Monday, November 23, 2015

पुत्र की सेवा

रमेश अपने बूढ़े पिता को वृद्धाश्रम एवं अनाथालय में छोड़कर वापस लौट रहा था।
उसकी पत्नी ने उसे यह सुनिश्चत करने के लिए फोन किया कि पिता त्योहार वगैरह की छुट्टी में भी वहीं रहें और घर ना चले आया करें !
रमेश पलट के गया तो उसने देखा कि उसके पिता वृद्धाश्रम एवं अनाथालय के प्रमुख के साथ ऐसे घुलमिल कर बात कर रहे थे जैसे वे एक दूसरे को बहुत पहलें से जानते हों और उनके बहुत पुराने और प्रगाढ़ सम्बंध हों।  
तभी उसके पिता अपने कमरे की व्यवस्था देखने के लिए वहाँ से चले गए।
अपनी उत्सुकता शांत करने के लिए रमेश ने अनाथालय प्रमुख से पूँछ ही लिया...
"आप मेरे पिता को कब से जानते हैं?"
मुस्कुराते हुए प्रमुख ने जवाब दिया... "पिछले तीस साल से...जब वो हमारे पास एक अनाथ बच्चे को गोद लेने आए थे! "
 

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