“अमित, तुम सच में मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो। तुमने हमेशा मेरा साथ दिया है।”
अमित मुस्कुराकर बोला,
“दोस्त वही होता है जो मुश्किल समय में साथ खड़ा रहे।”
धीरे-धीरे सूरज ठीक हो गया और फिर से स्कूल जाने लगा।
अब दोनों की दोस्ती पूरे गाँव में मिसाल बन चुकी थी।
गाँव के बुज़ुर्ग अक्सर बच्चों से कहते,
“अगर दोस्ती करनी है, तो अमित और सूरज जैसी करो। सच्चा दोस्त वही होता है जो खुशी में ही नहीं, बल्कि दुख और मुश्किल समय में भी साथ देता है।”
अमित और सूरज ने भी हमेशा अपनी दोस्ती को सच्चाई और विश्वास के साथ निभाया।
वे जानते थे कि जीवन में पैसा, नाम और सफलता सब कुछ बाद में आता है, लेकिन सच्चा दोस्त मिलना बहुत बड़ी किस्मत की बात होती है।
और सच ही कहा गया है—
सच्चा दोस्त वही होता है जो हमारे बुरे समय में हमारा साथ न छोड़े और हमें हमेशा सही रास्ता दिखाए।
सीख:
सच्ची दोस्ती विश्वास, समझ और एक-दूसरे की मदद पर टिकती है। सच्चा दोस्त वही होता है जो हर परिस्थिति में हमारे साथ खड़ा रहता है।cw .16\