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Monday, May 4, 2026

लालच बुरी बला

बहुत समय पहले एक छोटे से गाँव रामनगर में श्यामलाल नाम का एक व्यापारी रहता था। वह काफी अमीर था और उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी। फिर भी उसके मन में हमेशा और ज्यादा पैसे कमाने की इच्छा रहती थी। उसकी यही आदत धीरे-धीरे लालच में बदल गई थी।

श्यामलाल का एक बड़ा किराने का दुकान था। गाँव के लोग रोज़ उसके पास सामान लेने आते थे। लेकिन श्यामलाल हमेशा ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए लोगों को कम तौलकर सामान देता था। वह सोचता था कि अगर वह थोड़ा-थोड़ा कम तौलेगा, तो उसे ज्यादा फायदा होगा।

गाँव के कुछ लोगों को उसकी इस आदत पर शक होने लगा था, लेकिन कोई पक्के सबूत के बिना कुछ कह नहीं पाता था।

श्यामलाल का एक पड़ोसी था जिसका नाम रघु था। रघु बहुत गरीब था, लेकिन बहुत मेहनती और ईमानदार आदमी था। वह खेतों में काम करता था और मेहनत से अपने परिवार का पालन-पोषण करता था।

एक दिन रघु श्यामलाल की दुकान पर गेहूँ खरीदने गया। जब वह घर पहुँचा और गेहूँ को तौला, तो उसे पता चला कि वजन कम है।

रघु को बहुत दुख हुआ, लेकिन उसने सोचा कि शायद गलती से ऐसा हो गया होगा।

कुछ दिनों बाद गाँव में एक साधु आए। गाँव के लोग उनका बहुत सम्मान करते थे। साधु बहुत बुद्धिमान थे और लोगों को अच्छे विचार देते थे।

श्यामलाल भी साधु के पास गया और उनसे आशीर्वाद लेने लगा।

साधु ने उसकी आँखों में देखकर कहा,

“बेटा, जीवन में लालच से दूर रहना। लालच इंसान को धीरे-धीरे बर्बादी की ओर ले जाता है।”

लेकिन श्यामलाल ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया।

वह मन ही मन सोचने लगा,

“अगर मैं लालच नहीं करूँगा, तो ज्यादा पैसा कैसे कमाऊँगा?”

कुछ दिनों बाद श्यामलाल को शहर से एक व्यापारी मिलने आया। उसने श्यामलाल को बताया कि पास के जंगल में एक पुराना खजाना छिपा हुआ है।

यह बात सुनकर श्यामलाल के मन में लालच जाग गया।

उसने सोचा—

“अगर मुझे वह खजाना मिल गया, तो मैं बहुत अमीर बन जाऊँगा।”

अगले ही दिन वह खजाने की तलाश में जंगल की ओर निकल पड़ा।

जंगल बहुत घना और डरावना था। फिर भी श्यामलाल लालच में आगे बढ़ता गया।

काफी देर तक भटकने के बाद उसे एक पुराना गुफा दिखाई दिया।

वह धीरे-धीरे गुफा के अंदर गया। अंदर उसे सच में एक पुराना संदूक दिखाई दिया।

संदूक खोलते ही उसकी आँखें चमक उठीं, क्योंकि उसमें सोने के सिक्के और कीमती गहने थे।

श्यामलाल बहुत खुश हो गया।

लेकिन उसका लालच यहीं खत्म नहीं हुआ।

उसने सोचा—

“अगर मैं थोड़ा और अंदर जाऊँ, तो शायद मुझे और ज्यादा खजाना मिल जाए।”

वह लालच में गुफा के और अंदर जाने लगा।

अचानक गुफा के अंदर की जमीन फिसलन भरी थी। उसका पैर फिसल गया और वह नीचे गिर पड़ा।

उसके हाथ से खजाने का संदूक भी गिर गया और सारे सिक्के चारों तरफ बिखर गए।

श्यामलाल घायल हो गया और उसे बहुत मुश्किल से गुफा से बाहर निकलना पड़ा।

जब वह गाँव वापस पहुँचा, तो उसकी हालत बहुत खराब थी।

गाँव के लोगों ने उसकी मदद की और उसे घर पहुँचाया।

अब श्यामलाल को अपनी गलती का एहसास होने लगा था।

उसे साधु की बात याद आई—

“लालच इंसान को बर्बादी की ओर ले जाता है।”

उस दिन के बाद श्यामलाल ने अपने जीवन को बदलने का फैसला किया।

उसने अपनी दुकान में ईमानदारी से सामान बेचने का काम शुरू कर दिया।

अब वह लोगों को सही वजन देता था और किसी को धोखा नहीं देता था।

धीरे-धीरे गाँव के लोगों का उस पर फिर से विश्वास बनने लगा।

श्यामलाल ने समझ लिया था कि सच्ची खुशी धन के लालच में नहीं, बल्कि ईमानदारी और संतोष में होती है।

और सच ही कहा गया है—

“लालच बुरी बला है, जो इंसान को गलत रास्ते पर ले जाती है।”

सीख:

हमें कभी भी लालच नहीं करना चाहिए। संतोष और ईमानदारी ही जीवन को सुखी और सफल बनाते हैं।

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