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Saturday, April 4, 2026

पानी की एक बूंद की कीमत0

एक छोटे से गाँव हरितपुर में लोग खेती करके अपना जीवन चलाते थे। गाँव के पास एक छोटा सा तालाब और कुछ कुएँ थे, जिनसे पूरे गाँव को पानी मिलता था। कई सालों तक सब कुछ ठीक चलता रहा, लेकिन धीरे-धीरे गाँव के लोगों ने पानी की कद्र करना छोड़ दिया।

लोग नलों को खुला छोड़ देते, खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी बहा देते और कई बार साफ पानी भी बेकार बह जाता था। गाँव के बुज़ुर्ग गोपाल दादा अक्सर कहते थे,

बेटा, पानी की हर बूंद बहुत कीमती होती है। अगर हमने इसे बचाया नहीं, तो एक दिन हमें बहुत पछताना पड़ेगा।

लेकिन गाँव के लोग उनकी बात को गंभीरता से नहीं लेते थे।

गाँव में सोहन नाम का एक लड़का रहता था। वह पढ़ाई में अच्छा था और प्रकृति से बहुत प्यार करता था। जब भी वह देखता कि लोग पानी बेकार बहा रहे हैं, तो उसे बहुत दुख होता था।

एक दिन सोहन ने देखा कि कुछ बच्चे नल खुला छोड़कर खेल रहे हैं और पानी लगातार बह रहा है। सोहन ने तुरंत जाकर नल बंद किया और बच्चों से कहा,

पानी को ऐसे मत बहाओ। यह बहुत कीमती है।

बच्चे हँसते हुए बोले,

अरे सोहन, यहाँ तो बहुत पानी है। एक-दो बाल्टी पानी से क्या फर्क पड़ेगा?”

सोहन चुप हो गया, लेकिन उसे अंदर ही अंदर चिंता हो रही थी।

कुछ महीनों बाद गाँव में भीषण गर्मी पड़ने लगी। बारिश भी कम हुई। धीरे-धीरे तालाब का पानी कम होने लगा और कई कुएँ भी सूखने लगे।

अब गाँव में पानी की भारी कमी हो गई।

लोगों को पीने के पानी के लिए भी दूर-दूर जाना पड़ता था। खेतों में पानी नहीं होने के कारण फसल भी खराब होने लगी।

गाँव के लोग बहुत परेशान हो गए।

एक दिन गाँव के सभी लोग पंचायत में इकट्ठा हुए और इस समस्या का समाधान खोजने लगे।

तभी सोहन ने हिम्मत करके कहा,

अगर हम पहले से पानी बचाते, तो आज हमें यह दिन नहीं देखना पड़ता। अब भी अगर हम मिलकर पानी बचाने की कोशिश करें, तो स्थिति सुधर सकती है।

सोहन ने कुछ सुझाव दिए।

उसने कहा कि गाँव में वर्षा जल संचयन करना चाहिए, नलों को खुला नहीं छोड़ना चाहिए और खेतों में जरूरत के अनुसार ही पानी इस्तेमाल करना चाहिए।

गाँव के लोगों को उसकी बात समझ में आ गई।

उन्होंने मिलकर तालाब को गहरा किया, घरों की छतों से बारिश का पानी इकट्ठा करने की व्यवस्था की और पानी की बर्बादी बंद कर दी।

अगले साल जब बारिश हुई, तो तालाब फिर से भर गया।

अब गाँव में पानी की समस्या काफी कम हो गई थी।

लोगों को समझ आ गया कि पानी की हर बूंद बहुत कीमती होती है।

गाँव के बुज़ुर्ग गोपाल दादा मुस्कुराते हुए बोले,

आज तुम सबने समझ लिया कि पानी की असली कीमत क्या होती है।

उस दिन के बाद गाँव के लोग पानी का बहुत ध्यान रखने लगे।

वे बच्चों को भी सिखाते थे कि पानी की बर्बादी नहीं करनी चाहिए।

और सच ही कहा गया है

पानी की एक-एक बूंद जीवन के लिए अमूल्य होती है।

सीख:

हमें पानी की कद्र करनी चाहिए और उसकी बर्बादी से बचना चाहिए, क्योंकि पानी ही जीवन का आधार है।

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