Friday, January 29, 2016

क्रोघ एक विष

सिकंदर जब भारत में आया तो कई राज्यों और साम्राज्य के विस्तार से भी खुश नहीं हुआ तो अपने वतन को लौटने को सोचा  इसी बीच उसके मन में आया की भारत तो साधु संतो और ज्ञानियो के देश है इस देश से कोई एक ज्ञानी को अपने साथ ले जाने को सोचा इसकी खोज में लग गया । वह अपने फौज के साथ एक ज्ञानी की खोज में लग गया तभी देखा एक नागा साधु एक पेंड के नीचे ध्यान लगा के बैठा है सिकंदर और उसका फौज उस साधु के ध्यान से बाहर आने के इंतजार करने लगा जब साधु का ध्यान टुटा तो देखा सामने सिकंदर के साथ उसकी फौज सामने खड़ी है ...
सिकंदर ने उस साधु को अपने साथ जाने के लिए कहा लेकिन साधु ने कहा मै आपके साथ नहीं जा सकता ये बात सुनकर सिकंदर ने कहा की मुझे न सुनने की आदत नहीं है और साथ ले जाने के लिए जिद करने लगा लेकिन साधु अपने बात पर अड़ा रहा ये देखकर सिकंदर और उसके साथी बहुत गुस्से में आ गए और तलवार निकालकर उसके गर्दन पर रख कर बोला या तो  मेरे साथ चलो या मरने के लिए तैयार हो जाओ इसपर साधु ने कहा ऐसा कुछ भी नहीं तुम्हारे पास जो तुम मुघे दे सको वो सबकुछ मेरे पास है जो तुम्हारे पास है मै जहां हु मै बहुत खुश हूँ और मै तुम्हारे साथ नहीं जाऊंगा तुझे मारना है तो मर दो लेकिन कभी भी अपने को सिकंदर महान नहीं कहना क्योंकि महान कहलाने की एक भी गुण नहीं है. तुम मेरे गुलाम के गुलाम हो ये बात सुनकर सिकंदर को मन में झटका लगा की जो पूरी दुनिया को जीता उसको एक नंगा साधु कह रहा है तुम महान नहीं हो, सिकंदर ने उस साधु से कहा आखिर तुम कहना क्या चाहते हो वो बात बताओ मै कैसे तुम्हारे गुलाम का गुलाम हू . संत ने जबाब दिया मै जबतक नहीं चाहता तब तक मै गुस्सा नहीं कर सकता गुस्सा मेरा गुलाम है लेकिन गुस्से को जब लगता है तुम्हारे ऊपर हावी हो जाता है तुम अपने गुस्सा के गुलाम हो भले ही तुम दुनिया जीते हो लेकिन रहोगे तुम मेरे दास के दास.

यह सुनकर सिकंदर दंग रह गया और श्रद्धा पूर्वक सर झुकाकर अपने फौज के साथ लौट गया । इस तरह से सिकंदर को भी एक नागा साधु से हारकर लौटना पड़ा.

हमारे अंदर जो गुस्सा रूपी  विष घर बनाकर बैठा है उसे बाहर निकलने की जरूरत है यह हमारे शरीर को नुकसान पहुँचाता ही है हमारे रिश्ते नाते से भी दूर करता है हम इस गुस्से के कारण जाने अनजाने में अपना बहुत नुकसान पहुचाते है भले ही दूसरे के ऊपर गुस्सा करके हमारे मन को तात्कालिक जीत मिलती है लेकिन हकीकत ये है की इसमें हमारी हर बड़ी होती है .

No comments: