Sunday, November 15, 2015

अच्छे काम की शुरुआत

 फ्रैंकलिन नाम का एक गरीब लड़का रहता था। उसकी कॉलोनी में हमेशा अंधेरा रहता था। वह रोज देखता कि अंधेरे में आने-जाने में लोगों को बहुत दिक्कत होती है। एक दिन उसने अपने घर के सामने एक बांस गाढ़ दिया और शाम को उस पर एक लालटेन जला कर टांग दिया। लालटेन से उसके घर के सामने उजाला हो गया लेकिन पड़ोसियों ने इसके लिए उसका खूब मजाक उड़ाया। एक व्यक्ति बोला, 'फ्रैंकलिन, तुम्हारे एक लालटेन जला देने से कुछ नहीं होगा। पूरी कालोनी में तो अंधेरा ही रहेगा।'
फ्रैंकलिन के घर वालों ने भी उसके इस कदम का विरोध किया और कहा,'तुम्हारे इस काम से फालतू में पैसा खर्च होगा।' फ्रैंकलिन ने कहा,'मानता हूं कि एक लालटेन जलाने से ज्यादा लोगों को फायदा नहीं होगा, मगर कुछ लोगों को तो इसका लाभ मिलेगा ही।' कुछ ही दिनों में इसकी चर्चा हर तरफ शुरू हो गई और फ्रैंकलिन के प्रयास की सराहना भी की जाने लगी। उसकी देखादेखी कुछ और लोग अपने-अपने घरों के सामने लालटेन जला कर टांगने लगे। एक दिन पूरी कॉलोनी में उजाला हो गया।
यह बात शहर भर में फैल गई और नगरपालिका पर चारों तरफ से दबाव पड़ने लगा कि वह कॉलोनी में रोशनी का इंतजाम अपने हाथ में ले। कमेटी ने ऐसा ही किया। धीरे-धीरे फ्रैंकलिन की शोहरत चारों तरफ फैल गई। एक दिन नगरपालिका ने फ्रैंकलिन का सम्मान किया। इस अवसर पर फ्रैंकलिन ने कहा कि हर अच्छे काम के लिए पहल तो किसी एक को करनी ही पड़ती है। अगर हर कोई दूसरों के भरोसे बैठा रहे तो कभी अच्छे काम की शुरुआत होगी ही नहीं।

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