Saturday, March 18, 2017

बेटा भाग्य से और बेटी सौभाग्य से

एक दीन की बात है लड़की की माँ खुब परेशान होकर अपने पति को बोली की एक तो हमारा एक समय का खाना पुरा नही होता और बेटी दिन ब दिन बड़ी होती जा रही हैं गरीबी की हालत में इसकी शादी कैसे करेंगे  बाप भी विचार में पड़ गया दोनों ने दील पर पत्थर रख कर एक फैसला किया की कल बेटी को मार कर गाड़ देगें दुसरे दीन सुरज निकला माँ ने लड़की को खुब लाड प्यार किया अच्छे से नहलाया बार बार उसका सर चूमने लगी यह सब देख कर लड़की बोली माँ मुझे कही दुर भेज रहे हो क्या वरना आज तक आपने मुझे ऐसे कभी प्यार नही किया माँ केवल चुप रही और रोने लगी तभी उसका बाप हाथ में फावड़ा और चाकू लेकर आया माँ ने लड़की को सीने से लगा कर बाप के साथ रवाना कर दीया रास्ते में चलते चलते बाप के पैर मे कांटा चुभ गया बाप एक दम से नीचे बैठ गया बेटी से देखा नही गया उसने तुरंत कांटा निकाल कर फटी चुनरी का एक हिस्सा पैर पर बांध दीया बाप बेटी दोनो एक जंगल में पहुचे बाप फावड़ा लेकर एक गढढा खोदने लगा बेटी सामने बैठे बैठे देख रही थी थौड़ी देर बाद गरमी के कारण बाप को पसीना आने लगा बेटी बाप के पास गयी और पसीना पोंछने के लिए अपनी चुनरी दी बाप ने धक्का देकर बोला तू जाकर बैठ थौड़ी देर बाद जब बाप गढढा खोदते खोदते थक गया  बेटी दुर से बैठे बैठे देख रही थी जब उसको लगा की पिताजी शायद थक गये तो पास आकर बोली पिताजी आप थक गये हैं लाओ फावड़ा मे खोद देती हु आप थोड़ा आराम कर लो मुझेसे आपकी तकलीफ नही देखी जाती यह सुनकर बाप अपनी बेटीको  गले लगा लिया उसकी आखों में आंसू की नदियाँ बहने लगी उसका पसीज गया बाप बोला बेटा मुझे माफ़ कर देना यह गढढा में तेरे लिए ही खोद रहा था और तू मेरी चिन्ता करती हैं  अब जो होगा सो होगा तू हमेशा कलेजे का टुकड़ा बन कर रहेगी मै खुब मेहनत करूँगा और तेरी शादी धुम धाम से करूँगा 
सारांश  बेटी तो भगवान की अनमोल भेंट हैं
इसलिए कहते हैं बेटा भाग्य से मिलता हैं और बेटी सौभाग्य से
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