Sunday, July 20, 2025

भरोसे की उड़ान

राजस्थान के एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक साधारण लड़का रहता था। उसकापरिवार बहुत गरीब था। पिता खेतों में मजदूरी करते थे और माँ घर-घर जाकर कामकरती थी। अर्जुन पढ़ाई में अच्छा था लेकिन हालात ऐसे थे कि कई बार उसे स्कूलछोड़ने का मन करता। गाँव के लोग भी ताने देते, "अरे अर्जुनपढ़ाई से पेट नहीं भरता।तेरे बाप-दादा भी तो खेत में मजदूरी करते रहे। तू भी वही करेगा। सपने देखना छोड़ दे।"


लेकिन अर्जुन के अंदर एक आग थी। उसके गुरुजी हमेशा कहते थे — "अगर खुद परभरोसा हैतो रास्ते खुद--खुद बन जाते हैं।अर्जुन ने इस बात को अपने दिल में बैठालिया था।


स्कूल के बाद वह खेतों में अपने पिता के साथ काम करतालेकिन रात होते ही वहलालटेन की हल्की रौशनी में किताबों में डूब जाता। उसके पास अच्छे कपड़े नहीं थेकिताबें पुरानी थींकभी-कभी तो पेट भी खाली रहतालेकिन उसकी आँखों में अपनेसपनों की चमक थी।


एक दिन स्कूल में एक घोषणा हुई — जिले में एक प्रतियोगिता होने वाली थीजिसमेंअव्वल आने वाले छात्र को शहर के बड़े स्कूल में फ्री में पढ़ने का मौका मिलेगा। अर्जुनके दोस्तों ने कहा, "अरेये बड़े शहर के बच्चों के लिए है। हमारे जैसे गाँव वालों के लिएनहीं।"


लेकिन अर्जुन ने ठान लिया था। उसने अपने गुरुजी से कहा, "मुझे इस प्रतियोगिता मेंभाग लेना है।गुरुजी ने मुस्कुराते हुए कहा, "रास्ता आसान नहीं होगालेकिन अगर खुदपर भरोसा हैतो रास्ते खुद--खुद बनेंगे।"

 

अर्जुन ने दिन-रात पढ़ाई शुरू कर दी। खेत में काम करते समय भी वह मन ही मन सवालहल करता रहता। माँ के लिए लकड़ियाँ बीनने जाते समय रास्ते में वह पहाड़ों से कहता, "मैं हार नहीं मानूंगा।"


प्रतियोगिता का दिन आया। अर्जुन फटे पुराने कपड़े पहनकर शहर गया। सामने बड़े-बड़ेस्कूलों के बच्चेमहंगे कपड़ेचमकदार बैग और स्मार्टफोन के साथ खड़े थे। अर्जुन थोड़ीदेर के लिए घबरा गया। लेकिन तभी उसे अपने गुरुजी की बात याद आई — "खुद परभरोसा रखबेटा। तेरा रास्ता तुझे मिल जाएगा।"


अर्जुन ने पूरे दिल से परीक्षा दी। जब परिणाम आयातो पूरा गाँव हैरान रह गया। अर्जुनने प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया था।


अब उसके सामने एक नई दुनिया थी — शहर का बड़ा स्कूलनए लोगनई चुनौतियाँ।यहाँ भी लोग उसका मजाक उड़ाते। कोई कहता, "ये गाँव का लड़का हमारे साथ क्याकरेगा?" कोई कहता, "इसे तो अंग्रेजी भी नहीं आती।"


लेकिन अर्जुन ने हार नहीं मानी। हर दिन वह थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ता। अंग्रेजी सीखने केलिए वह लाइब्रेरी में घंटों बैठा रहता। गणित के सवालों के लिए रात-रात भर जागता।उसे यह एहसास हो गया था कि अगर वह खुद पर भरोसा रखेतो उसकी मेहनत बेकारनहीं जाएगी।


धीरे-धीरे हालात बदलने लगे। अर्जुन की मेहनत रंग लाने लगी। स्कूल में उसने टॉपकिया। पढ़ाई के साथ-साथ उसने स्पोर्ट्स और डिबेट प्रतियोगिताओं में भी भाग लेनाशुरू किया। हर जीत के साथ उसका आत्मविश्वास बढ़ता गया।


फिर वह दिन आया जब उसे देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग परीक्षा में सफलता मिली।गाँव में ढोल नगाड़े बजने लगे। वही लोगजो कभी कहते थे कि मजदूरी ही उसकीकिस्मत हैअब उसके घर बधाई देने  रहे थे।


अर्जुन ने अपने माता-पिता के साथ गुरुजी के पास जाकर कहा, "गुरुजीआपकी बातसच निकली। सच मेंअगर खुद पर भरोसा हैतो रास्ते खुद--खुद बन जाते हैं।"


गुरुजी ने मुस्कुरा कर कहा, "रास्ते कभी बनकर सामने नहीं आतेबेटा। भरोसे की रोशनीमें ही रास्ते दिखाई देते हैं। तूने उस रोशनी को जलाए रखाइसलिए मंज़िल तकपहुँचा।"


अर्जुन ने गाँव के बच्चों के लिए एक फ्री कोचिंग सेंटर खोलाताकि कोई और बच्चाहालात से हार  माने। वह बच्चों से हमेशा एक ही बात कहता

"मत देखो कि रास्ता कितना कठिन हैदेखो कि तुम्हारे अंदर उसे पार करने की ताकतकितनी है।"

Wednesday, July 16, 2025

हौसलों की ताकत

मुश्किलें तब ही बड़ी लगती हैंजब हौसले छोटे हो जाते हैं।"

यह बात सबको सुनने में आसान लगती हैलेकिन जब ज़िंदगी की ठोकरें पड़ती हैंतब इसेसमझना सबसे ज़रूरी होता है।

यह कहानी है एक छोटे से गाँव के लड़के विवेक की।


विवेक का जन्म एक बहुत ही साधारण परिवार में हुआ था। उसके पिता गाँव के किसान थे और माँघर में सिलाई करके परिवार चलाने में मदद करती थीं। घर की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी।बारिश  हो तो खेत सूखे रह जाते और घर में दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाता।


लेकिन विवेक के मन में एक अलग आग थी। वह पढ़ाई में बहुत होशियार था। बचपन से हीउसके अंदर एक सपना था — कलेक्टर बनने का। वह सोचता था कि एक दिन ऐसा आएगा जबउसके गाँव के लोग उसे देखकर कहेंगे, "देखोये वही लड़का है जिसने गरीबी से लड़कर अपनीमंज़िल पाई।"


पर रास्ता आसान नहीं था। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बादजब उसने सिविल सर्विसेज कीतैयारी करने की बात घर में कहीतो माँ-पिता दोनों ने कहा, "बेटाहमारी हालत देखपढ़ाईछोड़कर कोई नौकरी कर ले। ज़िम्मेदारियाँ बहुत हैं।"


गाँव के लोग भी कहते, "अरेये बड़े-बड़े इम्तिहान गाँव के बच्चों के बस की बात नहीं। हमारे बच्चोंकी किस्मत में तो खेत या दुकान ही है।"


विवेक के लिए यह समय बेहद कठिन था। घर की आर्थिक हालतरिश्तेदारों की बातें और समाजका ताना — सब कुछ उसके सपनों के रास्ते में काँटे की तरह बिछा हुआ था। लेकिन उसने मन मेंठान लिया था — "मुश्किलें तब ही बड़ी लगती हैंजब हौसले छोटे हो जाते हैं।"


विवेक ने एक छोटे से शहर में जाकर सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की। पैसे नहीं थेइसलिएवह दिन में ट्यूशन पढ़ाता और रात में खुद पढ़ाई करता। कई बार खाने के लिए पैसे नहीं होतेकमरे का किराया देने के लिए उधार लेना पड़ता। ठंडी रातों में भूखे पेट किताबों के पन्ने पलटनापंखा  होने पर गर्मी में पसीने से भीगते हुए पढ़ाई करना — ये उसकी रोज़मर्रा की कहानी थी।


तैयारी के दौरान कई बार उसके मन में भी विचार आया कि क्या वह सही कर रहा हैक्या सच मेंइतनी मुश्किलों के बावजूद वह सफल हो पाएगा?

कई बार परीक्षा में असफलता मिली। आसपास के लोग कहने लगे, "अब छोड़ देतेरे बस कीबात नहीं।"


लेकिन हर बार जब वह हार मानने के करीब पहुँचतातो उसे अपनी माँ के शब्द याद आते —

"बेटाअगर तू हार मान गयातो मुश्किलें सच में बड़ी हो जाएँगी। लेकिन अगर तू डटकर खड़ारहातो मुश्किलें खुद छोटी लगने लगेंगी।"


विवेक ने फिर से खुद को संभाला। उसने अपनी असफलताओं से सीखाजहाँ गलती हुईवहाँदोबारा मेहनत की। उसने अपने सपनों के सामने अपनी परेशानियों को झुका दिया।


फिर वह दिन आयाजिसका उसे बरसों से इंतज़ार था। परिणाम घोषित हुआ और विवेक का नामसूची में सबसे ऊपर था। वह IAS अधिकारी बन चुका था।


पूरा गाँव उस दिन सड़कों पर था। ढोल-नगाड़े बज रहे थेमिठाइयाँ बाँटी जा रही थीं। जिन लोगोंने कभी कहा था कि यह उसके बस की बात नहींवही आज गर्व से कह रहे थे — "यह हमारे गाँवका बेटा है।"


विवेक ने गाँव के स्कूल में जाकर बच्चों से कहा —

"मैं भी तुम जैसा ही था — एक गरीब किसान का बेटा। अगर मैं यह कर सकता हूँतो तुम भी करसकते हो। याद रखोमुश्किलें कभी बड़ी नहीं होतीं। हम ही उन्हें बड़ा बना देते हैंजब अपनेहौसले छोटे कर लेते हैं। अगर तुम्हारा हौसला बड़ा हैतो दुनिया की कोई ताकत तुम्हें रोक नहींसकती।"


उसने अपने पहले वेतन से गाँव के स्कूल के लिए किताबें खरीदीं और एक लाइब्रेरी बनवाईताकिगाँव के बच्चों के सपने कभी हालातों की वजह से रुकें नहीं।


विवेक की कहानी यही सिखाती है कि कठिनाइयाँ जीवन का हिस्सा हैंलेकिन जब आपके अंदरहौसला होतो पहाड़ जैसी मुश्किलें भी रेत की तरह बह जाती हैं।

वचन का मान