एक छोटे से गाँव शिवपुर में दो दोस्त रहते थे—अर्जुन और विजय। दोनों बचपन से ही साथ खेलते और साथ स्कूल जाते थे। लेकिन दोनों की सोच में बहुत अंतर था।
अर्जुन का मानना था कि जीवन में मेहनत सबसे जरूरी होती है। अगर इंसान पूरी लगन और मेहनत से काम करे, तो वह जरूर सफल होता है।
वहीं विजय हमेशा किस्मत पर भरोसा करता था। वह अक्सर कहता था,
“अगर किस्मत अच्छी हो, तो बिना ज्यादा मेहनत के भी सब कुछ मिल जाता है।”
स्कूल में भी दोनों का यही हाल था। अर्जुन रोज़ समय पर पढ़ाई करता, अपने शिक्षक की बातें ध्यान से सुनता और घर आकर भी अभ्यास करता।
विजय पढ़ाई को हल्के में लेता था। वह अक्सर कहता,
“इतनी मेहनत करने की क्या जरूरत है? अगर किस्मत में अच्छे नंबर होंगे, तो वैसे ही मिल जाएंगे।”
एक दिन स्कूल में शिक्षक ने घोषणा की कि कुछ महीनों बाद बड़ी प्रतियोगी परीक्षा होने वाली है। जो छात्र इस परीक्षा में अच्छे अंक लाएगा, उसे शहर के एक अच्छे स्कूल में पढ़ने का मौका मिलेगा।
यह सुनकर अर्जुन बहुत उत्साहित हो गया। उसने उसी दिन से पूरी लगन के साथ तैयारी शुरू कर दी।
वह रोज़ सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करता, स्कूल में ध्यान से पढ़ता और शाम को भी अभ्यास करता।
दूसरी ओर विजय पहले की तरह ही आराम करता रहा। वह दोस्तों के साथ खेलता और पढ़ाई को टालता रहता।
जब अर्जुन उसे पढ़ाई के लिए कहता, तो विजय हँसकर कहता,
“तुम इतनी मेहनत कर लो, लेकिन देखना किस्मत से ही सब होगा।”
धीरे-धीरे परीक्षा का समय करीब आ गया।
अर्जुन ने अपनी पूरी तैयारी कर ली थी।
विजय को अब थोड़ा डर लगने लगा, क्योंकि उसने ज्यादा पढ़ाई नहीं की थी। फिर भी वह सोच रहा था कि शायद किस्मत उसका साथ दे दे।
आखिरकार परीक्षा का दिन आ गया।
अर्जुन ने पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी। उसे ज्यादातर सवालों के जवाब अच्छे से आते थे।
विजय को कई सवाल समझ में ही नहीं आए। वह घबरा गया और जैसे-तैसे परीक्षा पूरी की।
कुछ दिनों बाद परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ।
पूरे स्कूल में खुशी की लहर दौड़ गई, क्योंकि अर्जुन ने परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया था।
अब उसे शहर के बड़े स्कूल में पढ़ने का मौका मिलने वाला था।
विजय का परिणाम अच्छा नहीं आया।
वह बहुत दुखी हो गया।
उसने अर्जुन से कहा,
“शायद मेरी किस्मत खराब थी, इसलिए मैं सफल नहीं हो पाया।”
अर्जुन मुस्कुराया और बोला,
“किस्मत भी उन्हीं का साथ देती है जो मेहनत करते हैं।”
विजय को अपनी गलती का एहसास हो गया।
उसने समझ लिया कि केवल किस्मत के भरोसे बैठने से कुछ हासिल नहीं होता।
उस दिन के बाद विजय ने भी मेहनत करने का फैसला किया।
धीरे-धीरे उसने अपनी आदतें बदल लीं और पढ़ाई में मन लगाने लगा।
कुछ समय बाद वह भी अच्छे अंक लाने लगा।
अब दोनों दोस्त मिलकर मेहनत करते और अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करते थे।
गाँव के लोग बच्चों को उनकी कहानी सुनाते और कहते—
“किस्मत से ज्यादा ताकत मेहनत में होती है।”
और सच ही कहा गया है—
“मेहनत ही वह चाबी है जो सफलता के दरवाजे खोलती है।”
सीख:
किस्मत पर भरोसा करने से ज्यादा जरूरी है मेहनत करना। जो इंसान मेहनत करता है, वही जीवन में सच्ची सफलता प्राप्त करता है।
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