Thursday, October 15, 2015

व्यापारी की समस्या

एक बार एक व्यापारी अपने व्यवसाय की आर्थिक समस्याऔ से ईतना अधिक परेशान था कि जिसके उपचार के

लिए  कुछ भी करने को तैयार था तभी उसके एक मित्र ने उसे  अपने घर आऐ बाबा को मिलने के लिए कहा और

बताया कि वो किसी भी व्यक्ति समस्या का शीघ्र ही समाधान कर देते है ये सब सुनते ही वह व्यापारी सारा काम

छोड अपने मित्र के घर चला गया और वहाँ बाबा से मिल कर अपनी समस्या के बारे में विस्तार से बताया उस

व्यापारी की सारी बातै सुन बाबा ने  उसे एक कहानी सुनाई

एक बार माता पारवति ने भगवान शिव से अत्याधिक गरीबी की स्थिति से गुजर रहे एक शिव भक्त की विपदाऔ

को समाप्त करने का आग्रह किया लेकिन भगवान शिव ने उनकी बात ये कहते अस्विकार कर दिया कि सबकी

किसमत और भाग्य का पहले से ही लिखा जा चुका होता है उसे चहा कर भी नही बदला जा सकता लेकिन उनकी

इस बात से माता पारवति सहमत नही हुई और उन्होने जिद पकड ली कि आप को अपने भक्त के दुखों का अंत

करना ही होगा और अंत में भगवान ने अपने भक्त की सहयता के लिए उन्होने जिस रस्ते वह रोज सुबह घर से

मंदिर जाता था वहँ एक सोने के आभूशणो से भरे कपडे को उसके रसते में डाल दिया और जैसे ही वह भक्त अपने

घर से निकला उसने देखा कि एक अंधा व्यक्ति उसी की तरफ चला आ रहा है उस अंधे व्यक्ति को देख उसके मन

में विचार आया कि अगर ये व्यक्ति बिना आखौ के कैसे चलता अगर मुझे ये जानना है तो आज अपनी आखें बंद

करके ही मंदिर तक जाना होगा और उसने वैसा ही किया और  सोने के आभूशणो से भरे कपडे को बिना देखे आगे

चला गया ये सब देख माता को अत्याधिक क्रोध आया तब भगवान शिव ने माता को समझाया कि इस सब में उस

भक्त का कोई दोष नही है सदैव किसी भी व्यक्ति को वही मिलता है जो उसकी किसमत में होता है

ये कहानी सुनाने के बाद बाबा ने उस व्यापरी से पूछा कि अभी भी तुम्हारे  दिमाग में कोई और प्रश्न है क्या नही

बाबा जी अब मुझे ये समझ आ गया है कि हर समस्या के हल का उचित समय व उचित रस्ता होता है बस हम

सभी को अपने अंदर धैर्य बनाए रखना चाहिए तभी हम अपनी सभी समस्याऔ को हल कर सकते है

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