उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में रवि नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता रामलाल एक गरीब किसान थे। उनके पास केवल दो बीघा जमीन थी, जिससे पूरे परिवार का गुज़ारा मुश्किल से होता था। कभी बारिश कम होती, तो फसल सूख जाती और कभी ओलावृष्टि सारी मेहनत पर पानी फेर देती।
रवि बचपन से ही पढ़ाई में तेज़ था। उसके पिता हमेशा कहते थे, "बेटा, हमारी गरीबी हमारी किस्मत नहीं, हमारी आज की स्थिति है। शिक्षा ही तुम्हें इस स्थिति से बाहर निकाल सकती है।"
रवि हर दिन सुबह चार बजे उठता। सबसे पहले वह अपने पिता के साथ खेत में काम करता। फसल की सिंचाई करता, पशुओं को चारा डालता और फिर सात किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाता। स्कूल से लौटकर वह माँ की घर के कामों में मदद करता और रात को लालटेन की रोशनी में देर तक पढ़ाई करता।
गाँव के कई लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे।
"किसान का बेटा IAS बनेगा?"
"पहले अपने घर की हालत तो देखो!"
लेकिन रवि मुस्कुराकर सिर्फ़ इतना कहता, "सपने अमीर या गरीब नहीं देखते, सपने मेहनती लोग पूरे करते हैं।"
बारहवीं में उसने पूरे जिले में शानदार अंक प्राप्त किए। गाँव के प्रधान और स्कूल के शिक्षकों ने उसकी पढ़ाई में मदद की। उसे शहर के कॉलेज में दाखिला मिल गया। वहाँ रहने और पढ़ाई का खर्च उठाना आसान नहीं था। रवि ने शाम को बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। दिन में कॉलेज और रात में पढ़ाई—यही उसकी दिनचर्या बन गई।
कॉलेज के दौरान उसे पहली बार पता चला कि देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है UPSC, जिसके माध्यम से IAS अधिकारी बना जा सकता है। उसी दिन उसने तय कर लिया कि अब उसका लक्ष्य IAS बनना है।
उसने पुरानी किताबें खरीदीं, पुस्तकालय में घंटों बैठकर पढ़ाई की और इंटरनेट पर उपलब्ध निःशुल्क अध्ययन सामग्री का पूरा लाभ उठाया। कई बार आर्थिक तंगी इतनी बढ़ जाती कि दो वक्त का खाना भी मुश्किल हो जाता, लेकिन उसने कभी अपने सपने से समझौता नहीं किया।
पहला प्रयास असफल रहा।
दूसरे प्रयास में भी सफलता नहीं मिली।
कई लोगों ने कहा, "अब छोड़ दो, नौकरी कर लो।"
लेकिन उसके पिता ने उसका कंधा थपथपाकर कहा, "बेटा, खेत में भी पहली बार बीज बोने से हर बार अच्छी फसल नहीं मिलती। मेहनत करते रहो, एक दिन ज़रूर सफलता मिलेगी।"
पिता के इन शब्दों ने रवि में नया जोश भर दिया।
उसने अपनी गलतियों का विश्लेषण किया, उत्तर लेखन का अभ्यास बढ़ाया और इंटरव्यू की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया। इस बार वह पहले से कहीं अधिक आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में बैठा।
जब UPSC का परिणाम घोषित हुआ, तो रवि का नाम चयनित उम्मीदवारों की सूची में था। उसने शानदार रैंक हासिल की और IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया।
यह खबर पूरे गाँव में आग की तरह फैल गई।
जो लोग कभी उसका मज़ाक उड़ाते थे, वही आज मिठाइयाँ बाँट रहे थे। गाँव में ढोल-नगाड़े बजे। उसके पिता की आँखों में खुशी के आँसू थे। उन्होंने अपने बेटे को गले लगाकर कहा,
"आज मेरी मेहनत की सबसे बड़ी फसल तैयार हुई है।"
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जब रवि पहली बार IAS अधिकारी बनकर अपने गाँव पहुँचा, तो पूरे गाँव ने फूलों की वर्षा कर उसका स्वागत किया। उसने सबसे पहले अपने पुराने सरकारी स्कूल का दौरा किया और वहाँ के बच्चों से कहा,
"मैं भी इसी स्कूल में बैठकर पढ़ा हूँ। अगर एक गरीब किसान का बेटा IAS बन सकता है, तो आप भी अपने सपनों को सच कर सकते हैं। गरीबी कभी सपनों की दुश्मन नहीं होती, हार मान लेना ज़रूर होता है।"
उसने अपने जिले में शिक्षा, सिंचाई और किसानों की सहायता के लिए कई योजनाओं पर ईमानदारी से काम किया। उसकी कोशिशों से अनेक गाँवों में बेहतर स्कूल, सड़कें और सिंचाई की सुविधाएँ पहुँचीं। अब लोग उसे सिर्फ़ एक अधिकारी नहीं, बल्कि अपने गाँव का गर्व मानते थे।
कहानी से सीख
सफलता पैसों से नहीं, मेहनत, धैर्य और दृढ़ संकल्प से मिलती है। गरीबी रास्ता कठिन बना सकती है, लेकिन मंज़िल तक पहुँचने से नहीं रोक सकती। जो व्यक्ति अपने लक्ष्य पर अडिग रहता है, एक दिन पूरी दुनिया उसकी सफलता की मिसाल देती है।
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