Wednesday, July 29, 2015

अधूरा पाठ : पैसा पेसे को खींचता है

एक गुरु अपने शिष्यों को कुछ समझा रहे थे। तभी एक चोर उधर से निकला। उसने सोचा- जरा देखें, गुरुजी अपने शिष्यों को क्या ज्ञान दे रहे हैं। लेकिन कुछ संकोच और कुछ डर से वह वहां रुक नहीं सका। उसके कान में यही शब्द पड़े- 'पैसा पैसे को खींचता है।' चोर जल्दी में आगे बढ़ गया और आगे गुरुजी ने और क्या कहा उसने नहीं सुना। लेकिन उसने जो बात सुनी थी, उसी को आजमाने की सोची। वह राजा के खजाने में चोरी के लिए जा रहा था। सेंध लगाकर आधी रात को जब उसने खजाने में प्रवेश किया तो सामने सोने के सिक्कों का ढेर लगा देखा। बस, वह अपनी जेब से एक सिक्का निकाल कर खड़ा हो गया कि देखें कैसे पैसा पैसे को अपनी तरफ खींचता है। लेकिन उसके हाथ के पैसे की ओर कोई पैसा खुद खिंचकर नहीं आया।

चोर का मन यह मानने को तैयार नहीं था कि गुरुजी अपने शिष्यों को झूठी शिक्षा दे रहे होंगे। उन पर भरोसा रख वह वहीं खड़ा रहा। आखिरकार उसके हाथ का सिक्का ही ढेर में जाकर गिर गया। वह बेहद दुखी हुआ। उधर सिक्के के गिरने से हुई आवाज से पहरेदार आ गए और चोर पकड़ा गया। अगले दिन जब राजा के दरबार में चोर को पेश किया गया तो उसने गुरुजी की शिक्षा और अपने प्रयोग की बात बताई। जब यह सारी बात गुरुजी तक पहुंची तो वह बहुत हंसे और उन्होंने राजा से कहा- चोर ने मेरे शब्दों के भाव को नहीं समझा, वह शब्दार्थ में ही उलझ गया। उसने अधूरा पाठ सुना था इसलिए ऐसा हुआ। मैंने आगे कहा था- ज्यादा पैसा कम पैसे को खींच लेता है।

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