Tuesday, February 9, 2016

जैसी करनी वैसी भरनी

एक गांव में रहीम नाम का एक किसान रहता था। वह बड़ा सरल, मिलनसार और मेहनती था। गांव के सभी लोग उसे पसंद करते थे क्योंकि वह लोगों की मदद करने को हरदम तैयार रहता था। अपनी मेहनत से उगाई फसल बेचकर वह अच्छी-खासी कमाई कर लेता था। उसी गांव में दूसरा किसान रफीक भी रहता था। रफीक और रहीम के खेत पास-पास ही थे। यह बात रफीक को बिलकुल अच्छी नहीं लगती थी कि सभी गांव वाले रहीम को अच्छा मानते थे। वह रहीम से नफरत करता था।
रहीम तो हमेशा अपने खेतों पर काम करता रहता था, लेकिन रफीक इधर-उधर घूमने में ही समय निकाल देता। वह हमेशा ऐसे मौके की तलाश में रहता था जिससे वह रहीम को नुकसान पहुंचा सके। एक साल रहीम के खेत में बहुत अच्छी फसल पैदा हुई। यह देखकर रफीक को बड़ी जलन हुई। फसल कटने से कुछ दिन पहले एक दिन मौका पाकर उसने रहीम के खेत में आग लगा दी। आग फैलने लगी तो रफीक का खेत भी जलने लगा। गांव वालों को पता चला कि रहीम के खेत में आग लगी है तो वे जी-जान से आग बुझाने में जुट गए।
रहीम की आधी फसल जलने से बच गई, लेकिन रफीक के खेत की ओर चलने वाली तेज हवा और आग ने उसकी पूरी फसल चौपट कर डाली। लोग चाहकर भी रफीक की मदद नहीं कर पाए। यह उसकी लगाई हुई आग का परिणाम था जो उसे ही भुगतना पड़ा। वह अपना सिर पकड़ कर बैठ गया। अब उसकी समझ में आ गया था कि दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वाला पहले खुद उसमें गिरता है।
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