Sunday, October 24, 2021

सच्ची साधना

एक व्यक्ति हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करता था। धीरे धीरे वह काफी बुजुर्ग हो चला था इसीलिए एक कमरे मे ही पड़ा रहता था। जब भी उसे शौच, स्नान आदि के लिये जाना होता था वह अपने बेटो को आवाज लगाता था और बेटे ले जाते थे। 
         धीरे-धीरे कुछ दिन बाद बेटे कई बार आवाज लगाने के बाद भी कभी-कभी आते और देर रात तो नहीं भी आते थे। इस दौरान वे कभी-कभी गंदे बिस्तर पर ही रात बिता दिया करते थे। जब और ज्यादा बुढ़ापा होने के कारण उन्हें कम दिखाई देने लगा।
        एक दिन रात को निवृत्त होने के लिये जैसे ही उन्होंने आवाज लगायी, तुरन्त एक लड़का आता है और बडे ही कोमल स्पर्श के साथ उनको निवृत्त करवा कर बिस्तर पर लेटा जाता है। अब ये रोज का नियम हो गया।
        एक रात उनको शक हो जाता है कि, पहले तो बेटों को रात में कई बार आवाज लगाने पर भी नही आते थे। लेकिन ये तो आवाज लगाते ही दूसरे क्षण आ जाता है और बडे कोमल स्पर्श से सब निवृत्त करवा देता है। 
        एक रात वह व्यक्ति उसका हाथ पकड़ लेता है और पूछता है कि सच बता तू कौन है ? मेरे बेटे तो ऐसे नही हैं। तभी अंधेरे कमरे में एक अलौकिक उजाला हुआ और उस लड़के रूपी ईश्वर ने अपना वास्तविक रूप दिखाया। 
          वह व्यक्ति रोते हुये कहता है- "हे प्रभु ! आप स्वयं मेरे निवृत्ती के कार्य कर रहे हैं।। यदि मुझसे इतने प्रसन्न हो तो मुक्ति ही दे दो ना।"  प्रभु कहते है कि जो आप भुगत रहे है वो आपके प्रारब्ध हैं। आप मेरे सच्चे साधक है, हर समय मेरा नाम जप करते हैं इसलिये मैं आपके प्रारब्ध भी आपकी सच्ची साधना के कारण स्वयं कटवा रहा हूँ। व्यक्ति कहता है कि क्या मेरे प्रारब्ध आपकी कृपा से भी बडे है, क्या आपकी कृपा, मेरे प्रारब्ध नही काट सकती है ?
        प्रभु कहते है, मेरी कृपा सर्वोपरि हैं ये अवश्य आपके प्रारब्ध काट सकती है, लेकिन फिर अगले जन्म मे आपको ये प्रारब्ध भुगतने फिर से आना होगा। यही कर्म नियम है। इसलिए आपके प्रारब्ध मैं स्वयं अपने हाथो से कटवा कर इस जन्म-मरण से आपको मुक्ति देना चाहता हूँ। प्रभु कहते है,  प्रारब्ध तीन तरह के होते है। "मन्द, तीव्र तथा तीव्रतम" मन्द प्रारब्ध मेरा नाम जपने से कट जाते हैं।। तीव्र प्रारब्ध किसी सच्चे संत का संग करके श्रद्धा और विश्वास से मेरा नाम जपने पर कट जाते हैं। पर तीव्रतम प्रारब्ध भुगतने ही पडते है। लेकिन जो हर समय श्रद्धा और विश्वास से मुझे जपते हैं, उनके प्रारब्ध मैं स्वयं साथ रहकर कटवाता हूँ और तीव्रता का अहसास नहीं होने देता हूँ।

Saturday, October 9, 2021

जीवन का आनंद

गाँव में एक बूढ़ा रहता था। सारा गाँव उससे थक गया था; वह हमेशा उदास रहता था, वह लगातार शिकायत करता था और हमेशा बुरे मूड में रहता था। वह जितने लंबे समय तक जीवित रहा, वह उतना ही निंदनीय होता गया और उसके शब्द अधिक जहरीले होते गए। लोगों ने उससे बचने की पूरी कोशिश की क्योंकि उसका दुर्भाग्य संक्रामक था। उसने दूसरों में दुख की भावना पैदा की।
लेकिन एक दिन, जब वह अस्सी वर्ष के हुए, एक अविश्वसनीय बात हुई। फ़ौरन सभी को यह अफवाह सुनाई देने लगी: 'बूढ़ा आदमी आज खुश है, वह किसी बात की शिकायत नहीं करता, मुस्कुराता है, और उसका चेहरा भी तरोताज़ा हो जाता है।'
सारा गाँव उस आदमी के पास इकट्ठा हो गया और उससे पूछा, “तुम्हें क्या हुआ?”
बूढ़े ने जवाब दिया, 'कुछ खास नहीं। अस्सी साल से मैं खुशी का पीछा कर रहा हूं और यह बेकार था। और फिर मैंने खुशी के बिना जीने और जीवन का आनंद लेने का फैसला किया। इसलिए मैं अब खुश हूं।'

Monday, September 27, 2021

दूसरों को धोखा देने की कोशिश मत करो

एक बार, एक किसान था जो नियमित रूप से एक बेकर को मक्खन बेचता था। एक दिन, बेकर ने यह देखने के लिए मक्खन को तौलने का फैसला किया कि क्या उसे उतनी ही मात्रा मिल रही है जितनी उसने मांगी थी। उसे पता चला कि वह नहीं है, इसलिए वह किसान को अदालत में ले गया।
न्यायाधीश ने किसान से पूछा कि क्या वह मक्खन को तौलने के लिए किसी उपाय का उपयोग करता है। किसान ने उत्तर दिया, 'महाराज, मैं आदिम हूँ। मेरे पास उचित माप नहीं है, लेकिन मेरे पास एक पैमाना है।'
न्यायाधीश ने उत्तर दिया, "तो फिर तुम मक्खन कैसे तौलते हो?"
किसान ने उत्तर दिया; "महाराज, बहुत पहले से ही बेकर ने मुझसे मक्खन खरीदना शुरू किया था, मैं उससे एक पाउंड की रोटी खरीद रहा था। हर दिन, जब बेकर रोटी लाता है, तो मैं इसे पैमाने पर रखता हूं और मक्खन में उतना ही वजन देता हूं। अगर किसी को दोष देना है, तो वह बेकर है।'
कहानी का नैतिक : जीवन में आपको वही मिलता है जो आप देते हैं। दूसरों को धोखा देने की कोशिश मत करो

Wednesday, September 22, 2021

अद्भुत मित्रता

एक भंवरे की मित्रता एक गोबरी (गोबर में रहने वाले) कीड़े से हो गई, एक दिन कीड़े ने भंवरे से कहा भाई तुम मेरे सबसे अच्छे मित्र हो, इसलिये मेरे यहाँ भोजन पर आओ!
भंवरा भोजन खाने पहुँचा! बाद में भंवरा सोच में पड़ गया- कि मैंने बुरे का संग किया इसलिये मुझे गोबर खाना पड़ा! अब भंवरे ने कीड़े को अपने यहां आने का निमंत्रन दिया कि तुम कल मेरे यहाँ आओ!
अगले दिन कीड़ा भंवरे के यहाँ पहुँचा! भंवरे ने कीड़े को उठा कर गुलाब के फूल में बिठा दिया! कीड़े ने परागरस पिया! मित्र का धन्यवाद कर ही रहा था कि पास के मंदिर का पुजारी आया और फूल तोड़ कर ले गया और बिहारी जी के चरणों में चढा दिया! कीड़े को ठाकुर जी के दर्शन हुये! चरणों में बैठने का सौभाग्य भी मिला! संध्या में पुजारी ने सारे फूल इक्कठा किये और गंगा जी में छोड़ दिए! कीड़ा अपने भाग्य पर हैरान था! इतने में भंवरा उड़ता हुआ कीड़े के पास आया, पूछा-मित्र! क्या हाल है? कीड़े ने कहा-भाई! जन्म-जन्म के पापों से मुक्ति हो गयी! ये सब अच्छी संगत का फल है!
"संगत से गुण ऊपजे, संगत से अवगुण जाए
"लोहा लगा जहाज में , पानी में उतराय!"*
कोई भी नही जानता कि हम इस जीवन के सफ़र में एक दूसरे से क्यों मिलते है,
सब के साथ रक्त संबंध नहीं हो सकते परन्तु ईश्वर हमें कुछ लोगों के साथ मिलाकर अद्भुत रिश्तों में बांध देता हैं,हमें उन रिश्तों को हमेशा संजोकर रखना चाहिए

Sunday, September 19, 2021

गिले-शिकवे

 एक महिला रोज मंदिर जाती थी ! एक दिन उस महिला ने पुजारी से कहा अब मैं मंदिर नही आया करूँगी !


इस पर पुजारी ने पूछा -- क्यों ?

तब महिला बोली -- मैं देखती हूँ लोग मंदिर परिसर में अपने फोन से अपने व्यापार की बात करते हैं ! कुछ ने तो मंदिर को ही गपशप करने का स्थान चुन रखा है ! कुछ पूजा कम पाखंड,दिखावा ज्यादा करते हैं !

इस पर पुजारी कुछ देर तक चुप रहे फिर कहा -- सही है ! परंतु अपना अंतिम निर्णय लेने से पहले क्या आप मेरे कहने से कुछ कर सकती हैं !

महिला बोली -आप बताइए क्या करना है ?

पुजारी ने कहा -- एक गिलास पानी भर लीजिए और 2 बार मंदिर परिसर के अंदर परिक्रमा लगाइए । शर्त ये है कि गिलास का पानी गिरना नहीं चाहिये !

महिला बोली -- मैं ऐसा कर सकती हूँ !

फिर थोड़ी ही देर में उस महिला ने ऐसा ही कर दिखाया ! उसके बाद मंदिर के पुजारी ने महिला से 3 सवाल पूछे -

1.क्या आपने किसी को फोन पर बात करते देखा?

2.क्या आपने किसी को मंदिर में गपशप करते देखा?

3.क्या किसी को पाखंड करते देखा?

महिला बोली -- नहीं मैंने कुछ भी नहीं देखा !

फिर पुजारी बोले --- जब आप परिक्रमा लगा रही थीं तो आपका पूरा ध्यान गिलास पर था कि इसमें से पानी न गिर जाए इसलिए आपको कुछ दिखाई नहीं दिया|

 अब जब भी आप मंदिर आयें तो अपना ध्यान सिर्फ़ परम पिता परमात्मा में ही लगाना फिर आपको कुछ दिखाई नहीं देगा| सिर्फ भगवान ही सर्वत्र दिखाई देगें|

      '' जाकी रही भावना जैसी ..
        प्रभु मूरत देखी तिन तैसी|''

जीवन मे दुःखो के लिए कौन जिम्मेदार है ?

 ना भगवान,
 ना गृह-नक्षत्र,
 ना भाग्य,
 ना रिश्तेदार,
 ना पडोसी,
 ना सरकार,

जिम्मेदार आप स्वयं है|

1) आपका सरदर्द, फालतू विचार का परिणाम|

2) पेट दर्द, गलत खाने का परिणाम|

3) आपका कर्ज, जरूरत से ज्यादा खर्चे का परिणाम|

4) आपका दुर्बल /मोटा /बीमार शरीर, गलत जीवन शैली का परिणाम|

5) आपके कोर्ट केस, आप के अहंकार का परिणाम|

6) आपके फालतू विवाद, ज्यादा व् व्यर्थ बोलने का परिणाम|
उपरोक्त कारणों के अलावा सैकड़ों कारण है और बेवजह दोषारोपण दूसरों पर करते रहते हैं | इसमें ईश्वर दोषी नहीं है|
अगर हम इन कष्टों के कारणों पर बारिकी से विचार करें तो पाएंगे की कहीं न कहीं हमारी मूर्खताएं ही इनके पीछे है|
_गिले-शिकवे सिर्फ़ साँस लेने तक ही चलते हैं,_
 बाद में तो सिर्फ़ पछतावे रह जाते हैं..!!
आपका जीवन प्रकाशमय हो तथा शुभ हो l

Monday, September 6, 2021

हम कितने खुशकिस्मत है

रामेश्वर ने पत्नी के स्वर्ग वास हो जाने के बाद अपने दोस्तों के साथ सुबह शाम पार्क में टहलना और गप्पें मारना, पास के मंदिर में दर्शन करने को अपनी दिनचर्या बना लिया था।
हालांकि घर में उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं थी। सभी उनका बहुत ध्यान रखते थे, लेकिन आज सभी दोस्त चुपचाप बैठे थे।
एक दोस्त को वृद्धाश्रम भेजने की बात से सभी दु:खी थे" आप सब हमेशा मुझसे पूछते थे कि मैं भगवान से तीसरी रोटी क्यों माँगता हूँ? आज बतला देता हूँ। "
कमल ने पूछा  "क्या बहू तुम्हें सिर्फ तीन रोटी ही देती है ?"
बड़ी उत्सुकता से एक दोस्त ने पूछा? "नहीं यार! ऐसी कोई बात नहीं है, बहू बहुत अच्छी है।
असल में  "रोटी, चार प्रकार की होती है।"
 पहली "सबसे स्वादिष्ट" रोटी "माँ की "ममता" और "वात्सल्य" से भरी हुई। जिससे पेट तो भर जाता है, पर मन कभी नहीं भरता।
एक दोस्त ने कहा, सोलह आने सच, पर शादी के बाद माँ की रोटी कम ही मिलती है।" उन्होंने आगे कहा  "हाँ, वही तो बात है।
दूसरी रोटी पत्नी की होती है जिसमें अपनापन और "समर्पण" भाव होता है जिससे "पेट" और "मन" दोनों भर जाते हैं।", क्या बात कही है यार ?" ऐसा तो हमने कभी सोचा ही नहीं।
फिर तीसरी रोटी किस की होती है?" एक दोस्त ने सवाल किया।
"तीसरी रोटी बहू की होती है जिसमें सिर्फ "कर्तव्य" का भाव होता है जो कुछ कुछ स्वाद भी देती है और पेट भी भर देती है और वृद्धाश्रम की परेशानियों से भी बचाती है", थोड़ी देर के लिए वहाँ चुप्पी छा गई।
लेकिन ये चौथी रोटी कौन सी होती है ?" मौन तोड़ते हुए एक दोस्त ने पूछा-
चौथी रोटी नौकरानी की होती है। जिससे ना तो इन्सान का "पेट" भरता है न ही "मन" तृप्त होता है और "स्वाद" की तो कोई गारँटी ही नहीं है", तो फिर हमें क्या करना चाहिये यार?
माँ की हमेशा पूजा करो, पत्नी को सबसे अच्छा दोस्त बना कर जीवन जिओ, बहू को अपनी बेटी समझो और छोटी मोटी ग़लतियाँ नज़रन्दाज़ कर दो बहू खुश रहेगी तो बेटा भी आपका ध्यान रखेगा।
यदि हालात चौथी रोटी तक ले ही आयें तो भगवान का शुकर करो कि उसने हमें ज़िन्दा रखा हुआ है, अब स्वाद पर ध्यान मत दो केवल जीने के लिये बहुत कम खाओ ताकि आराम से बुढ़ापा कट जाये, बड़ी खामोशी से सब दोस्त सोच रहे थे कि वाकई, हम कितने खुशकिस्मत है

Thursday, September 2, 2021

तोड़ना आसान है, जुड़े रहना बहुत मुश्किल है

गधा पेड़ से बंधा था। शैतान आया और उसे खोल गया।
गधा मस्त होकर खेतों की ओर भाग निकला और खड़ी फसल को खराब करने लगा।
किसान की पत्नी ने यह देखा तो गुस्से में गधे को मार डाला।
गधे की लाश देखकर गधे के मालिक को बहुत गुस्सा आया और उसने किसान की पत्नी को गोली मार दी। 
किसान पत्नी की मौत से इतना गुस्से में आ गया कि उसने गधे के मालिक को गोली मार दी।
गधे के मालिक की पत्नी ने जब पति की मौत की खबर सुनी तो गुस्से में बेटों को किसान का घर जलाने का आदेश दिया।
बेटे शाम में गए और मां का आदेश खुशी-खुशी पूरा कर आए। उन्होंने मान लिया कि किसान भी घर के साथ जल गया होगा।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसान वापस आया और उसने गधे के मालिक की पत्नी और बेटों, तीनों की हत्या कर दी।
इसके बाद उसे पछतावा हुआ और उसने शैतान से पूछा कि यह सब नहीं होना चाहिए था। ऐसा क्यों हुआ?
शैतान ने कहा मैंने कुछ नहीं किया। मैंने सिर्फ गधा खोला लेकिन तुम सबने रिऐक्ट किया, ओवर रिऐक्ट किया और अपने अंदर के शैतान को बाहर आने दिया।
 इसलिए अगली बार किसी का जवाब देने, प्रतिक्रिया देने, किसी से बदला लेने से पहले एक लम्हे के लिए रुकना और सोचना ज़रूर।'
ध्यान रखें। कई बार शैतान हमारे बीच सिर्फ गधा छोड़ता है और बाकी विनाश हम खुद कर देते हैं !!
मिल जुल कर मुस्कुरा कर खुशी से रहिये याद रखें-
तोड़ना आसान है, जुड़े रहना बहुत मुश्किल है...
लड़ाना आसान है, मिलाना बहुत मुश्किल...

Tuesday, August 17, 2021

जीवन में आपके तनाव और चिंताएँ

एक बार की बात है एक मनोविज्ञान के प्रोफेसर छात्रों से भरे एक सभागार में तनाव प्रबंधन के सिद्धांतों को पढ़ाते हुए एक मंच पर घूमते थे। जैसे ही उसने एक गिलास पानी उठाया, सभी को उम्मीद थी कि उनसे ठेठ 'ग्लास आधा खाली या गिलास आधा भरा' प्रश्न पूछा जाएगा। इसके बजाय, उसके चेहरे पर मुस्कान के साथ, प्रोफेसर ने पूछा, 'यह पानी का गिलास कितना भारी है जिसे मैं पकड़ रहा हूँ?'
छात्रों ने आठ औंस से लेकर दो पाउंड तक के उत्तर चिल्लाए।
उसने जवाब दिया, 'मेरे नजरिए से, इस गिलास का पूर्ण वजन मायने नहीं रखता। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि मैं इसे कितने समय तक धारण करता हूं। अगर मैं इसे एक या दो मिनट के लिए पकड़ता हूं, तो यह काफी हल्का होता है। अगर मैं इसे एक घंटे तक सीधा रखता हूं, तो इसका वजन मेरे हाथ में थोड़ा दर्द कर सकता है। अगर मैं इसे एक दिन के लिए सीधा रखता हूं, तो मेरी बांह में ऐंठन होने की संभावना है और मैं पूरी तरह से सुन्न और लकवाग्रस्त महसूस करूंगा, जिससे मुझे कांच को फर्श पर गिराने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। प्रत्येक मामले में, कांच का वजन नहीं बदलता है, लेकिन जितनी देर मैं इसे पकड़ता हूं, यह मुझे उतना ही भारी लगता है।'
जैसे ही कक्षा ने सहमति में अपना सिर हिलाया, उसने आगे कहा, 'जीवन में आपके तनाव और चिंताएँ पानी के इस गिलास की तरह हैं। कुछ देर उनके बारे में सोचें और कुछ न हो। उनके बारे में थोड़ा और सोचें और आपको थोड़ा दर्द होने लगे। दिन भर उनके बारे में सोचें, और आप पूरी तरह से स्तब्ध और लकवाग्रस्त महसूस करेंगे - जब तक आप उन्हें छोड़ नहीं देते, तब तक आप कुछ और करने में असमर्थ हैं।'"

Sunday, August 8, 2021

विजय और राजू दोस्त थे। एक दिन छुट्टी के दिन जंगल की खोज में उन्होंने एक भालू को अपनी ओर आते देखा।स्वाभाविक रूप से, वे दोनों भयभीत थे, इसलिए राजू, जो पेड़ों पर चढ़ना जानता था, जल्दी से एक पर चढ़ गया। उसने अपने उस मित्र के लिए एक विचार नहीं छोड़ा, जो नहीं जानता था कि कैसे चढ़ना है।विजय ने एक पल के लिए सोचा। उसने सुना था कि जानवर शवों पर हमला नहीं करते हैं, इसलिए वह जमीन पर गिर गया और अपनी सांस रोक ली। भालू ने उसे सूँघा, सोचा कि वह मर चुका है, और अपने रास्ते चला गया।राजू ने पेड़ से नीचे उतरने के बाद विजय से पूछा, 'भालू तुम्हारे कानों में क्या फुसफुसा रहा था?' विजय ने जवाब दिया, 'भालू ने मुझे आप जैसे दोस्तों से दूर रहने के लिए कहा।'"


Wednesday, August 4, 2021

 हर रविवार की सुबह मैं अपने घर के पास एक पार्क के आसपास हल्की जॉगिंग करता हूं। पार्क के एक कोने में एक झील है। जब भी मैं इस झील के किनारे टहलता हूं, मैं देखता हूं कि वही बुजुर्ग महिला पानी के किनारे बैठी है और उसके पास एक छोटा धातु का पिंजरा है।

पिछले रविवार को मेरी जिज्ञासा ने मुझे सबसे अच्छा लगा, इसलिए मैंने जॉगिंग करना बंद कर दिया और उसके पास चला गया। जैसे-जैसे मैं करीब आया, मैंने महसूस किया कि धातु का पिंजरा वास्तव में एक छोटा जाल था। जाल के आधार के चारों ओर धीरे-धीरे घूमते हुए, तीन कछुए थे, जिन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ था। उसकी गोद में चौथा कछुआ था जिसे वह स्पंजी ब्रश से सावधानी से साफ़ कर रही थी।
'नमस्कार,' मैंने कहा। 'मैं आपको यहां हर रविवार की सुबह देखता हूं। अगर आपको मेरी नीरसता से ऐतराज नहीं है, तो मुझे यह जानना अच्छा लगेगा कि आप इन कछुओं के साथ क्या कर रहे हैं।'
वह हंसी। 'मैं उनके गोले साफ कर रही हूं,' उसने जवाब दिया। "कछुए के खोल पर कुछ भी, जैसे शैवाल या मैल, कछुए की गर्मी को अवशोषित करने की क्षमता को कम करता है और तैरने की क्षमता को बाधित करता है। यह समय के साथ खोल को खराब और कमजोर भी कर सकता है।'
'क्या बात है! यह वास्तव में आपके लिए बहुत अच्छा है!' मैंने कहा।
वह आगे बढ़ी: 'मैं प्रत्येक रविवार की सुबह इस झील के किनारे आराम करने और इन छोटे लोगों की मदद करने में कुछ घंटे बिताती हूं। यह बदलाव लाने का मेरा अपना अजीब तरीका है।'
'लेकिन क्या अधिकांश मीठे पानी के कछुए अपना पूरा जीवन शैवाल और अपने खोल से लटके हुए मैल के साथ नहीं जीते हैं?' मैंने पूछा।
'हाँ, दुख की बात है, वे करते हैं,' उसने जवाब दिया।
मैंने अपना सिर खुजलाया। 'तो ठीक है, क्या आपको नहीं लगता कि आपका समय बेहतर तरीके से व्यतीत हो सकता है? मेरा मतलब है, मुझे लगता है कि आपके प्रयास दयालु और सभी हैं, लेकिन दुनिया भर की झीलों में ताजे पानी के कछुए रहते हैं। और इनमें से 99% कछुओं के पास आपके जैसे दयालु लोग नहीं हैं जो उनके गोले को साफ करने में मदद करें। तो, कोई अपराध नहीं ... लेकिन वास्तव में आपके स्थानीय प्रयासों से वास्तव में कैसे फर्क पड़ रहा है?'
महिला जोर से हंस पड़ी। फिर उसने अपनी गोद में कछुए को देखा, उसके खोल से शैवाल के आखिरी टुकड़े को साफ़ किया, और कहा, 'स्वीटी, अगर यह छोटा लड़का बात कर सकता है, तो वह आपको बताएगा कि मैंने दुनिया में सभी अंतर बनाए हैं

Sunday, August 1, 2021

माता पिता का ऋण

एक बार एक पिता और उसका पुत्र जलमार्ग से कहीं यात्रा कर रहे थे और तभी अचानक दोनों रास्ता भटक गये। फिर उनकी नौका भी उन्हें ऐसी जगह ले गई, जहाँ दो टापू आस-पास थे और फिर वहाँ पहुंच कर उनकी नौका टूट गई।
 पिता ने पुत्र से कहा, "अब लगता है, हम दोनों का अंतिम समय आ गया है, दूर-दूर तक कोई सहारा नहीं दिख रहा है।"
अचानक पिता को एक उपाय सूझा, अपने पुत्र से कहा कि "वैसे भी हमारा अंतिम समय नज़दीक है, तो क्यों न हम ईश्वर की प्रार्थना करें।"
उन्होने दोनों टापू आपस में बाँट लिए।
एक पर पिता और एक पर पुत्र, और दोनों अलग-अलग टापू पर ईश्वर की प्रार्थना करने लगे।
पुत्र ने ईश्वर से कहा, 'हे भगवन, इस टापू पर पेड़-पौधे उग जाए जिसके फल-फूल से हम अपनी भूख मिटा सकें।'
ईश्वर ने प्रार्थना सुनी गयी, तत्काल पेड़-पौधे उग गये और उसमें फल-फूल भी आ गये। उसने कहा ये तो चमत्कार हो गया।
फिर उसने प्रार्थना की, एक सुंदर स्त्री आ जाए जिससे हम यहाँ उसके साथ रहकर अपना परिवार बसाएँ।
तत्काल एक सुंदर स्त्री प्रकट हो गयी।
अब उसने सोचा कि मेरी हर प्रार्थना सुनी जा रही है, तो क्यों न मैं ईश्वर से यहाँ से बाहर निकलने का रास्ता माँगे लूँ ? 
उसने ऐसा ही किया।
उसने प्रार्थना की, एक नई नाव आ जाए जिसमें सवार होकर मैं यहाँ से बाहर निकल सकूँ।
तत्काल नाव प्रकट हुई और पुत्र उसमें सवार होकर बाहर निकलने लगा।
तभी एक आकाशवाणी हुई, बेटा तुम अकेले जा रहे हो? अपने पिता को साथ नहीं लोगे ?
 पुत्र ने कहा, उनको छोड़ो, प्रार्थना तो उन्होंने भी की, लेकिन आपने उनकी एक भी नहीं सुनी।  शायद उनका मन पवित्र नहीं है, तो उन्हें इसका फल भोगने दो ना ?
आकाशवाणी ने कहा, 'क्या तुम्हें पता है कि तुम्हारे पिता ने क्या प्रार्थना की ?
पुत्र बोला, नहीं।
 आकाशवाणी बोली तो सुनो, 'तुम्हारे पिता ने एक ही प्रार्थना की..." हे भगवन! मेरा पुत्र आपसे जो भी माँगे, उसे दे देना क्योंकि मैं उसे दुःख में हरगिज़ नहीं देख सकता औऱ अगर मरने की बारी आए तो मेरी मौत पहले हो " और जो कुछ तुम्हें मिल रहा है उन्हीं की प्रार्थना का परिणाम है।'
 पुत्र बहुत शर्मिंदा हो गया।*हमें जो भी सुख, प्रसिद्धि, मान, यश, धन, संपत्ति और सुविधाएं मिल रही है उसके पीछे किसी अपने की प्रार्थना और शक्ति जरूर होती है लेकिन हम नादान रहकर अपने अभिमान वश इस सबको अपनी उपलब्धि मानने की भूल करते रहते हैं और जब ज्ञान होता है तो असलियत का पता लगने पर सिर्फ़ पछताना पड़ता है।हम चाह कर भी अपने माता पिता का ऋण नहीं चुका सकते हैं।

Sunday, July 25, 2021

जब विपत्ति आपके दरवाजे पर दस्तक देती है

एक बार एक बेटी ने अपने पिता से शिकायत की कि उसका जीवन दयनीय है और उसे नहीं पता कि वह इसे कैसे बनाने जा रही है। वह हर समय लड़ते-लड़ते थक चुकी थी। ऐसा लग रहा था जैसे एक समस्या हल हो गई, दूसरी जल्द ही आ गई।
उसका पिता, एक पेशेवर रसोइया, उसे रसोई घर में ले आया। उसने तीन घड़ों को पानी से भर दिया और प्रत्येक को तेज आग पर रख दिया। एक बार जब तीन बर्तन उबलने लगे, तो उसने एक बर्तन में आलू, दूसरे बर्तन में अंडे और तीसरे बर्तन में कॉफी बीन्स को पीस लिया।
फिर उसने अपनी बेटी से एक शब्द कहे बिना, उन्हें बैठने और उबालने दिया। बेटी, कराह रही थी और बेसब्री से इंतजार कर रही थी, सोच रही थी कि वह क्या कर रहा है।
बीस मिनट के बाद उसने बर्नर बंद कर दिए। उसने आलू को बर्तन से निकाल कर एक प्याले में रख दिया। उन्होंने उबले हुए अंडों को बाहर निकाला और एक कटोरे में रख दिया।
फिर उसने कॉफी को बाहर निकाला और एक कप में रख दिया। उसकी ओर मुड़कर उसने पूछा। 'बेटी, तुम क्या देखती हो?'
'आलू, अंडे और कॉफी,' उसने झट से जवाब दिया।

उसने कहा, 'करीब देखो,' उसने कहा, 'और आलू को छुओ।' उसने किया और देखा कि वे नरम थे। फिर उसने उसे एक अंडा लेने और उसे तोड़ने के लिए कहा। खोल को हटाने के बाद, उसने कठोर उबले अंडे को देखा। अंत में, उसने उसे कॉफी पीने के लिए कहा। इसकी समृद्ध सुगंध ने उसके चेहरे पर मुस्कान ला दी।
'पिताजी, इसका क्या मतलब है?' उसने पूछा।
फिर उन्होंने समझाया कि आलू, अंडे और कॉफी बीन्स प्रत्येक को एक ही प्रतिकूलता का सामना करना पड़ा - उबलते पानी।
हालांकि, सभी ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी।
आलू मजबूत, कठोर और अथक रूप से चला गया, लेकिन उबलते पानी में, यह नरम और कमजोर हो गया।
अंडा नाजुक था, पतला बाहरी आवरण इसके तरल आंतरिक भाग की रक्षा करता था जब तक कि इसे उबलते पानी में नहीं डाला जाता। फिर अंडे के अंदर का भाग सख्त हो गया।
हालांकि, ग्राउंड कॉफी बीन्स अद्वितीय थे। उबलते पानी के संपर्क में आने के बाद, उन्होंने पानी बदल दिया और कुछ नया बनाया।
'तुम कौन हो,' उसने अपनी बेटी से पूछा। 'जब विपत्ति आपके दरवाजे पर दस्तक देती है, तो आप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं? क्या आप आलू, अंडा या कॉफी बीन हैं?

Saturday, July 24, 2021

प्रेमी आंसु

 एक बार एक अंधी औरत थी जो खुद से पूरी तरह नफरत करती थी क्योंकि वह देख नहीं सकती थी। वह एकमात्र व्यक्ति जिसे वह प्यार करती थी वह उसका प्रेमी था, क्योंकि वह हमेशा उसके लिए था। उसने कहा कि अगर वह केवल दुनिया देख सकती है, तो वह उससे शादी करेगी।

एक दिन, किसी ने उसे एक जोड़ी आंखें दान कर दीं - अब वह अपने प्रेमी सहित सब कुछ देख सकती थी। उसके प्रेमी प्रेमी ने उससे पूछा, 'अब जब कि तुम दुनिया देख सकती हो, तो क्या तुम मुझसे शादी करोगी?'
जब महिला ने देखा कि उसका प्रेमी भी अंधा है तो महिला चौंक गई और उसने उससे शादी करने से इनकार कर दिया। उसका प्रेमी आंसुओं के साथ चला गया, और उसे यह कहते हुए एक छोटा नोट लिखा: 'बस मेरी आँखों का ख्याल रखना, प्रिय

Friday, July 23, 2021

आप खास हैं

एक लोकप्रिय वक्ता ने $20 का बिल लेकर एक सेमिनार की शुरुआत की। उनकी बात सुनने के लिए 200 की भीड़ जमा हो गई थी। उन्होंने पूछा, 'इस $20 बिल को कौन पसंद करेगा?'

200 हाथ ऊपर गए।

उन्होंने कहा, 'मैं आप में से एक को यह 20 डॉलर देने जा रहा हूं, लेकिन पहले, मुझे यह करने दो।' उसने बिल को तोड़ दिया।

फिर उन्होंने पूछा, 'कौन अब भी इसे चाहता है?'

सभी 200 हाथ अभी भी उठे हुए थे।

'ठीक है,' उसने जवाब दिया, 'अगर मैं ऐसा करूँ तो क्या होगा?' फिर उसने बिल को जमीन पर गिरा दिया और अपने जूतों से उस पर पटक दिया।

उसने उसे उठाया और भीड़ को दिखाया। बिल सब उखड़ गया और गंदा था।

'अब कौन इसे चाहता है?'

सब हाथ फिर भी उठ गए।

'मेरे दोस्तों, मैंने अभी आपको एक बहुत ही महत्वपूर्ण सबक दिखाया है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैंने पैसे के लिए क्या किया, आप अभी भी इसे चाहते थे क्योंकि यह मूल्य में कमी नहीं करता था। यह अभी भी $ 20 के लायक था। हमारे जीवन में कई बार, जीवन हमें कुचल देता है और हमें गंदगी में पीस देता है। हम गलत निर्णय लेते हैं या खराब परिस्थितियों से निपटते हैं। हम बेकार महसूस करते हैं। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता कि क्या हुआ है या क्या होगा, आप अपना मूल्य कभी नहीं खोएंगे। आप खास हैं - इसे कभी न भूलें!'

Wednesday, July 21, 2021

रेगिस्तान

एक पेड़ के नीचे एक माँ और एक ऊंट का बच्चा पड़ा हुआ था।
फिर ऊंट के बच्चे ने पूछा, 'ऊंटों के कूबड़ क्यों होते हैं?'
ऊंट माँ ने इस पर विचार किया और कहा, 'हम रेगिस्तानी जानवर हैं इसलिए हमारे पास पानी जमा करने के लिए कूबड़ हैं ताकि हम बहुत कम पानी से जीवित रह सकें।'
ऊंट के बच्चे ने एक पल के लिए सोचा, फिर कहा, 'ठीक है... हमारे पैर लंबे और पैर गोल क्यों हैं?'
मामा ने उत्तर दिया, 'वे रेगिस्तान में चलने के लिए हैं।'
बच्चा रुक गया। एक धड़कन के बाद ऊंट ने पूछा, 'हमारी पलकें लंबी क्यों हैं? कभी-कभी वे मेरे रास्ते में आ जाते हैं।'
मामा ने जवाब दिया, 'वे लंबी मोटी पलकें हवा में चलने पर रेगिस्तान की रेत से आपकी आंखों की रक्षा करती हैं।'
बच्चे ने सोचा और सोचा। फिर उन्होंने कहा, 'मैं देखता हूं। तो कूबड़ पानी जमा करने के लिए है जब हम रेगिस्तान में होते हैं, पैर रेगिस्तान से चलने के लिए होते हैं और ये आँख की पलकें रेगिस्तान से मेरी आँखों की रक्षा करती हैं तो चिड़ियाघर में क्यों

Tuesday, July 20, 2021

पत्थर पर उकेरना

दो दोस्त रेगिस्तान से गुजर रहे थे। यात्रा के दौरान एक समय उनके बीच बहस हो गई और एक दोस्त ने दूसरे को थप्पड़ मार दिया।
जिसे थप्पड़ लगा, वह आहत हुआ, लेकिन बिना कुछ कहे उसने रेत में लिखा, 'आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मार दिया।'
वे तब तक चलते रहे जब तक उन्हें एक नखलिस्तान नहीं मिला, जहाँ उन्होंने नहाने का फैसला किया। जिसे थप्पड़ मारा गया था, वह कीचड़ में फंस गया और डूबने लगा, लेकिन उसके दोस्त ने उसे बचा लिया। अपने सदमे से उबरने के बाद उन्होंने एक पत्थर पर लिखा, 'आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान बचाई।'
अपने सबसे अच्छे दोस्त को थप्पड़ मारने और बचाने वाले दोस्त ने उससे पूछा, 'मैंने तुम्हें चोट पहुँचाने के बाद, तुमने रेत में लिखा और अब तुम पत्थर में लिखो, क्यों?'
दूसरे मित्र ने उत्तर दिया, 'जब कोई हमें चोट पहुँचाता है तो हमें उसे रेत में लिख देना चाहिए जहाँ क्षमा की हवाएँ उसे मिटा सकें। लेकिन, जब कोई हमारे लिए कुछ अच्छा करता है, तो हमें उसे पत्थर पर उकेरना 

Friday, July 16, 2021

कभी हार न मानें

एक बार, एक बूढ़ा आदमी था, जो टूट गया था, एक छोटे से घर में रहता था और उसके पास बीट अप कार थी। वह $ 99 सामाजिक सुरक्षा चेक से दूर रह रहा था। 65 साल की उम्र में उन्होंने तय किया कि चीजों को बदलना होगा। इसलिए उसने सोचा कि उसे क्या देना है। उनके दोस्तों ने उनकी चिकन रेसिपी के बारे में बताया। उन्होंने फैसला किया कि बदलाव करने के लिए यह उनका सबसे अच्छा शॉट था।
उन्होंने केंटकी छोड़ दिया और अपने नुस्खा को बेचने की कोशिश करने के लिए विभिन्न राज्यों की यात्रा की। उसने रेस्तरां मालिकों को बताया कि उसके पास मुंह में पानी लाने वाली चिकन रेसिपी है। उसने उन्हें मुफ्त में नुस्खा की पेशकश की, बस बेची गई वस्तुओं पर एक छोटा प्रतिशत मांगा। एक अच्छा सौदा की तरह लगता है, है ना?
दुर्भाग्य से, अधिकांश रेस्तरां में नहीं। उसने 1000 से अधिक बार NO सुना। इतना सब ठुकराने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। उनका मानना था कि उनकी चिकन रेसिपी कुछ खास है। अपनी पहली हां सुनने से पहले उन्हें 1009 बार रिजेक्ट किया गया।
उस एक सफलता के साथ कर्नल हार्टलैंड सैंडर्स ने अमेरिकियों के चिकन खाने के तरीके को बदल दिया। केएफसी के नाम से मशहूर केंटकी फ्राइड चिकन का जन्म हुआ।
याद रखें, कभी हार न मानें और अस्वीकृति के बावजूद हमेशा खुद पर विश्वास रखें

Wednesday, July 14, 2021

हमारी स्थिति

 एक बार एक बहुत धनी और जिज्ञासु राजा था। इस राजा के पास एक सड़क के बीच में एक बहुत बड़ा शिलाखंड था। फिर वह यह देखने के लिए पास में छिप गया कि क्या कोई सड़क से विशाल चट्टान को हटाने की कोशिश करेगा।

सबसे पहले लोग राजा के सबसे धनी व्यापारियों और दरबारियों में से कुछ थे। वे इसे हिलाने के बजाय बस इसके चारों ओर चले गए। कुछ लोगों ने राजा पर सड़कों का रखरखाव न करने के लिए जोर-जोर से आरोप लगाया। उनमें से किसी ने भी शिलाखंड को हिलाने की कोशिश नहीं की।
अंत में, एक किसान साथ आया। उसके हाथ सब्जियों से भरे हुए थे। जब वह शिलाखंड के पास पहुंचा, तो दूसरे लोगों की तरह उसके चारों ओर घूमने के बजाय, किसान ने अपना भार नीचे रखा और पत्थर को सड़क के किनारे ले जाने की कोशिश की। इसमें काफी मेहनत लगी लेकिन आखिरकार वह सफल हो गया।
किसान ने अपना भार इकट्ठा किया और अपने रास्ते पर जाने के लिए तैयार था जब उसने कहा कि सड़क पर एक पर्स पड़ा है जहाँ बोल्डर था। किसान ने पर्स खोला। पर्स में सोने के सिक्के और राजा का एक नोट भरा हुआ था। राजा के नोट में कहा गया था कि पर्स का सोना सड़क से पत्थर को हटाने के लिए एक इनाम था।

राजा ने किसान को वह दिखाया जो हम में से कई लोग कभी नहीं समझते हैं: हर बाधा हमारी स्थिति को सुधारने का अवसर प्रस्तुत करती है

Monday, July 12, 2021

 जब मेंढकों का एक समूह जंगल से यात्रा कर रहा था, उनमें से दो एक गहरे गड्ढे में गिर गए। जब अन्य मेंढकों ने गड्ढे के चारों ओर भीड़ लगाई और देखा कि यह कितना गहरा है, तो उन्होंने दो मेंढकों से कहा कि उनके लिए कोई उम्मीद नहीं बची है।

हालाँकि, दो मेंढकों ने दूसरों की बातों को नज़रअंदाज़ करने का फैसला किया और वे गड्ढे से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे।
उनके प्रयासों के बावजूद, गड्ढे के शीर्ष पर मेंढकों का समूह अभी भी कह रहा था कि उन्हें छोड़ देना चाहिए। कि वे इसे कभी बाहर नहीं करेंगे।
आखिरकार, मेंढकों में से एक ने दूसरों की बातों पर ध्यान दिया और उसने हार मान ली, जिससे वह गिर पड़ा। दूसरा मेंढक उतनी ही जोर से कूदता रहा जितना वह कर सकता था। फिर से, मेंढकों की भीड़ ने उस पर चिल्लाया कि दर्द को रोको और बस मर जाओ।
वह और ज़ोर से कूदा और आखिकार कर दिखाया। जब वह बाहर निकला, तो अन्य मेंढकों ने कहा, "क्या तुमने हमें नहीं सुना?"
कहानी का निष्कर्ष
मेंढक ने उन्हें समझाया कि वह बहरा है। वह सोचता है कि वे उसे पूरे समय तक प्रोत्साहित कर रहे थे।
लोगों की बातों का दूसरे के जीवन पर बड़ा असर हो सकता है। अपने मुंह से निकलने से पहले आप जो कहते हैं, उसके बारे में सोचें। जीवन और मृत्यु के बीच बस यही अंतर हो सकता है।

Friday, July 9, 2021

हमारी प्राथमिकता

कल्पना कीजिए कि आपके पास एक बैंक खाता था जो प्रत्येक सुबह $86,400 जमा करता था। खाते में दिन-प्रतिदिन कोई शेष राशि नहीं होती है, आपको कोई नकद शेष राशि नहीं रखने की अनुमति मिलती है, और हर शाम उस राशि के किसी भी हिस्से को रद्द कर देता है जिसे आप दिन के दौरान उपयोग करने में विफल रहे थे। आप क्या करेंगे? हर दिन हर डॉलर निकालें!

हम सभी के पास ऐसा बैंक है। इसका नाम समय है। हर सुबह, यह आपको 86,400 सेकंड का श्रेय देता है। हर रात यह लिखता है, खोया हुआ, जो भी समय आप बुद्धिमानी से उपयोग करने में विफल रहे हैं। यह दिन-प्रतिदिन कोई संतुलन नहीं रखता है। यह ओवरड्राफ्ट की अनुमति नहीं देता है इसलिए आप अपने खिलाफ उधार नहीं ले सकते हैं या आपके पास से अधिक समय का उपयोग नहीं कर सकते हैं। हर दिन, खाता नए सिरे से शुरू होता है। हर रात, यह एक अप्रयुक्त समय को नष्ट कर देता है। यदि आप दिन की जमा राशि का उपयोग करने में विफल रहते हैं, तो यह आपका नुकसान है और आप इसे वापस पाने के लिए अपील नहीं कर सकते।

उधार लेने का समय कभी नहीं होता है। आप अपने समय पर या किसी और के खिलाफ ऋण नहीं ले सकते। आपके पास जो समय है वही आपके पास है और वह है। समय प्रबंधन आपको यह तय करना है कि आप समय कैसे व्यतीत करते हैं, जैसे पैसे के साथ आप तय करते हैं कि आप पैसे कैसे खर्च करते हैं। यह कभी नहीं होता है कि हमारे पास चीजों को करने के लिए पर्याप्त समय नहीं है, लेकिन यह मामला है कि हम उन्हें करना चाहते हैं या नहीं और वे हमारी प्राथमिकताओं में कहां आते हैं।