आकाश एक छोटे कस्बे का होनहार लड़का था। उसका सपना था कि वह एक वैज्ञानिक बने और देश के लिए नई खोजें करे। लेकिन पढ़ाई में उसे कई बार कठिनाइयाँ आती थीं। गणित के सवाल गलत हो जाते, विज्ञान के प्रयोग असफल हो जाते। कई दोस्त उसका मज़ाक उड़ाते और कहते – “तुझसे नहीं होगा।”
पर आकाश हर बार खुद को यही याद दिलाता –
“सपनों को सच करने का रास्ता मेहनत से होकर जाता है, जो हार नहीं मानते वही सफलता का स्वाद चखते हैं।”
वह रोज़ाना घंटों मेहनत करता, अध्यापकों से सवाल पूछता और लाइब्रेरी में देर तक बैठकर पढ़ता। धीरे-धीरे उसकी समझ गहरी होती गई। स्कूल की परीक्षा में उसने पहला स्थान पाया और बाद में विज्ञान प्रदर्शनी में भी पहला पुरस्कार जीता।
कुछ वर्षों बाद, आकाश ने उच्च शिक्षा पूरी की और एक बड़ा वैज्ञानिक बनकर देश का नाम रोशन किया। उसके गाँव के बच्चे जब उसकी सफलता की कहानी सुनते, तो उन्हें भी यह प्रेरणा मिलती कि मेहनत और धैर्य से हर सपना सच हो सकता है।
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