Tuesday, September 8, 2015

आपका हीरा आपके दिमाग में है

एक किसान था जो बहुत खुश और संतुष्ट था। वह खुश था क्योंकि वह संतुष्ट था। वह संतुष्ट था क्योंकि वह खुश था। एक बार एक समझदार आदमी उसके पास आया और उसे हीरे का महत्त्व समझाने लगा कि हीरे के साथ शानों-शोहरत साथ आती है। उस आदमी ने कहा-“यदि तुम्हारे पास अपने अँगूठे के आकार का हीरा है तो तुम खुद का शहर बना सकते हो। यदि तुम्हारे पास अपनी मुट्ठी जितना बड़ा हीरा है तो आप अपना खुद का देश बना सकते हो।”
उस रात वह किसान सो नहीं पाया। वह दुखी और असंतुष्ट था। वह दुखी था क्योंकि वह असंतुष्ट था। वह असंतुष्ट था क्योंकि वह दुखी था। अगली सुबह,उसने अपने परिवार का ख्याल कर के अपना खेत बेचने का इंतजाम किया, और हीरे की खोज में निकल गया।
उसने अपना पूरा देश ढूँढ लिया,पर उसे हीरा नहीं मिला। उसने बाकी देशों में भी बहुत ढूँढा,पर वहाँ भी उसे हीरा ना मिला। अंत में,वह शारीरिक, मानसिक और आर्थिक तौर पर हार गया। इस बात से वह इतना पीड़ित हुआ कि उसने नदी में कूद कर आत्महत्या कर ली।
इधर,जिस व्यक्ति ने उस किसान का खेत ख़रीदा था,वह खेतों में से बहती पानी की धारा से अपने ऊँटों को पानी पिला रहा था। उस धारा के उस पार,सूर्य की किरणें एक छोटे से पत्थर पर पड़ीं और वह पत्थर इन्द्रधनुष की भांति चमक उठा। उस व्यक्ति ने उसे उठाया और यह सोच कर कि वह उसके घर की शोभा बढ़ाएगा,अपने कक्ष में रख दिया। उसी दिन वह समझदार व्यक्ति आया और वह पत्थर देख कर उसने उससे पूछा-“क्या हाफ़िज़ वापिस आ गया है?”
उस नए मालिक ने उत्तर दिया-“नहीं,आप क्यों पूछ रहे हैं?”
समझदार व्यक्ति बोला-“यह पत्थर हीरा है,जिसे मैं देखते ही पहचान गया था।”
उस आदमी ने कहा-“नहीं,यह केवल एक चमकदार पत्थर है,जिसे मैंने धारा के पास से उठाया है और वहाँऐसे ही ढेरों पत्थर हैं।”वे वहाँ गए और उस स्थान का निरीक्षण किया। वहाँ पड़े पत्थर वास्तव में हीरे थे। अंततः,उन्होंनें पाया कि उस खेत की भूमि ऐसे ही अनेक हीरों से लबालब थी।
दूर के ढोल सदैव सुहावने ही लगते हैं। जब हमारा दृष्टिकोण सही होता है,तब हम उन सभी हीरों को पहचान पाते हैं जिन पर हम चल रहे होते हैं। अवसर सदैव हमारे आस पास ही होता है,आवश्यकता होती है बस उन्हें पहचानने की। और एक ही अवसर कभी भी आपके जीवन में दुबारा दस्तक नहीं देता।

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