एक छोटा सा गाँव था, जहाँ लोग साधारण और सुखी जीवन व्यतीत करते थे।यहाँ के लोग मेहनती और ईमानदार थे, लेकिन गाँव में एक कमी थी—विकास की। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, और बुनियादी सुविधाएँ लगभग न के बराबर थीं। गाँव के लोग गरीबी में जीवन बिता रहे थे, लेकिन फिर भीउनके दिलों में परस्पर प्रेम और सहयोग की भावना थी।गाँव में एक अमीर जमींदार, रघुवीर सिंह, रहते थे।रघुवीर सिंह ने अपनी संपत्ति को और बढ़ाने के लिए वर्षों तक कठोर मेहनत की थी। वे अब धनवान थे, लेकिनउनका धन केवल उनके पास ही सीमित था। उन्होंने कभी भी अपने धन का उपयोग गाँव के विकास के लिएनहीं किया। वे सोचते थे कि धन केवल उनकी सुरक्षा और आराम के लिए है।एक दिन, रघुवीर सिंह कीमुलाकात एक साधु से हुई जो गाँव में प्रवचन देने आए थे। साधु ने अपने प्रवचन में कहा, "अगर धन दूसरों कीभलाई करने में मदद करें, तो इसका कुछ मूल्य है। अन्यथा ये सिर्फ बुराई का ढेर है। इससे जितना जल्दीछुटकारा मिल जाए, उतना बेहतर है।" रघुवीर सिंह ने यह सुना और सोचा, "क्या सच में मेरा धन बुराई का ढेरहै?"रघुवीर सिंह उस साधु के पास गए और पूछा, "महात्मा जी, क्या आप सच में मानते हैं कि धन का कोईमूल्य नहीं है अगर उसे दूसरों की भलाई के लिए इस्तेमाल न किया जाए?" साधु ने मुस्कुराते हुए कहा, "धनस्वयं में बुरा नहीं है, लेकिन उसका उपयोग महत्वपूर्ण है। अगर धन से किसी की मदद की जाए, तो वह धनमूल्यवान हो जाता है। लेकिन अगर उसे केवल अपने सुख के लिए रखा जाए, तो वह बुराई का ढेर बन जाताहै।"रघुवीर सिंह ने साधु की बातों पर विचार किया और निर्णय लिया कि वे अपने धन का उपयोग गाँव केविकास के लिए करेंगे। उन्होंने गाँव के लिए एक योजना बनाई और अपने धन से एक स्कूल, एक अस्पतालऔर एक पानी की टंकी का निर्माण किया। उन्होंने गाँव के युवाओं को नौकरी के अवसर भी प्रदान किए औरउन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया।धीरे-धीरे गाँव का रूप बदलने लगा। बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलनेलगी, लोगों को स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हो गईं और गाँव के हर कोने में साफ पानी पहुँचने लगा। गाँव के लोगरघुवीर सिंह के इस परिवर्तन से बहुत खुश थे और उनकी तारीफ करने लगे। रघुवीर सिंह ने अपने धन का सहीउपयोग करके गाँव की भलाई की और उनकी प्रतिष्ठा भी बढ़ गई।एक दिन, रघुवीर सिंह के पास वही साधुफिर से आए। उन्होंने रघुवीर सिंह से कहा, "तुम्हारे इस बदलाव ने साबित कर दिया कि धन का सही उपयोगही उसे मूल्यवान बनाता है। तुमने अपने धन से गाँव की भलाई की, इससे तुम्हारा जीवन सार्थक हो गयाहै।"रघुवीर सिंह ने नम्रता से कहा, "महात्मा जी, आपकी बातें मेरे लिए एक मार्गदर्शन बन गईं। मैंने समझा किधन का सही उपयोग ही उसका असली मूल्य है। अब मैं हर संभव प्रयास करूंगा कि मेरे धन से लोगों कीभलाई हो सके।"रघुवीर सिंह ने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया कि वे अपने धन का उपयोग केवल अपनेलिए नहीं, बल्कि समाज की भलाई के लिए करेंगे। उन्होंने अपने खेतों में उगने वाली फसलों का एक हिस्सागाँव के गरीब लोगों में बाँटना शुरू किया। उन्होंने गाँव में एक पुस्तकालय भी स्थापित किया, जहाँ लोग आकरपढ़ सकते थे और अपने ज्ञान को बढ़ा सकते थे।गाँव के लोग रघुवीर सिंह के इस बदलाव से बहुत प्रभावित हुएऔर उन्हें अपना आदर्श मानने लगे। रघुवीर सिंह ने अपनी संपत्ति का सही उपयोग करके न केवल गाँव काविकास किया, बल्कि लोगों के दिलों में भी अपनी जगह बनाई।शांतिकुंज गाँव अब खुशहाल और समृद्ध बनगया था। रघुवीर सिंह ने साबित कर दिया कि अगर धन का सही उपयोग किया जाए, तो वह केवल बुराई काढेर नहीं होता, बल्कि समाज की भलाई का एक महत्वपूर्ण साधन बन जाता है। उनका जीवन एक उदाहरणबन गया कि सच्ची समृद्धि वही है जो दूसरों की भलाई में निहित हो।अंतरघुवीर सिंह की कहानी हमें यहसिखाती है कि धन का सही उपयोग ही उसे मूल्यवान बनाता है। अगर धन का उपयोग समाज की भलाई औरविकास के लिए किया जाए, तो वह वास्तव में सार्थक हो जाता है। अन्यथा, वह केवल बुराई का ढेर बनकर रहजाता है। इसलिए, हमें अपने धन का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए और दूसरों की भलाई के लिए इसेलगाना चाहिए। यही सच्ची समृद्धि और मानवता का मूल है।
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Tuesday, June 18, 2024
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