Friday, October 9, 2015

सफलता का मूल मंत्र

एक बार एक व्यक्ति को पता चला चला कि उसके पास के गाँब में बाबा आया हुया है जो भी उसको अपनी समस्या  के बारे में बताता है उसको उसी समय उचित बाबा हल प्रदान करते और जिसके चलते लम्बी लाईन भी है उस व्यक्ति ने वहँ जाने का निर्णय किया और जैसे ही वो बाबा से मिला उसने अपने जीवन की सबसे बढी समस्या के बारे में बताते हुऐ कहा कि जब भी में कोई कार्य शुरू करता हूँ सफलता प्राप्त न होने के कारण करके किसी और कार्य को शुरू करना पढता है जिसके चलते न जाने कितने कामों को शुरू करके बन्द करना पढा है जिसके चलते आर्थिक रूप से ही नही मन्सिक  रूप से छति हुई है लेकिन आज तक अपनी असफलता का प्रमुख कारण नही जान सका हूँ बस अभी तक अपनी किस्मत को ही दोशी मान्ता रहा हूँ और अब मेरे मिश्र तथा परिवार जन भी दूर होते जा रहे है हर कोई मुझे अयोग्य समता है कोई भी मुझसे अधिक बात करना भी  पसन्द नही करता मुझे क्या करना चाहिए
बाबा ने उसकी बात ध्यान से सुनने के बाद उसे एक रात आश्रम में रुकने को कहा और शाम को जब दोंनों एक साथ टहल रहे थे तभी उस व्यक्ति की नजर एक मकड़ी  पर गई वो एक पेड की ऊची डाल पर अपने जाल की मदद से लटकी हुई थी और बार बार ऊपर डाल की तरफ चढने की कोशिश कर रही थी लेकिन बार बार असफल हो रही थी और उस व्यक्ति को भी विश्वास हो चला था कि वो अपने कार्य में सफल नही हो सकति बेकार की कोशिश कर रही और सोचते सोचते मुसकुराने लगा तभी उस मकड़ी को अपने कार्य में सफल होते देख उसकी आखें खुली की खुली रह गई अब उसे विश्वास नही हो रहा था
तब बाबा ने उस व्यक्ति से पूछा कि ये सब देख तम्हें कुछ समझ आया उसने जबाब देते हुऐ पूछा ऐसे कैसे हो सकता है तब बाबा ने जबाब देते हुऐ कहा कि यदि  हम खुद पर विश्वास करै और किसी भी कार्य जब भी किसी कार्य को अपना हाथ में लैं उसे पूण करने के लिऐ अपनी सम्पूर्ण  शक्ति लगा दें तो कोई भी कार्य असम्भव नही है और सदैव सफलता की ही प्रप्ति होगी और आपके मिश्र तथा परिवार जन की विचार धारा भी स्वयंम आपके साथ हो जयेगी तुम सदैव याद रखना लोगो की सोच से हमारी सफलता या विफलता का निर्णय नही होता लेकिन हमारी सफलता से लोगो की आपके बारे में सोच का सदैव निर्णय होता है
और ये ही हमारे सुख दुख तथा सफलता का मूल मंत्र है जो भी व्यक्ति अपनाता है उसे जीवन भर सफलता ही सफलता प्राप्त होती है  

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