नेहा एक साधारण परिवार की लड़की थी। उसका सपना था कि वह अध्यापिका बने और गाँव के बच्चों को पढ़ाकर उनका भविष्य सँवारे। लेकिन हालात आसान नहीं थे—घर की गरीबी, कामकाज की जिम्मेदारियाँ और पढ़ाई का बोझ, सब कुछ उसे थका देता।
कई बार नेहा को लगता कि शायद उसका सपना अधूरा रह जाएगा। लेकिन हर बार वह खुद को याद दिलाती –
"संघर्ष ही वह चाबी है जो सफलता के दरवाज़े खोलती है, बिना कठिनाइयों के जीवन की कोई भी जीत अधूरी है।"
नेहा ने मेहनत जारी रखी। दिन में घर के काम और खेतों में हाथ बंटाती, और रात में दीपक की रोशनी में पढ़ाई करती। असफलताओं के बावजूद उसने हार नहीं मानी। आखिरकार उसने शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कर ली।
जब नेहा अध्यापिका बनकर स्कूल पहुँची, तो पूरे गाँव ने उसका स्वागत किया। उसने अपने संघर्ष से यह सिखाया कि कठिनाइयाँ रास्ता रोकती नहीं, बल्कि सफलता की सीढ़ी बनती हैं।
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