एक छोटे से गाँव में रोहित नाम का एक लड़का रहता था। रोहित का सपना था कि वह एक महान इंजीनियर बने और अपने गाँव के लिए नई तकनीकें लाए। लेकिन उसके गाँव में न तो अच्छी शिक्षा थी और न ही कोई लैब। लोग अक्सर कहते, “रोहित, इतने बड़े सपने मत देखो, यहाँ तुम्हारे लिए इतना ही काफी है।”
लेकिन रोहित ने हार नहीं मानी। वह जानता था कि अगर उसने अपने सपनों को सच करना है, तो सबसे पहले उसे उन्हें दिखना और महसूस करना होगा। रोज़ वह अपने कमरे में बैठकर कल्पना करता कि कैसे वह नई मशीनें बना रहा है, गाँव के लोगों की मदद कर रहा है और बड़े शहरों में अपने आविष्कार दिखा रहा है। इसी कल्पना ने उसे ऊर्जा और उत्साह दिया।
एक दिन गाँव में स्कूल में विज्ञान प्रतियोगिता हुई। रोहित ने अपनी कल्पना और मेहनत से एक छोटी-सी मशीन बनाई, जो खेतों में पानी की बचत कर सके। शुरुआत में उसकी मशीन काम नहीं कर रही थी। कई बार उसे लगता कि यह असंभव है। लेकिन उसने अपने सपनों को याद किया और सोचा, “मैंने इसे देखा है, अब इसे सच भी करना है।”
रोहित ने लगातार प्रयोग किए, अलग-अलग डिज़ाइन बनाए और अपनी गलतियों से सीखा। उसकी मेहनत ने आखिरकार रंग लाया। उसकी मशीन ने स्कूल में पहला पुरस्कार जीता। उसके गाँव के लोग उसके प्रयास और सफलता को देखकर हैरान रह गए। रोहित की कहानी गाँव के बच्चों के लिए प्रेरणा बन गई।
इस कहानी से यह स्पष्ट होता है कि सपनों को पहले देखना जरूरी है। अगर हम अपने सपनों की कल्पना नहीं करेंगे, तो उन्हें हासिल करने का मार्ग भी नहीं मिलेगा। सपने हमें दिशा देते हैं, हमें प्रेरित करते हैं और हमारे प्रयासों को अर्थपूर्ण बनाते हैं।
रोहित ने यह भी सीखा कि केवल सपने देखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सच करने के लिए मेहनत, धैर्य और साहस की भी आवश्यकता होती है। असफलताएँ आएंगी, परेशानियाँ होंगी, लेकिन अगर हमने अपने सपनों को पहले देखा है और उनके प्रति समर्पित हैं, तो हम उन्हें सच कर सकते हैं।
आखिरकार, रोहित ने अपने गाँव में नई तकनीकों के माध्यम से बदलाव लाया। उसने साबित कर दिया कि जो व्यक्ति अपने सपनों को पहले देखता है और उन्हें पाने के लिए मेहनत करता है, वही असली सफलता प्राप्त करता है। उसकी कहानी युवाओं और बच्चों के लिए एक प्रेरणा बन गई, जो यह सिखाती है कि सपने देखना और उन्हें सच करने की ठान लेना ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है।
No comments:
Post a Comment