प्रकृति की गोद में बसा एक सुंदर सा गाँव था, जिसका नाम था हरितपुर। हरितपुर चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ था और यहाँ के लोग अपनी खेती-बाड़ी से खुशहाल जीवन व्यतीत करते थे। इस गाँव की विशेषता थी यहाँ का घना जंगल, जो विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों और वन्य जीवों का घर था। परंतु, समय के साथ-साथ इस जंगल में कई पेड़ काटे जाने लगे, और धीरे-धीरे वह घना जंगल उजाड़ होने लगा।गाँव के लोग इस स्थिति से बहुत दुखी थे। वे जानते थे कि अगर जंगल नहीं रहेगा, तो उनके गाँव का पर्यावरण भी बिगड़ जाएगा। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि इस समस्या का समाधान कैसे किया जाए। गाँव के बुजुर्गों ने कई बैठकें कीं, परंतु कोई ठोस उपाय नहीं निकल सका।इसी गाँव में एक युवा लड़का रहता था, जिसका नाम था अर्जुन। अर्जुन प्रकृति प्रेमी था और उसने बचपन से ही जंगल और पेड़ों के महत्व को समझा था। वह हमेशा सोचता रहता था कि कैसे वह अपने गाँव के जंगल को फिर से हरा-भरा बना सकता है। एक दिन, अर्जुन ने ठान लिया कि वह अपने गाँव के जंगल को पुनर्जीवित करेगा, चाहे इसके लिए उसे कितना भी संघर्ष क्यों न करना पड़े।अर्जुन ने अपनी योजना बनानी शुरू की। उसने वनस्पति विज्ञान की किताबें पढ़ीं और समझा कि एक बीज से भी एक बड़ा जंगल उगाया जा सकता है, यदि उसे सही तरीके से लगाया और उसकी देखभाल की जाए। उसने एक उपजाऊ बीज की तलाश शुरू की। अर्जुन ने कई दिनों तक गाँव के आस-पास के इलाकों में घूम-घूमकर विभिन्न प्रकार के बीज इकट्ठा किए। अंत में, उसे एक दुर्लभ वृक्ष का बीज मिला, जिसके बारे में कहा जाता था कि वह बहुत तेजी से फैलता है और अन्य पौधों के लिए भी पोषक तत्व प्रदान करता है।अर्जुन ने उस बीज को बड़ी सावधानी से अपने गाँव के जंगल के एक खाली हिस्से में लगाया। उसने उस बीज की पूरी देखभाल की, उसे समय-समय पर पानी दिया और उसकी सुरक्षा के लिए एक छोटी सी बाड़ भी बनाई। धीरे-धीरे वह बीज अंकुरित हुआ और एक छोटा पौधा बन गया। अर्जुन ने अपनी मेहनत जारी रखी और उस पौधे की नियमित रूप से देखभाल की।कुछ महीनों बाद, वह छोटा पौधा एक छोटा सा पेड़ बन गया। उसकी शाखाएं फैलने लगीं और उसके आसपास छोटे-छोटे पौधे भी उगने लगे। अर्जुन ने देखा कि उसके पेड़ के नीचे की जमीन में नमी बढ़ने लगी है और वहाँ घास भी उगने लगी है। अर्जुन का आत्मविश्वास बढ़ गया और उसने और भी बीजों को उस जंगल में लगाने का फैसला किया।अर्जुन ने गाँव के लोगों से भी अपील की कि वे भी इस अभियान में उसका साथ दें। शुरुआत में कुछ लोग हिचकिचाए, लेकिन जब उन्होंने अर्जुन के लगाए पेड़ को तेजी से बढ़ते हुए देखा, तो वे भी उसकी मदद करने के लिए आगे आए। धीरे-धीरे, पूरे गाँव ने मिलकर उस जंगल को फिर से हरा-भरा बनाने का बीड़ा उठाया।अर्जुन और गाँव के लोगों ने मिलकर कई प्रकार के पेड़-पौधे लगाए। उन्होंने जंगल की देखभाल के लिए एक समिति भी बनाई। गाँव के लोग नियमित रूप से उस जंगल की सफाई करते, पौधों को पानी देते और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखते। उनकी मेहनत रंग लाने लगी और कुछ ही वर्षों में वह उजाड़ जंगल फिर से घना और हरा-भरा हो गया।उस जंगल में फिर से वन्य जीवों की चहल-पहल शुरू हो गई। पक्षियों की चहचहाहट और जानवरों की आवाजें फिर से सुनाई देने लगीं। गाँव का पर्यावरण सुधर गया और लोगों का जीवन भी खुशहाल हो गया। हरितपुर फिर से अपनी पुरानी पहचान हासिल कर चुका था।अर्जुन की यह कहानी पूरे इलाके में मशहूर हो गई। लोग दूर-दूर से उसे और उसके गाँव को देखने आने लगे और उसकी मेहनत की तारीफ करने लगे। अर्जुन ने साबित कर दिया कि एक बीज भी पूरे जंगल को पुनर्जीवित कर सकता है, बस जरूरत है तो सही सोच, मेहनत और धैर्य की।अंतअर्जुन की कहानी हमें यह सिखाती है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। जिस प्रकार एक बीज पूरे जंगल को पुनर्जीवित करने के लिए पर्याप्त है, उसी प्रकार एक व्यक्ति का समर्पण और मेहनत भी समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकती है। हमें बस अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहना चाहिए और धैर्यपूर्वक प्रयास करते रहना चाहिए
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