एक छोटे से गाँव में अंकित नाम का एक लड़का रहता था। उसका परिवार बहुत साधारण था। उसके पिता खेतों में मेहनत करते थे और उसकी माँ, सरिता, घर के सारे काम संभालती थीं। अंकित अपनी माँ से बहुत प्यार करता था, क्योंकि उसकी माँ हमेशा उसे सही रास्ता दिखाती थीं।
अंकित पढ़ाई में ठीक था, लेकिन कभी-कभी वह छोटी-छोटी गलतियाँ कर देता था। उसकी माँ उसे हमेशा प्यार से समझाती थीं और कहती थीं—
“बेटा, जीवन में सच्चाई, मेहनत और अच्छे संस्कार सबसे बड़ी पूँजी होते हैं।”
एक दिन की बात है। अंकित स्कूल से घर लौट रहा था। रास्ते में उसे सड़क पर एक पर्स पड़ा हुआ मिला। उसने पर्स उठाकर देखा तो उसमें बहुत सारे पैसे थे।
पैसे देखकर अंकित के मन में लालच आ गया। उसने सोचा,
“अगर मैं ये पैसे रख लूँ, तो अपने लिए नई साइकिल खरीद सकता हूँ।”
वह पर्स लेकर घर पहुँचा। उसकी माँ ने देखा कि अंकित कुछ सोच में पड़ा हुआ है।
उन्होंने पूछा,
“क्या हुआ बेटा? तुम इतने चुप क्यों हो?”
अंकित ने सारी बात अपनी माँ को बता दी और पर्स दिखाया।
माँ ने पर्स खोला और उसमें रखे कागज़ों को देखा। उनमें एक पहचान पत्र था, जिस पर एक आदमी का नाम और पता लिखा था।
माँ ने मुस्कुराते हुए कहा,
“बेटा, यह पर्स किसी की मेहनत की कमाई है। अगर यह खो गया होगा, तो वह व्यक्ति बहुत परेशान होगा।”
अंकित ने धीरे से कहा,
“लेकिन माँ, अगर हम यह पैसे रख लें तो किसी को पता भी नहीं चलेगा।”
माँ ने प्यार से उसके सिर पर हाथ रखा और बोलीं,
“बेटा, दुनिया को भले ही पता न चले, लेकिन हमारा दिल और भगवान सब जानते हैं। गलत तरीके से मिला पैसा कभी सुख नहीं देता।”
माँ की यह बात अंकित के दिल को छू गई।
उसने तुरंत फैसला किया कि वह पर्स उसके असली मालिक को लौटाएगा।
माँ ने उसे उस पते पर जाने को कहा जो पहचान पत्र पर लिखा था।
अंकित अपनी माँ के साथ उस पते पर पहुँचा।
वहाँ एक बुज़ुर्ग व्यक्ति बहुत चिंतित होकर इधर-उधर कुछ ढूँढ रहे थे। अंकित ने उनसे पूछा,
“क्या आपका पर्स कहीं खो गया है?”
बुज़ुर्ग व्यक्ति ने हैरानी से कहा,
“हाँ बेटा, मेरा पर्स कहीं गिर गया है। उसमें मेरे जरूरी कागज़ और पैसे थे।”
अंकित ने तुरंत पर्स उन्हें दे दिया।
बुज़ुर्ग व्यक्ति ने पर्स खोलकर देखा—उसमें सारे पैसे और कागज़ सुरक्षित थे।
उनकी आँखों में खुशी के आँसू आ गए।
उन्होंने कहा,
“बेटा, तुम बहुत ईमानदार हो। अगर तुम चाहते तो यह पैसे अपने पास रख सकते थे।”
अंकित ने मुस्कुराकर कहा,
“मेरी माँ ने मुझे सिखाया है कि हमेशा सही काम करना चाहिए।”
यह सुनकर बुज़ुर्ग व्यक्ति बहुत प्रभावित हुए।
उन्होंने अंकित को आशीर्वाद दिया और कहा,
“तुम्हारी माँ ने तुम्हें बहुत अच्छे संस्कार दिए हैं। तुम जीवन में जरूर सफल होगे।”
अंकित और उसकी माँ घर लौट आए।
उस दिन अंकित को अपनी माँ की सीख का असली महत्व समझ में आ गया।
उसने अपनी माँ से कहा,
“माँ, आज मुझे समझ में आया कि आपकी सीख कितनी कीमती है।”
माँ ने मुस्कुराते हुए कहा,
“बेटा, जीवन में कई बार ऐसे मौके आते हैं जब हमें सही और गलत में से एक रास्ता चुनना पड़ता है। अगर हम हमेशा सही रास्ता चुनेंगे, तो हमें कभी पछतावा नहीं होगा।”
उस दिन के बाद अंकित ने अपनी माँ की हर सीख को दिल से अपनाया।
वह हमेशा सच बोलने लगा, मेहनत से पढ़ाई करने लगा और दूसरों की मदद करने लगा।
धीरे-धीरे वह अपने स्कूल का सबसे अच्छा और संस्कारी छात्र बन गया।
गाँव के लोग भी उसकी तारीफ करने लगे और कहते—
“अंकित सच में बहुत अच्छा लड़का है, क्योंकि उसे अपनी माँ से अच्छे संस्कार मिले हैं।”
और सच ही कहा गया है—
माँ की सीख जीवन की सबसे बड़ी दौलत होती है।
सीख:
माँ हमें सही और गलत का फर्क सिखाती है। अगर हम माँ की सीख को अपने जीवन में अपनाएँ, तो हम हमेशा सही रास्ते पर चल सकते हैं और जीवन में सफलता पा सकते हैं।
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