एक छोटे से गाँव हरिपुर में राजू नाम का एक लड़का रहता था। उसका परिवार बहुतगरीब था। उसके पिता खेतों में मजदूरी करते थे और माँ लोगों के घरों में काम करतीथी। घर की हालत बहुत खराब थी, लेकिन राजू के दिल में एक बड़ा सपना था—पढ़-लिखकर एक बड़ा आदमी बनने का।
राजू बहुत मेहनती और समझदार लड़का था। वह रोज़ सुबह जल्दी उठता, अपनेमाता-पिता की थोड़ी मदद करता और फिर स्कूल चला जाता। उसके पास अच्छे कपड़ेनहीं थे और न ही महंगी किताबें, लेकिन पढ़ाई के प्रति उसका जुनून बहुत मजबूत था।
स्कूल में कई बच्चे अच्छे बैग, किताबें और सुंदर कपड़े पहनकर आते थे। कभी-कभी कुछबच्चे राजू का मजाक भी उड़ाते थे।
एक दिन एक लड़के ने कहा,
“अरे राजू, तुम्हारे पास तो ठीक से जूते भी नहीं हैं, तुम पढ़कर क्या कर लोगे?”
राजू ने शांत होकर जवाब दिया,
“अभी मेरे पास जूते नहीं हैं, लेकिन एक दिन मैं इतना पढ़ूँगा कि अपने सपनों तक जरूरपहुँचूँगा।”
उसकी यह बात सुनकर कुछ बच्चे चुप हो गए।
राजू का एक शिक्षक था—शर्मा सर। उन्होंने राजू की मेहनत और लगन को देखा। एकदिन उन्होंने उसे अपने पास बुलाकर कहा,
“राजू, तुम्हारे अंदर बहुत प्रतिभा है। अगर तुम इसी तरह मेहनत करते रहे, तो जरूर सफलहो जाओगे।”
शर्मा सर ने उसकी पढ़ाई में बहुत मदद की। कभी-कभी वे उसे अपनी पुरानी किताबें भीदे देते थे।
राजू रात को घर आकर दीये की रोशनी में पढ़ाई करता था, क्योंकि उनके घर में बिजलीनहीं थी। कई बार उसे भूखे पेट भी सोना पड़ता था, लेकिन उसने कभी पढ़ाई छोड़ने केबारे में नहीं सोचा।
समय बीतता गया।
एक दिन स्कूल में घोषणा हुई कि जिले में छात्रवृत्ति परीक्षा होने वाली है। जो छात्र इसमेंअच्छे अंक लाएगा, उसे आगे की पढ़ाई के लिए पैसे मिलेंगे।
राजू के लिए यह बहुत बड़ा मौका था।
उसने दिन-रात मेहनत करके तैयारी शुरू कर दी।
परीक्षा का दिन आया। राजू ने पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी।
कुछ हफ्तों बाद परिणाम आया।
पूरा स्कूल खुश हो गया, क्योंकि राजू ने पूरे जिले में पहला स्थान प्राप्त किया था।
अब उसे छात्रवृत्ति मिलने वाली थी, जिससे उसकी आगे की पढ़ाई आसान हो गई।
उसके माता-पिता की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।
शर्मा सर ने गर्व से कहा,
“राजू ने साबित कर दिया कि गरीबी कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनसकती।”
राजू ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। सालों की मेहनत के बाद वह एक बड़ा अधिकारी बनगया।
जब वह अपने गाँव वापस आया, तो पूरे गाँव ने उसका स्वागत किया।
अब वही लोग, जो कभी उसका मजाक उड़ाते थे, उसकी तारीफ कर रहे थे।
राजू ने गाँव के बच्चों से कहा,
“अगर आपके पास पैसे कम हैं, तो दुखी मत होइए। अगर आपके पास मेहनत औरहिम्मत है, तो आप किसी भी ऊँचाई तक पहुँच सकते हैं।”
राजू की कहानी पूरे इलाके में प्रेरणा बन गई।
और सच ही कहा गया है—
“मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।”
सीख:
गरीबी कभी भी सफलता की राह में रुकावट नहीं बनती। सच्ची मेहनत और दृढ़ संकल्पसे कोई भी अपने सपनों को पूरा कर सकता है
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