बहुत समय पहले एक छोटे से गाँव
रामदास के परिवार में उसकी पत्
“बेटा, जीवन में अगर मेहनत और ई
रामदास रोज़ सुबह सूरज निकलने से पहले उठ जाता था। वह अपनी कुल्
गाँव के कई लोग उसकी मेहनत दे
“रामदास बहुत मेहनती आदमी है। व
एक दिन की बात है।
रामदास हमेशा की तरह जंगल में ल
अचानक उसका हाथ फिसल गया और उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई।
रामदास बहुत घबरा गया।
उसने नदी में झाँककर अपनी कुल्
रामदास दुखी होकर नदी किनारे बै
“अगर मेरी कुल्हाड़ी नहीं मिली,
यह सोचकर उसकी आँखों में आँसू आ
तभी अचानक नदी से एक देवी प्रकट
देवी ने रामदास से पूछा,
“तुम इतने दुखी क्यों हो, लकड़
रामदास ने हाथ जोड़कर कहा,
“माँ, मेरी कुल्हाड़ी नदी में गि
देवी ने मुस्कुराकर कहा,
“घबराओ मत। मैं तुम्हारी मदद कर
इतना कहकर देवी नदी में डुबकी ल
उन्होंने रामदास से पूछा,
“क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है
रामदास ने तुरंत सिर हिलाते हुए
“नहीं माँ, यह मेरी कुल्हाड़ी न
देवी फिर नदी में गईं और इस बार
उन्होंने पूछा,
“क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है
रामदास ने फिर विनम्रता से कहा,
“नहीं माँ, यह भी मेरी कुल्हाड़ी नहीं है।”
देवी तीसरी बार नदी में गईं और
रामदास खुशी से बोला,
“हाँ माँ, यही मेरी कुल्हाड़ी है
देवी रामदास की ईमानदारी और सच्
उन्होंने कहा,
“रामदास, तुम बहुत ईमानदार और मे
रामदास यह सुनकर आश्चर्यचकित रह
उसने हाथ जोड़कर देवी को धन्यवा
गाँव के लोगों ने जब यह कहानी सु
गाँव में एक और लकड़हारा था जि
जब उसने रामदास की कहानी सुनी,
“अगर मैं भी अपनी कुल्हाड़ी नदी
अगले दिन वह भी जंगल गया और जा
फिर वह जोर-जोर से रोने लगा।
कुछ देर बाद वही देवी प्रकट हु
“तुम क्यों रो रहे हो?”
धनराज ने झूठ बोलते हुए कहा,
“माँ, मेरी कुल्हाड़ी नदी में गि
देवी नदी में गईं और सोने की कु
धनराज लालच में तुरंत बोला,
“हाँ माँ, यही मेरी कुल्हाड़ी है
देवी को उसकी चालाकी समझ में आ
वे नाराज़ होकर बोलीं,
“तुम झूठ बोल रहे हो और लालच कर
इतना कहकर देवी गायब हो गईं।
धनराज को अपनी असली कुल्हाड़ी भी नहीं मिली और उसे खाली हाथ घर
उधर रामदास अपनी मेहनत और ईमा
गाँव के लोग अक्सर बच्चों को उस
“मेहनत और ईमानदारी का फल हमेशा
और सच ही कहा गया है—
“मेहनत और सच्चाई इंसान को जीवन
सीख:
हमें हमेशा मेहनत और ईमानदारी का रास्ता अपनाना चाहिए। लालच और
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